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सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस: डीएसपी हिम्मत सिंह ने कहा- सीबीआई ने धमकाकर दिलाए गलत बयान

मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में तत्कालीन सूरजपोल एसएचओ व डीएसपी (कपासन) हिम्मत सिंह के बयान हुए।

Bhaskar News| Last Modified - May 12, 2018, 06:21 AM IST

Sohrabuddin encounter case DSP Himmat Singh statement
सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस: डीएसपी हिम्मत सिंह ने कहा- सीबीआई ने धमकाकर दिलाए गलत बयान

उदयपुर/मुंबई.  सोहराबुद्दीन-तुलसी एनकाउंटर केस में शुक्रवार को मुंबई की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में सूरजपोल थाने के तत्कालीन एसएचओ व कपासन के मौजूदा डीएसपी हिम्मत सिंह के बयान हुए। सिंह ने कोर्ट को बताया कि सीबीआई के तत्कालीन डीआईजी कंडा स्वामी ने गिरफ्तारी की धमकी देकर कोर्ट में गलत बयान दिलवाए थे।

 

कोर्ट में भी जब बयान देने गया तो पर्दे के पीछे सीबीआई ऑफिसर खड़ा था

डीएसपी हिम्मत सिंह ने कोर्ट को बताया कि सीबीआई ने तीन-चार बार पूछताछ के लिए मुंबई बुलाया, लेकिन बयान नहीं लिए। सीबीआई के तत्कालीन डीआईजी कंडा स्वामी और अन्य अधिकारियों ने मुझे एक दिन डिटेन कर गिरफ्तार करने की धमकी दी थी और कहा था कि गिरफ्तारी से बचना है तो उनके बताए मुताबिक बयान कोर्ट में दे देना। 25 अगस्त 2011 को कोर्ट में बयान हुए थे। कोर्ट में भी जब बयान देने गया तो पर्दे के पीछे सीबीआई ऑफिसर खड़ा था जो बयान में कही गई सभी बातें सुन रहा था। सीबीआई ने हिम्मत सिंह को होस्टाइल घोषित कर दिया।

 

जेल में किसी भी कैदी से मिलवाने नहीं गए

हिम्मत सिंह ने बताया कि वह जुलाई 2006 से सूरजपोल थानाधिकारी थे। उनके थाना क्षेत्र में सेंट्रल जेल आती थी। थाने में आने के बाद सिर्फ एक बार जेल के अधिकारियों से औपचारिक मुलाकात के लिए गए थे, फिर कभी सेंट्रल जेल नहीं गए। सीबीआई के सरकारी वकील बीपी राजू के पूछने पर सिंह ने कोर्ट को बताया कि वह कभी भी निरीक्षक अब्दुल रहमान या किसी भी अन्य पुलिस अधिकारी और कर्मचारी को जेल में किसी भी कैदी से मिलवाने नहीं गए थे। 

 

2006 में जवानों की सुरक्षा में पेशी पर लेकर गए थे अहमदाबाद: काॅन्स्टेबल 

पुलिस लाइन के कॉन्स्टेबल कांतिलाल के भी बयान हुए। कांतिलाल ने कोर्ट को बताया कि वह, अधिकारी और 15-20 जवान 27 नवंबर 2006 को तुलसी को अहमदाबाद पेशी पर लेकर गए थे। सभी रेलवे वारंट से गए थे। वह आपराधिक प्रवृति का था। उससे तुलसी के व्यवहार के बारे में पूछा गया तो कांतिलाल ने बताया कि हथकड़ी में कड़े जाब्ते के बीच खतरनाक अपराधी का व्यवहार भी नॉर्मल रहता है। उसके परिजन आए थे, लेकिन हमने उसे किसी से मिलने नहीं दिया था। इस पर सीबीआई ने कांतिलाल को भी होस्टाइल घोषित किया। 

 

पता नहीं वह मोबाइल किसका था 

- मोबाइल इंटरसेप्शन पर हिम्मत सिंह ने कहा कि गोपनीय शाखा ने एक मोबाइल नंबर इंटरसेप्शन पर डालने और मेरे मोबाइल नंबर पर ट्रांसफर की जानकारी दी थी। मोबाइल किसका था और कहां से ऑपरेट हो रहा था, यह जानकारी नहीं थी। मोबाइल पर आए कॉल में सट्टे की बातें हुई थी। खास सूचना नहीं होने से दो-तीन दिन बाद इंटरसेप्शन बंद हो गया।

- तुलसी को जानने के प्रश्न पर सिंह ने कहा उसे और आजम को 2006 में दो बार पेशी पर अहमदाबाद ले गया था। सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर को एक साल होने वाला था, तो किसी हमले के डर से मेरे साथ निरीक्षक अब्दुल रहमान और 15-20 जवान रेलवे वारंट लेकर गए थे। पेशी में दोनों के परिजन आए थे, लेकिन सुरक्षा के चलते किसी से मिलने नहीं दिया गया था। पेशी कराने के बाद सकुशल वापस उदयपुर लौटे और जेल में दोनों को जमा करा दिया था। 

 

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