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एनकाउंटर सीन री-क्रिएट करने वाले साइंटिस्ट बोले- ऐसे हालात में ट्रेन से भागना संभव

सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में शुक्रवार को मुंबई सीबीआई स्पेशल कोर्ट में सीएफएसएल, दिल्ली के सेवानिवृत्त...

Danik Bhaskar | Sep 08, 2018, 07:32 AM IST
सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में शुक्रवार को मुंबई सीबीआई स्पेशल कोर्ट में सीएफएसएल, दिल्ली के सेवानिवृत्त निदेशक और वैज्ञानिक राजेन्द्र सिंह के बयान हुए। तुलसी एनकाउंटर के रीक्रिएशन के दौरान साइंटिस्ट राजेन्द्र सिंह ने एफएसएल जांच की थी। उन्होंने बताया कि बताई गई जिन परिस्थितियों में तुलसी ट्रेन से भागा था, वह संभव है। सिंह ने कोर्ट को बताया कि 9 जुलाई 2011 सुबह साढ़े छह बजे विशेषज्ञों की टीम मुख्य अनुसंधान अधिकारी राजू के बताए अनुसार उस स्थान पर पहुंची थी, जहां तुलसी एनकाउंटर सीन का रीक्रिएशन किया जा रहा था। मुख्य अनुसंधान अधिकारी के बताए अनुसार ही वाहनों को खड़ा किया गया और मौके की फोटो के अनुसार पुलिस, आरोपी सहित अन्य चीजों के बीच दूरी रखी गई थी। तुलसी के साथियों की मदद से ट्रेन से भागने की जो परिस्थितियां बताई गईं, वे संभव हैं। यह भी संभव है कि देसी पिस्टल से किए फायर से ट्रेन की छत में छेद हुआ है। जिस तरह से मिर्च पाउडर तुलसी के साथियों ने उड़ाया था, वह भी संभव है। सीएफएसएल रिपोर्ट में साइंटिस्ट ने एनकाउंटर के रीक्रिएशन के हर तकनीकी पहलू पर वैज्ञानिक राय दी है। बचाव पक्ष के वकील के पूछने पर साइंटिस्ट ने स्पष्ट किया कि एफआईआर में बताए समय, स्थान, वाहनों और लोगों के खड़े होने की लोकेशन और मौके की फोटोे से रीक्रिएशन के दौरान मामूली अंतर भी रह जाता है तो एफएसएल रिपोर्ट के परिणामों में बदलाव आ सकता है। गौरतलब है कि सीबीआई चार्जशीट में शामिल तुलसी एनकाउंटर की एफआईआर और रीक्रिएशन के समय में करीब एक घंटे का अंतर था।

पांडियन के गनमैन, रीडर ने हाईकोर्ट से वापस ली डिस्चार्ज एप्लीकेशन

केस में बरी हो चुके आईपीएस राजकुमार पांडियन के गनमैन संतराम और रीडर अजय परमार की डिस्चार्ज एप्लीकेशन पर मुंबई हाईकोर्ट में सुनवाई थी। इससे पहले कि अदालत कोई फैसला देती, इनके वकीलों ने एप्लीकेशन वापस ले ली। गुजरात के कांस्टेबल अजय और संतराम ने मामले से बरी कर देने की याचिका हाईकोर्ट में लगाई थी। सीबीआई के पीपी ने तर्क रखा कि अजय और संतराम सेशन कोर्ट में इन दोनों एनकाउंटर की ट्रायल भुगत रहे हैं। ट्रायल में लगभग सभी गवाह हो चुके हैं और अनुसंधान अधिकारियों के बयान भी शुरू हो गए हैं। गौरतलब है कि 4 जुुलाई को हाईकोर्ट ने आरोपी पक्ष के एसआई हिमांशु सिंह और श्याम सिंह की बरी कर देने की याचिका को सीबीआई पीपी के इसी तर्क के आधार पर खारिज किया था कि मामले में आधे से ज्यादा गवाह हो चुके हैं और दोनों ट्रायल भुगत रहे हैं। शुक्रवार को हाईकोर्ट में अजय और संतराम की याचिका के भी खारिज होने की संभावना थी। याचिका खारिज होने के डर से इन दोनों के वकीलों ने याचिका वापस ले ली। बता दें कि अजय और संतराम के अधिकारी पांडियन सेशन कोर्ट से बरी हो चुके हैं। पांडियन सहित आईपीएस दिनेश एमएन और डीजी बंजारा के बरी होने के आदेश के खिलाफ सोहराबुद्दीन के भाई रुबाबुद्दीन ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। गत महीने इस पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है।