सुखाड़िया विश्वविद्यालय काॅपियां जांचने में फेल
मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय की यूजी-पीजी सहित अन्य परीक्षाएं देने वाले 13 से 17 हजार परीक्षार्थी हर गलत कॉपी जांचने की वजह से परेशानियों का सामना कर रहे हैं। हैरत की बात यह भी है कि इनमें से 10 से 13 हजार परीक्षार्थियों के पुनर्मूल्यांकन में अंक (मार्क्स) भी बदले जाते हैं। सुविवि में हर साल एक लाख 80 हजार स्टूडेंट्स परीक्षा देते हैं। खुद विवि प्रशासन के अांकड़े बताते हैं कि पिछले 10 साल के दाैरान 1.51 लाख परीक्षार्थियों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था, जिनमें से 1.17 लाख परीक्षार्थियों के नंबर बदले हैं। इन 1.17 लाख से एक लाख से अधिक परीक्षार्थियाें के पहले से ज्यादा मार्क्स अाए हैं। हर साल पुनर्मूल्यांकन के लिए छात्राें से एक कराेड़ बीस लाख रुपए बताैर फीस ली जा रही है।
सूचना का अधिकार के तहत किए आवेदन पर मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2015 से 2017 तक के तीन वर्षों में विश्वविद्यालय से 3.62 करोड़ रुपए बतौर पुनर्मूल्यांकन फीस लिए गए। बड़ा सवाल ये है कि या ताे पूर्व में कॉपियां गलत तरीके से जांच दी गईं, या फिर रीचेकिंग में। इससे स्टूडेंट्स के समय अाैर धन दोनों की बर्बादी होती है। गलत काॅपी जांचें जाने के पीछे कई कारण सामने अाए हैं। इनमें से प्रमुख कारण हिंदी मीडियम के शिक्षकों से इंग्लिश मीडियम की कॉपी चेक कराना और एक-एक जांचकर्ता को 600-600 कॉपियां की जिम्मेदारी देना भी है। बता दें कि सुविवि में 339 शिक्षक गेस्ट फैकल्टी के तहत लगे हैं। इनमें 50 से ज्यादा न नेट हैं, न पीएचडी, फिर भी इनसे भी कॉपियां चेक करवाई जाती है। इसका पारिश्रमिक भी इन्हें दिया जाता है। बता दें कि सुविवि में 8 प्रोफेसर, 22 एसोसिएट प्रोफेसर और 167 असिस्टेंट प्रोफेसर सहित कुल 197 स्थायी शिक्षक हैं। दोहरे से नुकसान से छात्रों में आक्रोश है।
ये समाधान : केंद्रीकृत व्यवस्था हाे ताकि विवि में ही शिक्षक कॉपी चेक कर सकें
सुविवि के कुलपति प्रो. एनएस राठौड़ और पूर्व कुलपति प्रो. आईवी त्रिवेदी बताते हैं कि सुविवि के संबद्ध कॉलेजेज के 1.90 लाख परीक्षार्थी परीक्षा देते हैं। इसके अलावा अजमेर, जोधपुर, जयपुर, बीकानेर आदि विश्वविद्यालयों के छात्रों की कॉपी चैक कराने के लिए उदयपुर भिजवाई जाती हैं। सुविवि के करीब पांच सौ शिक्षक हर साल तीन लाख से ज्यादा कॉपी जांचते हैं। इनमें 80 फीसदी शिक्षक हिंदी मीडियम के होते हैं, जो इंग्लिश मीडियम की भी कॉपी चैक करते हैं। वहीं कई गेस्ट फैकल्टी भी कॉपी जांचने के योग्य नहीं होती है, लेकिन समय पर रिजल्ट घोषित कराने के लिए कॉपी चैक करा दी जाती हैं। प्रति शिक्षक 300 कॉपी जांचने का फॉर्मूला भी न्यायसंगत नहीं है। काॅपी जांचने के लिए केंद्रीयकृत व्यवस्था लागू करनी चाहिए ताकि विवि में ही शिक्षक निर्धारित कॉपी चैक कर सके। क्योंकि कुछ शिक्षक तो परीक्षार्थियों की कॉपी तो दूर थीसिस तक चेक करने से मना कर देते हैं।
आरयू : ऐसी गलतियों पर हाल ही 120 शिक्षकों की डीबार लिस्ट निकाली है
राजस्थान यूनिवर्सिटी जयपुर के इस सत्र के परिणाम आने के बाद 1,60,500 विद्यार्थियों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था। इनकी जांच जब विशेषज्ञों से कराई गई तो पता चला कि कई कॉपियों में नंबर देकर ठीक से जोड़े नहीं गए। कई उत्तरों को बिना जांचे छोड़े दिया गया। परीक्षा विभाग ने नंबर बढ़ाते हुए फिर रिजल्ट जारी किया था। इसमें 130 शिक्षकों की लापरवाही सामने आई थी, जिनमें से 3 दिन पहले यूनिवर्सिटी ने 120 शिक्षकों को बहिष्कृत करने की लिस्ट निकाली थी।
खामी सिस्टम की और छात्रों से हर साल वसूल रहे एक करोड़ बीस लाख फीस
आरटीआई एक्टिविस्ट और अधिवक्ता सुधीर जारोली ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2015, 16,17 में पुनर्मूल्यांकन से संबंधित जानकारी सुविवि से मांगी थी। इसमें सामने आया कि सुविवि के सिस्टम की खामी की कीमत भी बेरोजगार युवा अदा करते आ रहे हैं। परीक्षार्थियों से उन तीन वर्षों में 3.62 करोड़ रुपए बतौर पुनर्मूल्यांकन फीस वसूले गए। हर साल एक करोड़ से ज्यादा की वसूली करते आ रहे हैं।
सुविवि की इन 5 बड़ी गलतियों के कारण परेशान हो रहे परीक्षार्थी
1. अंग्रेजी भाषा की जानकारी के अभाव में इंग्लिश मीडियम परीक्षार्थियों की कॉपी को तुक्के के साथ जांचना।
हर पेपर की फीस 400 रुपए, 75 % विषयों में रीवेल का प्रावधान ही नहीं
विवि यूजी-पीजी में पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रति विषय 350 रुपए फीस और 50 रुपए ऑनलाइन शुल्क ले रहा है। परीक्षार्थी 25 प्रतिशत विषयों में ही पुनर्मूल्यांकन करा सकता है। शेष 75 प्रतिशत विषयों में तो पुनर्मूल्यांकन का विकल्प तक नहीं है।
आर्ट्स के छात्र मुकुल शर्मा और आजाद सिंह भी पुनर्मूल्यांकन में पास हो सके
वर्ष 2019 में मुकुल शर्मा बीए सैकंड ईयर में दो विषयों में फेल थे। पुनर्मूल्यांकन में एक विषय में पास होने की वजह से प्रमोट हो गए। वहीं 2018 में आजाद सिंह को दो सब्जेक्ट्स में फेल कर दिया गया। पुनर्मूल्यांकन में एक विषय में पास हो गए।
लॉ कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष गौरव और तनवी तीन-तीन विषयों में हुए प्रमोट
गौरव जैन बताते हैं कि उन्हें 2014 में एलएलबी फ़र्स्ट ईयर की मुख्य परीक्षा में चार विषयों में फेल कर दिए था। जब पुनर्मूल्यांकन कराया ताे तीन विषयों में प्रमोट हो गए। इससे एक साल बच गई। तनवी जैन 2018 में भी एलएलबी सैकंड ईयर की मुख्य परीक्षा में चार विषयों में फेल कर दी गई थीं। पुनर्मूल्यांकन में तीन विषयों में पास हो गईं।
कुलपति अाैर परीक्षा नियंत्रक ने भी स्वीकार की खामियां
सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. एनएस राठौड़ ने भी इस गलती को स्वीकार किया। उन्हाेंने इस मामले में सुधार कराने की बात कही। परीक्षा नियंत्रक आरसी कुमावत ने भी माना कि विवि ने अभी तक ऐसा सिस्टम विकसित नहीं किया है कि इंग्लिश मीडियम के शिक्षक ही इंग्लिश मीडियम परीक्षार्थियों की कॉपी चैक कर सकें।
हर साल 13 से 17 हजार परीक्षार्थी करवाते हैं पुनर्मूल्यांकन, 10 से 13 हजार के बदल जाते हैं मार्क्स, 1.20 कराेड़ रुपए फीस
4. कॉपी चैक करने के बाद नंबर्स के टोटल में भी कर देते हैं गड़बड़ी, विवि जवाब देता है कि मानवीय भूल है, हो गई होगी।
2. विवि के नियमानुसार एक शिक्षक 300 कॉपी ही जांच सकता है।
5. कई बार प्रश्न चैक करने से ही छूट जाते हैं।
3. गेस्ट फैकल्टी के 50 से ज्यादा शिक्षक न नेट हैं, न पीएचडी, लेकिन कॉपी चैक करते हैं।
ये पहले फेल करार दिए गए थे, पुनर्मूल्यांकन करवाया ताे 3-3 विषयाें में हाे गए पास
सुविवि में पिछले 10 साल में पुनर्मूल्यांकन के लिए 1.5 लाख ने किया अावेदन
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(नोट : आंकड़े सुविवि प्रशासन से प्राप्त)
वर्ष आवेदक परीक्षार्थी नंबर बदले
2018-19 14497 11774
2017-18 16061 13349
2016-17 17696 13370
2015-16 15451 11838
2014-15 14509 11203
2013-14 15221 11432
2012-13 14732 10542
2011-12 13954 11241
2010-11 15114 11471
2009-10 14452 10843
कुल 151688 117063
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