• Home
  • Rajasthan
  • Udaipur
  • Udaipur - ये हैं मददगार... कोई स्कूल-कॉलेज में जरूरतमंद प्रतिभाशाली बच्चों की ताे कोई अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों की सेवा में हर वक्त रहते हैं तत्पर
--Advertisement--

ये हैं मददगार... कोई स्कूल-कॉलेज में जरूरतमंद प्रतिभाशाली बच्चों की ताे कोई अस्पताल में मरीजों और तीमारदारों की सेवा में हर वक्त रहते हैं तत्पर

सरकारी फतह सीसै स्कूल के लेक्चरर भगवतसिंह झाला अपने स्कूल के प्रतिभाशाली और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की हर...

Danik Bhaskar | Sep 10, 2018, 06:51 AM IST
सरकारी फतह सीसै स्कूल के लेक्चरर भगवतसिंह झाला अपने स्कूल के प्रतिभाशाली और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों की हर संभव मदद करते हैं। उन्हें रहने के लिए निशुल्क कमरे की व्यवस्था और किताबें उपलब्ध कराते हैं और निशुल्क कोचिंग भी कराते हैं। हाल ही 12वीं के छात्र लक्ष्यदीप सिंह को आईआईटी और रामलाल भोई को नीट परीक्षा की तैयारी के लिए निशुल्क कोचिंग शुरू कराई है। रामलाल के परिवार के पास किराए से कमरा दिलाकर पढ़ाने के पैसे नहीं थे, तो लेक्चरर झाला ने एक हॉस्टल में रामलाल के रहने व्यवस्था करा दी। एेसे छात्रों की कॅरियर काउंसलिंग भी करके मार्गदर्शन देते हैं। बीते साल झाला ने 12वीं के छात्र प्रीतम टेलर को खुद के घर में रहने के लिए निशुल्क कमरा दिया था। खाना भी खुद घर से देते। स्कूल भी खुद के वाहन से लाते-ले जाते थे। प्रीतम के पिता सिलाई का काम करते हैं। प्रीतम बीते साल 12वीं साइंस वर्ग की बोर्ड परीक्षा में 93.02% अंकों से स्कूल टॉपर रहा था।

भगवत सिंह झाला।

सरकारी स्कूल के शिक्षकों ने अपने जरूरतमंद होनहार छात्रों की मदद कर उन्हें बढ़ाया आगे

स्कूल की पहल से छात्र को कॉलेज में निशुल्क मिला दाखिला

राजकीय गुरुगोविंद स्कूल के छात्र अजय गौड़ को स्कूल की पहल के बाद टेक्नो इंडिया एनजेआर इंजीनियरिंग कॉलेज ने इसी सत्र अपने यहां निशुल्क प्रवेश दिया है। लेक्चरर बालगोपाल शर्मा ने बताया कि स्कूल की पहल के बाद इंजीनियरिंग कॉलेज ने बीते सत्र हमारे स्कूल टॉपर छात्र को निशुल्क प्रवेश देने की घोषणा की थी। छात्र अजय ने 82.60 अंकों से 12वीं पांस की और उसका सपना भी इंजीनियरिंग करना था। आर्थिक स्थिति कमजोर होने से वह कभी इंजीनियर नहीं बन पाता, लेकिन इंजीनियरिंग में उसे निशुल्क प्रवेश मिल गया है। इसके अलावा स्कूल में सभी शिक्षक अपने वेतन से पैसे एकत्रित कर 75 फीसदी से ज्यादा अंक प्राप्त छात्रों का सम्मान किया जाता है। पुरस्कार स्वरूप उन्हें नकद पुरस्कार, कपड़े, किताबें, स्टेशनरी देते हैं।

बालगोपाल शर्मा।

बुजुर्गों की टीम उठा रही है जिम्मा, एमबी और बड़ी अस्पताल में मरीजों के लिए भोजन और दवा की करते हैं निशुल्क व्यवस्था

हेल्थ रिपोर्टर | उदयपुर

77 वर्षीय अजीत बम्ब एमबी अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की सेवा में तत्पर मिलेंगे। वे और उनके साथियों की टीम जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों को निशुल्क भोजन कराने, दवा योजना में नहीं मिलने वाली दवाएं दिलाने, कपड़े, पर्ची काउंटर से लेकर डॉक्टरों तक की जानकारी देने सहित हर संभव मदद करते हैं। इतना ही नहीं लावारिश मरीजों की सेवा-सुश्रुषा के साथ ही अस्पताल में मौत होने पर उनके अंतिम संस्कार तक की व्यवस्था करते हैं। अजीत बम्ब बताते हैं कि सेवा का यह सिलसिया मानव सेवा समिति के माध्यम से उनके पिता गणेशलाल बम्ब और उनके साथियों ने शुरू किया था। इस टीम में 51 सेवाभावी सदस्य थे। बीपी जोशी इस समिति के पहले अध्यक्ष थे। बड़ी बात यह है कि इस समिति के ज्यादातर सदस्य 70 से अधिक आयु के बुजुर्ग हैं। समिति के संस्थापक सदस्य 93 वर्षीय सोहनलाल कोठारी, 90 वर्षीय अभय कुमार जैन, 90 वर्षीय दीवान सिंह बाफना, 88 वर्षीय प्रकाश बर्डिया, 73 वर्षीय नटवरलाल शर्मा, 72 वर्षीय कमरुद्दीन सादड़ीवाला आदि कहते हैं कि वैसे कहावत है- बुढ़ापे के लिए सहारे की जरूरी होती है, लेकिन हम कहते हैं- इस बुढ़ापे की बुनियाद इतनी फौलादी होती है, जो समाज को सहारा दे सकती है।

उदयपुर. एमबी की इमरजेंसी में भोजन की निशुल्क पर्ची देते समिति सदस्य।

हेल्थ रिपोर्टर | उदयपुर

77 वर्षीय अजीत बम्ब एमबी अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों की सेवा में तत्पर मिलेंगे। वे और उनके साथियों की टीम जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों को निशुल्क भोजन कराने, दवा योजना में नहीं मिलने वाली दवाएं दिलाने, कपड़े, पर्ची काउंटर से लेकर डॉक्टरों तक की जानकारी देने सहित हर संभव मदद करते हैं। इतना ही नहीं लावारिश मरीजों की सेवा-सुश्रुषा के साथ ही अस्पताल में मौत होने पर उनके अंतिम संस्कार तक की व्यवस्था करते हैं। अजीत बम्ब बताते हैं कि सेवा का यह सिलसिया मानव सेवा समिति के माध्यम से उनके पिता गणेशलाल बम्ब और उनके साथियों ने शुरू किया था। इस टीम में 51 सेवाभावी सदस्य थे। बीपी जोशी इस समिति के पहले अध्यक्ष थे। बड़ी बात यह है कि इस समिति के ज्यादातर सदस्य 70 से अधिक आयु के बुजुर्ग हैं। समिति के संस्थापक सदस्य 93 वर्षीय सोहनलाल कोठारी, 90 वर्षीय अभय कुमार जैन, 90 वर्षीय दीवान सिंह बाफना, 88 वर्षीय प्रकाश बर्डिया, 73 वर्षीय नटवरलाल शर्मा, 72 वर्षीय कमरुद्दीन सादड़ीवाला आदि कहते हैं कि वैसे कहावत है- बुढ़ापे के लिए सहारे की जरूरी होती है, लेकिन हम कहते हैं- इस बुढ़ापे की बुनियाद इतनी फौलादी होती है, जो समाज को सहारा दे सकती है।

बड़ी अस्पताल में भी है समिति का काउंटर

अजीत बम्ब बताते हैं कि उनके पिता गणेशलाल और बड़े भाई श्यामसुंदर की मौत के बाद सेवा का सिलसिला थम गया था, लेकिन 2011 में प|ी की प्रेरणा से उन्होंने इसे फिर शुरू किया। बम्ब बताते हैं कि एमबी अस्पताल की इमरजेंसी में समिति के काउंटर पर संपर्क कर मदद ली जा सकती है। बड़ी स्थित टीबी अस्पताल में भी समिति का काउंटर है। बम्ब का दावा है कि समिति हर साल हजारों जरूरतमंद मरीजों और उनके परिजनों को निशुल्क भोजन सहित अन्य मदद उपलब्ध करा रही है।