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जीने की राह...मुसीबतों के समय में जिंदगी को नई उम्मीदें देने वाली ऐतिहासिक रचनाएं पढ़ और गढ़ रहे हैं झीलों की नगरी के साहित्यकार

Udaipur News - कोरोना का कहर और अपने-अपने एकांत में सच से रूबरू रचनाकार सहेली मार्ग। सहेलियों की बाड़ी के द्वार खुले हैं। इस...

Apr 08, 2020, 10:25 AM IST
कोरोना का कहर और अपने-अपने एकांत में सच से रूबरू रचनाकार

सहेली मार्ग। सहेलियों की बाड़ी के द्वार खुले हैं। इस गर्वीली ऐतिहासिक धरोहर के पास आप तिल नहीं धर सकते थे, लेकिन कोरोना शटडाउन में पूरा मौसम सन्नाटे गूंथ रहा है। लगता है, अभी कोई दरीचा खुलेगा और सुबह के भूले की तरह पहले जैसा ही वातावरण लौट आएगा। झीलों की नगरी दो हफ्ते से जिंदगी का स्वागत करने की उम्मीद में किवाड़ों के पास खड़ी है।

मोबाइल बजता है : नवलकिशोर बोल रहा हूं। बुलावे का गहरा आग्रह है। प्रो. नवलकिशोर देश के जानेमाने समालोचक हैं। अस्सी पार हैं। वे प|ी मगन के निधन से हुए खालीपन को भर नहीं पा रहे। मैं हिरणमगरी उनसे मिलने िनकलता हूं। सन्नाटा चबाती सड़कें हैं। कहीं कोई ठेले पर सब्जियां पहले जैसे उतावले गाहकों की प्रतीक्षा में हैं। कुछ जगहों पर पुलिस के लोग बैरिकेट्स लगाए बैठे हैं। कहते हैं, आउटसाइड से निकलिये। इधर बंद है।

हिरणमगरी उदयवाटिका। सड़कों पर पत्ते ही पत्ते। मानो उदासियों का ओवरकोट पहने शहर के पेड़ आपस में पत्ते फेंक रहे हैं। कन्नड़ लेखक भैरप्पा की आत्मकथा पढ़ रहे नवलकिशोर कहते हैं, भैरप्पा दक्षिणपंथी है, लेकिन उसके जीवन अनुभव कितने सघन, संघर्षमय और साहसिक हैं।

धर्मयुग से जुड़े रहे पत्रकार अनुराग चतुर्वेदी इन दिनों अपने पिता नंद चतुर्वेदी के समग्र साहित्य पर काम कर रहे हैं। वे अमरीकी विचारक प्रो वेंडी डोनिगर की चर्चित पुस्तक दॅ हिन्दूज : ऐन आल्टर्नेटिव हिस्ट्री भी पढ़ रहे हैं। शिमला में भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में पद्मिनी विषयक शोध में जुटे हैं। उन्हें यह एकांत बहुत उदास करने वाला लग रहा है।आलोचक शिक्षक पल्लव दिल्ली में इन दिनों साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी के लेखन पर पढ़ रहे हैं और इन पर एक लेख की तैयारी कर रहे हैं। वे कहते हैं, विद्यार्थी ने पूरे देश के ही नहीं, मेवाड़ के कपासन और वहां के एक गांव घोसुंडा के क्रांतिकारियों पर भी दस्तावेज जुटा रखे हैं।

सदाशिव श्रोत्रिय मुक्तिबाेध की कविता ब्रह्मराक्षस पर लिख रहे हैं। अध्ययन के लिए चर्चित लक्ष्मण व्यास अज्ञेय की अरे यायावर रहेगा याद पढ़ रहे हैं। समय की निष्ठुरता को परे रखकर काम कर रहे हैं राजेश यादव। यादव इन दिनों अपनी एक नई कृति पर काम कर रहे हैं। उन्हें समय की ध्वनियां अभी अस्पष्ट भले लगें, लेकिन धुंधली नहीं हैं।

प्रसिद्ध नाटककार भानु भारती कहते हैं, मैं मुसीबत में जीने की इच्छा का साहित्य पढ़ रहा हूं। आयरिश नाटककार जेएम संेंज का मछुआरों की जिंदगी पर लिखा नाटक अभी खत्म किया है। अर्नेस्ट हैमिंंग्वे की ओल्ड मैन एंड सी पढ़ी है तो मेरे अध्यापक रहे प्रो सतीशचंद्रा की लिखी मध्यकालीन इतिहास पुस्तकें भी पढ़ रहा हूं। वेददान सुधीर बाबरनामा खत्म करके हटे हैं और फणीश्वरनाथ रेणु का मैला आंचल फिर पढ़ रहे हैं। कमर मेवाड़ी पंकज सुबीर का उपन्यास जिन्हें जर्मे इश्क पर नाज था पढ़ रहे हैं।

सन्नाटे में याद आए रुडयार्ड किपलिंग : प्रसिद्ध साहित्यकार रुडयार्ड किपलिंग उदयपुर आए तो उनके मन में जंगल बुक का खयाल आया। उन्होंने इसीलिए जंगल बुक के मुख्यपात्र बघीरा का जन्मस्थान उदयपुर के राजा का अभयारण्य ही बताया। उदयपुर में जन्मे बघीरा और जंगल बुक का दुनिया के इतिहास में वही स्थान है, जो किसी जानीमानी शख्सियत का हुआ करता है। कहते हैं कि किपलिंग ने यहीं 1894-95 में आज के बारे में लिख दिया था, हम सब एक दूसरे से कटे प्रायद्वीप हैं। चिल्ला-चिल्लाकर झूठ बोलना हमारी आदत में शुमार हो गया है और हम सब एक दूसरे को पूरी ताकत से भ्रमित करने में जुट गए हैं। आज के समय का यह सच हम सबका सच है। पोस्ट ट्रुथ एरा के बाद अब काेराेना काल में भी हमारा सामना इसी सच से हो रहा है।

अनुराग चतुर्वेदी, भानु भारती, राजेश यादव... लॉकडाउन के दिन।

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