उदयपुर

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दाती के आश्रम की बच्चियों को रखने का शक, होटल से 67 बच्चियां मुक्त

होटल राजमहल में संचालित आश्रम से बुधवार दोपहर 67 किशोरियों को मुक्त करवाकर बालिका गृह में भेजा गया।

Danik Bhaskar

Jul 05, 2018, 04:14 PM IST

राजसमंद. शहर के सुभाषनगर पीर बावजी स्थानक के सामने होटल राजमहल में संचालित आश्रम से बुधवार दोपहर 67 किशोरियों को मुक्त करवाकर बालिका गृह में भेजा गया। यह कार्रवाई बाल कल्याण समिति की ओर से की गई। समिति को सूचना मिली थी कि शिष्या से दुष्कर्म मामले में घिरे दाती मदन के आश्रम से रातोंरात गायब हुई बच्चियों को यहां लाया गया है। हालांकि, बताया जा रहा है कि ये बालिकाएं कांकरोली के आध्यात्मिक गुरुमुख स्कूल की हैं और यहां आध्यात्मिक पढ़ाई कर रही थीं।

- रजिस्ट्रेशन सहित अन्य दस्तावेज नहीं होने से संचालक संदेह के घेरे में है। होटल संचालक की भूमिका भी शक के नजरिए से देखी जा रही है। बालिकाएं झारखंड, असम, मप्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, दिल्ली के अलावा नेपाल की हैं। इन सभी ने अब तक यही बताया है कि वे माता-पिता की स्वीकृति से पढ़ाई के लिए आई हैं।

संचालक के पास नहीं मिली आध्यात्मिक गुरुमुख स्कूल चलाने की इजाजत, होटल प्रबंधन ने भी नहीं की थी किशोरियों की एंट्री

- बाल कल्याण समिति की मौजूदगी में हुई कार्रवाई में यहां से 67 किशोरियों को छुड़ाकर बालिका गृह में भेजा गया। ये सभी आध्यात्मिक गुरुमुख स्कूल, कांकरोली की बताई गई हैं, जो आध्यात्मिक पढ़ाई कर थीं। बाल कल्याण समिति को सूचना मिली थी कि दाती मदन महाराज के आश्रम से रातोंरात गायब बच्चियों को यहां लाया गया है। इस पर के निर्देश पर यहां पुलिस ने दबिश दी थी। समिति अध्यक्ष भावना पालीवाल ने बताया कि होटल राजमहल में बने आश्रम पहुंचने पर टीम को बताया गया कि बच्चियों को आध्यात्मिक शिक्षा दी जा रही है। स्कूल के कोई दस्तावेज नहीं मिलने पर संदेह बढ़ा और पुलिस को सूचना दी।

- कथित आश्रम में बच्चियों के अलावा आध्यत्मिक शिक्षिकाएं भी थीं। सभी बालिकाओं को बस में बैठाकर हाउसिंग बोर्ड स्थित आसरा विकास संस्थान के पन्नाधाय बालिका गृह ले जाया गया, जहां इनसे पूछताछ और काउंसलिंग देर शाम तक चली। अब तक की पड़ताल में सभी बच्चियों के माता-पिता ने अपनी स्वीकृति होनी बताई है। इस दौरान एसडीएम राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल, तहसीलदार गजानंद जागिड़, डीएसपी राजेंद्रसिंह, राजनगर थानाधिकारी दिनेश सुखवाल, कांकरोली थानाधिकरी गोविंदसिंह, यातायात विभाग के रामविलास मीणा, बाल कल्याण समिति अध्यक्ष सहित सदस्य गजेंद्रसिंह आदि मौजूद थे। होटल के बाहर जुटी भीड़ और हालात काे देखते हुए एमबीसी सहित बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को भी तैनात किया गया था।

होटल के बाहर जमा हुई भीड़

- होटल के अंदर और बाहर पुलिस का भारी जाप्ता देख भीड़ एकत्रित हो गई। कई लोग मोबाइल से रिकॉर्डिंग करने लगा। रिकॉर्डिंग करने वालों को पुलिस ने दूर किया। पुलिस व बाल कल्याण समिति के सदस्यों सहित एनजीओ प्रतिनिधि साढ़े तीन बजे पहुंचे थे, जो अधिकारियों के साथ देर शाम तक वहीं डटे रहे। बताया गया कि बच्चियों की मेडिकल जांच, काउंसलिंग आदि के लिए कई विशेषज्ञों को भी बुलाया गया।

शिक्षिकाएं बोलीं-माउंट आबू आश्रम में पानी भरने से होटल स्थित आश्रम में अध्ययन करवा रहे हैं,

निर्धन तबके की हैं छात्राएं

आश्रम से रेस्क्यू की गई अधिकतर बच्चियां गरीब परिवार से है। कुछ के तो माता-पिता तक नहीं है। आश्रम में नागपुर, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों की 12 महिला शिक्षिकाएं है। इनसे जब पूछा गया कि आश्रम के संचालक कौन है तो इनका कहना था कि ये सभी संचालक है। जांच में सामने आया कि सिरोही जिले के माउंट आबू में आध्यात्मिक गोमुख समिति की ओर से यह आश्रम संचालित किया जा रहा था।

बताया गया कि होटल को आश्रम बनाने के लिए इसके कमरों के बाहर बनी बालकनियों को टिन शेड से कवर कर दिया गया था। होटल की छत से लेकर सभी बालकनियां पतरे लगाकर सील कर दी गई थीं, ताकि बाहर से कोई भी अंदर की गतिविधियां नहीं देख पाए। पुलिस-प्रशासन फिलहाल किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं, लेकिन होटल संचालक की भी भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। होटल में किशोरियों के होने को लेकर कोई एंट्री नहीं बताई गई। आश्रम से छुड़ाई गई बालिकाएं झारखंड, असम, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, दिल्ली के अलावा नेपाल की रहने वाली हैं। ये सभी बालिकाएं आध्यत्मिक शिक्षा सहित ध्यान योग, प्राणायाम और अंग्रेजी का अध्ययन करती हैं।

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