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महिला दिवस एक दिन का समारोह नहीं, महिलाओं के संघर्ष का दिन

एक वर्ष पहले
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हम किसी भी बहाने से अत्याचार-हिंसा नहीं सहेंगे...मानव श्रंखला में महिलाओं ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर महिला अधिकार-मुद्दे पर आवाज बुलंद की। रविवार को ऐपवा के कार्यक्रम में महिला अधिकार और मुद्दे को लेकर महिलाओं ने देहली गेट पर मानव श्रंखला बना संदेश िदया। श्रंखला में सीएए एनसीआर के खिलाफ भी विरोध दर्ज कराया गया। बोहरवाड़ी में दोपहर में हुई संगोष्ठी में ऐपवा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रो. सुधा चौधरी ने कहा कि महिला िदवस महज एक समारोह नहीं है, यह दिन हज़ारों कामगार महिलाओं के संघर्ष को याद करने का दिन है। 1857 में अमेरिका के न्यूयार्क शहर में महिला मजदूरों ने वेतन बढ़ाने, काम के घंटे कम करने, महिलाओं को मताधिकार देने आदि मांगों को लेकर शुरु हुई लड़ाई आज विश्वभर में महिलाओं की आवाज बन चुकी है। प्रो. सरवत खान ने सीएए एनसीआर को भेदभावपूर्ण बताया। उन्होेंने कहा कि इन नीतियों के खिलाफ आज देश भर में महिलाएं पहली पंक्ति में खड़े होकर प्रतिरोध दर्ज करा रही है। प्रो. जैनब बानू ने कहा कि केंद्र सरकार आर्थिक नीतियों पर नाकाम साबित हुई है। जिससे ध्यान भटकाने के लिए सरकार ने सीएए एनसीआर कानून लेकर आई है। यह एक ऐसा दौर है जब महिलाओं के लिए रोजीरोटी, सम्मान, बराबरी और राजनैतिक सत्ता में हिस्सेदारी-भागीदारी के साथ पूंजीवांद, धर्मांधता और सामन्ती तत्वों की ओर से शोषण आदि भी महत्वपूर्ण मुद्दे है।

मानव शृंखला बनाकर नारे लगाती महिला संगठनों की पदाधिकारी और कार्यकर्ता।
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