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कथकली में कही दु:शासन वध कथा, दिखा ओडिसी सौंदर्य

पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से शास्त्रीय संगीत और नृत्य समारोह ‘मल्हार’ की शुरुआत शनिवार शाम हुई।...

Danik Bhaskar | Sep 09, 2018, 07:15 AM IST
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र की ओर से शास्त्रीय संगीत और नृत्य समारोह ‘मल्हार’ की शुरुआत शनिवार शाम हुई। पहले दिन केरल के कलाकारों ने पी. अनिल कुमार के नेतृत्व में ‘कथकली’ में ‘दु:शासन वध’ प्रसंग को रोचक ढंग से अभिनीत किया। फिर में शगुन बूटानी और साथी कलाकारों ने ‘ओडिसी’ नृत्य शैली में मोहक अदाओं से दर्शकों को अभिभूत किया। शिल्पग्राम के दर्पण सभागार में दो दिवसीय समारोह की शुरुआत उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, पटियाला के निदेशक सौभाग्य वर्धन, उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र इलाहाबाद के निदेशक इंद्रजीत ग्रोवर और डाॅ. प्रेम भंडारी ने दीप जलाकर की। केन्द्र निदेशक फुरकान खान ने अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का आगाज केरल के पी. अनिल कुमार व उनके साथियों के कथकली से की। इस प्रस्तुति के लिए कलाकारों ने मेकअप और गेटअप के लिए चार घंटे से ज्यादा मेहनत कीथ थी। अनिल और उनके साथियों ने महाभारत के प्रसंग ‘दुशासन वध’ को स्टेज पर जीवंत किया। इसके तहत कौरव-पांडव युद्ध टालने के लिये श्रीकृष्ण से मध्य का मार्ग बताने का आग्रह करते हैं। फिर हस्तिनापुर जाकर कौरवों से समझौते की बात करने का निर्णय लेते हैं। उस समय पांचाली भगवान कृष्ण से दु:शासन और अन्य कौरवों द्वारा द्यूत क्रीड़ा के समय अमानवीय व्यवहार व कृत्य की बात कहती है। किंतु कृष्ण इसमें सफल होते हैं। प्रसंग क्रम में युद्ध के दौरान भीम दु:शासन का वध कर देता है और अपनी प्रतिज्ञा पूरी करके पांचाली को संतुष्ट करता है।

ओडिसी शैली के मूल तत्वों का दिखा प्रदर्शन

शगुन और उनकी सखियों ने ओडिसी नृत्य का प्रदर्शन किया। उन्होंने ओडिसी शैली के मूल तत्वों का प्रदर्शन मोहक अंदाज में किया। प्रस्तुति की शुरुआत मंगला चारण से हुई, जिसके बाद आरयी पल्लवी बट्टू नृत्य दर्शाया। इसके बाद उन्होंने गीत गोविंद से पद ‘धीरे धीरे यमुना तीरे...’ से माहौल को कृष्ण रंग दिया। आखिर में शगुन व उनकी सखियों ने विशेष प्रस्तुति मोक्ष से दर्शकों को सम्मोहित सा कर दिया।