हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण हाई बीपी है, हर 6 माह में बीपी की जांच कराएं : डाॅ. कलमठ

Udaipur News - अन्य बीमारियाें में लक्षण का पता लग जाता है मगर हाई ब्लड प्रेशर एकमात्र एेसी बीमारी है जिसमें बिना लक्षण पता चले...

Nov 18, 2019, 11:40 AM IST
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अन्य बीमारियाें में लक्षण का पता लग जाता है मगर हाई ब्लड प्रेशर एकमात्र एेसी बीमारी है जिसमें बिना लक्षण पता चले ही व्यक्ति की माैत तक हाे जाती है। भारत में 100 में से केवल 15 से 20 लाेगाें का ब्लड प्रेशर सामान्य है। आश्चर्यजनक बात ये है कि सामान्य दवाई से ठीक हाेने वाला हाई ब्लड प्रेशर सबसे अधिक हार्ट अटैक का कारण है। लाेगाें केे लिए जरूरी है कि वाे हर 6 महीने में ब्लड प्रेशर की जांच कराए। ये जानकारी रविवार काे बॉम्बे हॉस्पिटल के कार्डियोलाजिस्ट डाॅ.बी.सी. कलमठ ने हार्ट एंड रिद्म सोसायटी अाैर एपीआई चैप्टर के साझे में रमाडा होटल में हुई दो दिन की द्वितीय कॉर्डियक समिट कॉन्फ्रेंस मे दी। मेदांता हॉस्पिटल नई दिल्ली के कार्डियोलाजिस्ट डाॅ. अार.अार. कासलीवाल ने कहा कि बचपन से सही जीवनशैली, नियमित याेग किया जाए ताे हार्ट अटैक सहित ह्रदय से जुड़ी कोई बीमारी नहीं हाेगी। एंजियोप्लास्टी अाैर बाईपास सर्जरी बीमारी से बचने की पद्धति है। राेगी इसके बाद सामान्य नहीं बल्कि स्थिर हाेते हैं। हार्ट की बीमारी में बचाव ही उपचार है। शहर के ही वरिष्ठ इंटरवेशनल कार्डियोलॉजिस्ट अाैर हार्ट एंड रिद्म सोसायटी चेयरमैन डाॅ. अमित खंडेलवाल ने हार्ट फेलियर पर अपना व्याख्यान दिया। उन्हाेंने कहा कि ह्रदय पंप का सही तरीके से काम नहीं करने का मुख्य कारण हार्ट अटैक, विटामिन की कमी अाैर हार्ट इंफैक्शन है। इस दाैरान राेगी काे लिक्विड की मात्रा कम लेने की जरूरत है। अार्नी दवा, सीअारटी अाैर आईसीडी से इसकी जांच अाैर रोकथाम की जा सकती है।

आईवीयूएस से धमनी के अंदर ब्लॉकेज का पता लग सकता है

मुंबई के इंटरवेंशनल कॉर्डियोलॉजिस्ट डॉ. निमित शाह ने एंजियोप्लास्टी के बारे में बताया कि आईवीयूएस से हार्ट की धमनी के अंदर ब्लॉकेज, धमनी की मोटाई और ब्लॉकेज की स्थिति के साथ उसमें लगने वाले स्टंट-बैलून के आकार का पता बारीकी से लग पाता है। उन्हाेंने कहा रोटा एब्लेशन ब्लॉकेज में जमा कैल्शियम को तोड़ने का काम करती है। इससे धमनी में जमा कैल्शियम हटने से ब्लॉकेज छोटा रह जाता है। उसके बाद की गई एंजियोप्लास्टी से मरीज के हार्ट की नाड़ी के दूरगामी परिणाम बेहतर होते हैं।

खाने में 15 एमएल से ज्यादा तेल का उपयोग नहीं करें

मेदांता अस्पताल इंदौर के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत रावत ने कहा कि अाईएमए की 2009 के दिशा निर्देशानुसार डाॅक्टराें की उम्र सामान्य व्यक्ति की उम्र से 10 साल कम हाेती है। अाज के दाैर में डाॅक्टराें काे लाेगाें की सेहत के साथ खुद का ख्याल रखना जरूरी है। मेंटल रिलैक्सेशन, नियमित व्यायाम, खाने में केवल 15 एमएल तेल के उपयाेग से ह्रदय की बीमारियाें काे कम किया जा सकता है।

छाती, गर्दन, पेट में असामान्य दर्द हृदय बीमारियाें के लक्षण हैं

जयपुर के डाॅ. दीपेश अग्रवाल ने कहा 10-15 साल पहले तक ह्रदय की बीमारियां 60 से अधिक अायु वर्ग में देखी जाती थी। तनाव, प्रदूषित वातावरण, धूम्रपान अाैर अनुवांशिक कारणाें से अब 25 से 30 वर्ष केे लाेगाें की संख्या सामने अा रही है। छाती, गर्दन, पेट समेत कहीं भी असामान्य दर्द ह्रदय बीमारियाें के लक्षण हैं। कांफ्रेंस मे डाॅ. जे.सी. देवपुरा, डाॅ.बी.एस बाॅम्ब, डाॅ. एल. के. भटनागर, डाॅ. के.सी. जैन काे सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में डाॅ. नगेंद्र सिंह चाैहान, डाॅ. राेहित तिवारी, डाॅ. राेहित माथुर, डाॅ. सुरेंद्र देवड़ा, डाॅ. राहुल गुप्ता, डाॅ. नागेश सीएम, डाॅ. विजेश कुवंर, डाॅ. आनंद अग्रवाल, डाॅ. इदरीस खान आदि माैजूद थे।

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