गुजरात / गलत ट्रेन में चढ़ने के बाद ट्रैक पर उतरे छह दोस्त, दूसरी रेलगाड़ी की चपेट में आकर तीन की माैत



हादसे में मृत कुलदीप, प्रवीण नारायण और प्रवीण धीरसिंह। हादसे में मृत कुलदीप, प्रवीण नारायण और प्रवीण धीरसिंह।
काकरा खाड़ी रेल ब्रिज पर ट्रैक के दोनों तरफ सेफ्टी वॉक वे नहीं है। जिसके चलते ट्रेन के सामने आने पर बचने के लिए कोई भी जगह नहीं मिल पाती। काकरा खाड़ी रेल ब्रिज पर ट्रैक के दोनों तरफ सेफ्टी वॉक वे नहीं है। जिसके चलते ट्रेन के सामने आने पर बचने के लिए कोई भी जगह नहीं मिल पाती।
दो के साथ आखिरी सेल्फी। दो के साथ आखिरी सेल्फी।
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हादसे में मृत कुलदीप, प्रवीण नारायण और प्रवीण धीरसिंह।हादसे में मृत कुलदीप, प्रवीण नारायण और प्रवीण धीरसिंह।
काकरा खाड़ी रेल ब्रिज पर ट्रैक के दोनों तरफ सेफ्टी वॉक वे नहीं है। जिसके चलते ट्रेन के सामने आने पर बचने के लिए कोई भी जगह नहीं मिल पाती।काकरा खाड़ी रेल ब्रिज पर ट्रैक के दोनों तरफ सेफ्टी वॉक वे नहीं है। जिसके चलते ट्रेन के सामने आने पर बचने के लिए कोई भी जगह नहीं मिल पाती।
दो के साथ आखिरी सेल्फी।दो के साथ आखिरी सेल्फी।

  • काकरा खाड़ी ब्रिज पर पैदल उधना की ओर जा रहे थे, 11 साल पहले इसी ब्रिज पर 16 लोगों की कटकर हुई थी मौत
  • ब्रिज 7 मीटर पार कर लिया था, 3 मी. बचा था, ट्रेन दिखी तो 2 मी. और दौड़े, लेकिन रफ्तार से हार गए

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2019, 02:55 AM IST

राजसमंद/सूरत. काकरा खाड़ी ब्रिज के रेलवे ट्रैक पर चल रहे राजस्थान के तीन युवकों की शनिवार को ट्रेन से टकराने के बाद मौत हो गई। तीनों राजसमंद के निवासी थे। वहां के छह युवक राजकोट में नौकरी करते थे और अब वलसाड़ में नई नौकरी ज्वॉइन करने अजमेर-पुरी एक्सप्रेस से ट्रेन बदलकर सूर्यनगरी एक्सप्रेस में जा रह थे।

 

जब उन्हें पता चला कि ट्रेन वलसाड़ में नहीं रुकेगी तो वे ट्रेन धीमी होने पर उधना के पास में उतर गए और पैदल ही रेल ट्रैक होते हुए उधना स्टेशन की ओर जाने लगे। खाड़ी ब्रिज से निकलते समय पीछे से कर्णावती एक्सप्रेस आ गई और तीन युवकों को बचने का मौका ही नहीं मिला। कुलदीप की मौके पर मौत हो गई।

 

तीनों की उम्र 18 से 19 साल

प्रवीण नारायण की अस्पताल में कुछ समय बाद ही मौत हो गई, जबकि प्रवीण धीरसिंह की शनिवार शाम को मौत हो गई। तीनों की उम्र 18 और 19 साल थी। बाकी तीन युवक ब्रिज के पीछे थे, इसलिए बच गए। काकरा खाड़ी ब्रिज पर 27 फरवरी 2008 को कच्छ एक्सप्रेस की चपेट में आकर 16 लोगों की मौत हो गई थी।

 

तीनों दौड़े, लेकिन ट्रेन उनसे तेज रफ्तार में थी

हादसे में बचे तीन दोस्तों का नाम पिंटू प्रकाश सिंह, मैक्स सिंह और ओमप्रकाश सिंह है। उन्होंने बताया कि अजमेर-पुरी से उतर कर हम सभी सूरत से सूर्यनगरी एक्सप्रेस में चढ़कर वलसाड जाने लगे। तभी किसी ने हमें बताया कि ट्रेन वलसाड नहीं रुकेगी। इतने में ट्रेन सूरत-उधना के बीच ट्रैक पर रुकी, तो सभी उतर गए। फिर ट्रैक के रास्ते उधना जाने लगे। काकरा खाड़ी ब्रिज पर तीन-तीन के समूह में आगे-पीछे चल रहे थे।


तीन दोस्त 10 मीटर लंबे ब्रिज का लगभग 7 मीटर हिस्सा पार कर चुके थे, जबकि हम ब्रिज पर पहुंचे ही नहीं थे। इतने में तेज रफ्तार में कर्णावती एक्सप्रेस आती दिखी तो पीछे के तीन दोस्त चिल्लाए। आगे वाले तीनों ने दौड़ते हुए ब्रिज पार करना चाहा, लेकिन दो मीटर हिस्सा पार करने से पहले ही ट्रेन ने टक्कर मार दी।

 

ब्रिज पर यह समस्या

सूरत-उधना के बीच 10 मीटर लंबे इस ब्रिज के दोनों ट्रैक के बीच में बड़ा गैप है। ट्रैक के दोनों किनारे पर सेफ्टी वॉक-वे भी नहीं बने हैं। ऐसे में यदि कोई इस ट्रैक पर चल रहा हो और पीछे से ट्रेन आ जाए तो ब्रिज को पार करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। इसी ब्रिज पर 2008 में 16 लोगों की कटकर मौत हुई थी। ये भी पैदल सूरत की ओर जा रहे थे।

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