पांच माह से चल रही सुविवि कुलपति की खोज, दो माह और लग सकते हैं!

Udaipur News - प्रदेश सरकार के नुमाइंदों और राज्यपाल कलराज मिश्र के बीच चल रही खींचतान के चलते मेवाड़ में उच्च शिक्षा के...

Feb 15, 2020, 11:51 AM IST

प्रदेश सरकार के नुमाइंदों और राज्यपाल कलराज मिश्र के बीच चल रही खींचतान के चलते मेवाड़ में उच्च शिक्षा के सर्वोच्च केंद्र मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में करीब ढ़ाई महीने से कुलपति की नियुक्ति नहीं हाे पाई है। जबकि सुविवि में कई प्रायोगिक परीक्षाएं चल रही हैं। स्नातक-स्नातकोत्तर स्तर की विभिन्न वार्षिक परीक्षाएं शनिवार से शुरू होंगी। शेष परीक्षाओं का टाइम टेबल जारी किया जाएगा। इसके लिए एक्जामिनर एप्वाइंट करने हैं। अगले सत्र के बारे में नीति निर्धारण करना है। फाइनेंस से संबंधित महत्वपूर्ण प्रस्ताव यूजीसी को भेजने हैं। सुविवि और उसके संबद्ध कॉलेजेज में लगभग 1.82 लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जिनका समय पर कोर्स पूरा कराने, परीक्षाएं कराने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय कुलपति पर ही निर्भर करते हैं। गत 5 दिसंबर को प्रो. जेपी शर्मा 2018 भर्ती विवादों के बाद कार्यकाल पूरा कर विदा हो गए थे। गत 11 सितंबर को कुलपति की नियुक्ति के लिए आरपीएससी के पूर्व चेयरमैन प्रो. बीएम शर्मा की अगुवाई वाली सर्च कमेटी को राज्यपाल कलराज मिश्र ने गत 22 दिसंबर को भंग कर दिया था। तब से 27वें कुलपति की खोज के लिए सिर्फ कागज ही इधर-उधर दौड़ रहे हैं। राजभवन के आदेश के लंबे समय बाद अब बॉम बैठक शनिवार दोपहर 3 बजे गुपचुप एक होटल में होगी। बैठक में सिर्फ विवि और सरकार के नॉमिनी तय किए जाएंगे। वर्षों बाद ऐसा होगा कि बॉम बैठक एक एजेंडे पर होगी। कुलपति चयन में अभी-भी दो माह का समय लग सकता है, क्योंकि फिर नए सिरे से आवेदन लेने की बात चल रही है। राज्यपाल एवं कुलाधिपति कलराज मिश्र का कहना है कि कुलपति यूजीसी-प्रदेश सरकार के नियमानुसार ही नियुक्त किया जाएगा।

अब तक ये हुआ : इन शिक्षाविदों के नाम सुझाए थे, ये पैनल में थे

राज्यपाल कलराज मिश्र ने गत 22 दिसंबर को कुलपति चयन के लिए गठित सर्च कमेटी को भंग करने के आदेश जारी किए। कमेटी की गत 15 दिसंबर को जयपुर में हुई आखिरी बैठक में कुलपति के लिए 267 में से 5 शिक्षाविदों के नाम राजभवन भेजे थे। दैनिक भास्कर ने पहले ही ब्रेक कर दिया था कि सर्च कमेटी ने कुलपति के लिए प्रो. संजय लोढ़ा, प्रो. दरियावसिंह चूंडावत, प्रो. नवीन माथुर, प्रो. विजयवीर सिंह के नाम तय किए हैं। प्रो. शर्मा कमेटी में यूजीसी नॉमिनी डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय सागर के कुलपति और यूजीसी सदस्य प्रो. आरपी तिवारी, सरकार के नॉमिनी प्रो. आदित्य नारायण मिश्रा और सुविवि के नॉमिनी राजस्थान विवि जयपुर के जूलॉजी के रिटायर्ड प्रो. डीपी जारौली शामिल थे। इन दोनों ही पेनल के किसी भी शिक्षाविद को फिर नए पेनल में शामिल किया जा सकता है।

वीसी तो दूर 2 माह में नीति निर्धारक बॉम के 4 सदस्य तक नहीं बना पाए हैं


सुविवि की नीति निर्धारक बॉम के चार सदस्य प्रो. आनंद पालीवाल, प्रो. संजय लोढ़ा, प्रो. प्रदीप त्रिखा और डॉ. राकेश्वर पुरोहित का कार्यकाल 13 दिसंबर को पूरा हो चुका है, लेकिन स्थायी कुलपति के अभाव में न इन बॉम मेंबर्स का कार्यकाल बढ़ाया जा सका। इससे एकेडमिक काउंसिल के लिए निर्णयों की पुष्टि करना, चयन समिति की सिफारिशों को मंजूरी देना, फीस, पाठ्यक्रम निर्धारण की पुष्टि करना जैसे कई काम अटके हुए हैं।

सुविवि सबसे संवेदनशील समय से गुजर रहा, राज्यपाल ही तय करेंगे कि आवेदन नए सिरे से लेंगे या नहीं : मंत्री भाटी



कुलपति के इतने अहम दायित्व हैं, फिर भी लंबे समय से पद रिक्त


{नेक, स्वच्छता रैंकिंग प्रबंधन।

{ तय समय पर परीक्षाएं, रिजल्ट घोषित कराना, मॉनिटरिंग करना।

{ उच्च संस्थानों अाैर मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ शोधपरक अनुबंध करना।

{ शैक्षणिक सत्र समयबद्ध चलाना, तय समय पर पाठ्यक्रम पूरा कराना।

{निर्विवादित भर्ती कराना, संबद्ध संस्थानों में यूजीसी के नियमों की पालना कराना।

ऑफ रिकॉर्ड : क्षेत्रीय व अन्य राजनेताओं की पर्दे के पीछे की भूमिका

सूत्र बताते हैं कि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी समर्थक गुट पूर्व कुलपति प्रो. जेपी शर्मा, प्रो. पीआर व्यास के साथ ताे सीएम अशोक गहलोत समर्थक गुट प्रो. संजय लोढ़ा, प्रो. दरियाव सिंह चूंडावत, प्रो. व्यास के साथ दिख रहा है। डिप्टी सीएम सचिन पायलट समर्थक गुट, पूर्व सांसद रघुवीर मीणा और पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. गिरिजा व्यास समर्थक गुट पर्दे के पीछे से कई शिक्षाविदों को कुलपति बनाने का ढांढ़स बंधा रहे हैं। राजस्थान यूनिवर्सिटी की एक लॉबी कुलपति बनने की दौड़ में सीएमओ-राजभवन की दौड़ लगा रही है।

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