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इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स का स्टार्टअप, प्लास्टिक अाैर मार्बल के टुकड़ाें से बनाई ईंट, हो सकती है रिसाइकल

Udaipur News - भारत में तेजी से हो रही आर्थिक वृद्धि के कारण ईंट उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। यहां सालाना 250 बिलियन ईंटाें का उत्पादन...

Jul 09, 2019, 11:40 AM IST
Udaipur News - rajasthan news students of engineering startup bricks made of plastic and pieces of marble can be recycled
भारत में तेजी से हो रही आर्थिक वृद्धि के कारण ईंट उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। यहां सालाना 250 बिलियन ईंटाें का उत्पादन हाेता है। मगर इसे बनाते वक्त निकलने वाला कार्बन फुटप्रिंट पर्यावरण काे ताे नुकसान पहुंचा रहा है साथ ही इन ईंटों काे रिसाइकल तक नहीं किया जा सकता। इसी बात काे ध्यान में रखकर घरेलू अाैर अाैद्याेगिक कचरे काे मिला कर उदयपुर के सिविल इंजीनियरिंग के स्टूडेंट्स ने ईंटे तैयार की है, जिसे उन्होंने व्रिक्स का नाम दिया है। एनजेअार इंस्टीट्यूट मे पढ़ रहे कुंज प्रीत अराेड़ा, कृष्णा चाैधरी, हनी काेठारी अाैर सैयद अामिर के इस इनोवेटिव आइडिया पर बने प्रोजेक्ट्स काे अाॅल इंडिया काउंसिल अाॅफ टेक्निकल एज्युकेशन की अाेर से 10 लाख की सहायता दी गई है। वहीं अाईअाईटी मद्रास में हुए कार्बन जीराे चैलेंज में इस टीम काे 5 लाख की फंडिंग दी गई। इसके अलावा उनके इस आइडिए काे कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल करने के लिए बैंगलोर अाैर चेन्नई की कम्पनियों ने कॉन्टेक्ट अाैर फंडिंग के प्रस्ताव रखे हैं।

मशीन से बनाते

इन स्टूडेंट्स ने प्लास्टिक अाैर मार्बल के टुकड़ों से बनाई ईंट।

आकार देते हुए

एक घंटे में 100 से ज्यादा का प्रोडक्शन, कीमत Rs. 3

टीम के मेंटर पंकज पाेरवाल बताते हैं कि हमने इस प्राेजेक्ट मंे लगी मशीनें तैयार की हैं अाैर हम जल्द ही इसका पेटेंट करवाने वाले हैं। पाेरवाल के अनुसार घर निर्माण में उपयाेग में अाने वाली ये ईंटेें 30 से 40 प्रतिशत प्लास्टिक बाॅट्लस, 20 प्रतिशत मार्बल के छाेटे टुकड़ाें अाैर अाैद्याेगिक कचरे काे एक साथ मिलाकर बारीक चूरे से तैयार की जाती है, जिसमें बाइंडर की तरह प्लास्टिक काे उपयाेग में लिया जाता है। खास बात ये है कि इन व्रिक्स काे फिर से रिसाइकल किया जा सकता है। अामताैर पर सीमेंट से बनी ईंटें तैयार हाेने में कम से कम दाे दिन का समय लगता है वहीं ये एक घंटे में 100-120 बनाई जा सकती है। एक व्रिक की कीमत मात्र 3 रुपए है अाैर इसका भार केवल 1.5-2 िकलाे है। इनका दावा है कि मार्बल के टुकड़ाें में कैल्शियम, मैग्निशियम अाैर एल्युमिनियम के आॅक्साइड हाेने के कारण ये ईंटें फायर िरटारडेंट हाेती हैं, जिस कारण इनके बने घराें में अाग लगने की संभावना न के बराबर हाेती है।

...और ईंट तैयार

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