राजसमंद / रोजगार की तलाश में गए थे सूरत गए थे तीन दोस्त, ट्रेक पार करते हुए ट्रेन की चपेट में आने से मौत



हादसे में हुई इन तीनों युवकों की मौत हादसे में हुई इन तीनों युवकों की मौत
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हादसे में हुई इन तीनों युवकों की मौतहादसे में हुई इन तीनों युवकों की मौत

  • सूरत में काकरा खाड़ी रेल ब्रिज के अप पर हुआ हादसा

Dainik Bhaskar

Jul 14, 2019, 02:01 PM IST

सूरत/राजसमंद. राजस्थान के 3 नवयुवकों की गलती शनिवार सुबह उनके जान पर भारी पड़ गई। बीच ट्रैक पर ट्रेन से उतरकर ट्रैक पर पैदल चलने के दौरान काकरा खाड़ी रेल ब्रिज के अप पर ट्रेन की चपेट में आ गए और उसमे तीन की मौत हो गई जबकि तीन दोस्त ब्रिज पर नहीं पहुंचे थे जिससे वे बच गए। तीनों की उम्र 18 और 19 साल थी। इसी काकरा खाड़ी ब्रिज पर 27 फरवरी 2008 को कच्छ एक्सप्रेस की चपेट में आकर 16 लोगों की मौत हुई थी।

 

शनिवार सुबह हुए इस हादसे में मृतक और घायल राजस्थान के अजमेर और राजसमंद जिला के रहने वाले थे जो वलसाड़ जा रहे थे। इन्होंने सूरत आकर ट्रेन बदली लेकिन जिस ट्रेन में बैठे वो ट्रेन वलसाड नहीं रुकती जिसके चलते ये सूरत -उधना के बीच ट्रेन के स्लो होने पर ये उतर गए और पैदल उधना की ओर जाने लगे उसी दौरान काकरा खाड़ी ब्रिज पर जैसे पहुंचे अप लाइन पर सूरत से मुंबई की ओर जा रही तेज रफ्तार कर्णावती एक्सप्रेस की चपेट में आ गए। 

 

जांच अधिकारी ने बताया: सूरत रेलवे पुलिस के इस घटना के जांच अधिकारी भूपति सिंह ने बताया कि जो तीन लड़के आगे थे वो ट्रेन की चपेट में आए तीनो अप लाइन पर पैदल चलकर उधना जा रहे थे ब्रिज का 12 मीटर हिस्सा पार कर लिए थे बाकी तीन मीटर रह गया था तब तक ट्रेन की चपेट में आ गए। इसके अलावा तीन दोस्त पीछे थे जो ब्रिज पर नहीं पहुंचे थे वे बच गए। 
 

मरने वाले तीनों दोस्तों की उम्र 18-19 साल 
दो युवा भीम क्षेत्र के शेरों का वाला और एक पांता की आंती का था। इनके साथ शेरों का वाला निवासी एक और युवक था, जो हादसे में बच गया। शेरों का वाला निवासी दोनों मृतक चचेरे भाई थे। चारों युवाओं के परिवार वालों की स्थिति ठीक नहीं है। घर चलाने में परिवार वालों की मदद करने के लिए नौकरी करने जा रहे थे। हादसे में शेरों का वाला निवासी ओमप्रकाशसिंह हादसे में बच गया है।

 

वह भी साथ था, लेकिन तीनों मृतक आगे चल रहे थे और ओमप्रकाश पीछे था, इस कारण वह हादसे का शिकार होने से बच गया। हालांकि हादसे में तीन दोस्तों की मौत के बाद ओमप्रकाश बोलने की स्थिति में नहीं है। हादसे की सूचना परिवार वालों को शनिवार सुबह मिली। तब से ही गांव में शोक छाया हुआ है। बताया गया कि चारों दोस्त पहले जामनगर में एक-डेढ़ महीने तक नौकरी कर चुके हैं। तीन दिन पहले चारों घर वालों से मिलने आए थे और शुक्रवार शाम को चारों फिर काम पर जाने के लिए रवाना हो गए थे।

 
कोई मजदूरी तो किसी का परिवार ड्राइवरी कर चला रहा परिवार 
कुलदीपसिंह के पिता भूरसिंह पाली में मजदूरी कर परिवार का गुजारा चलाते हैं। कुछ खेती की जमीन भी है, लेकिन पहाड़ी क्षेत्र में पानी नहीं होने से खेती से गुजारा नहीं चल पाता है। कुलदीप की मां भी मजदूरी करती है। घर खर्च चलाने के लिए बकरियां भी रखी हुई है। कुलदीपसिंह ने पिछले साल 10वीं पास कर पढ़ाई छोड़ दी थी। 12वीं प्राइवेट दे रहा था। परिवार में कुलदीपसिंह सबसे बड़ा था। एक छोटा भाई है, जो आठवीं पढ़ता है।

 

प्रवीणसिंह के पिता धीरसिंह 60 साल के हैं। प्रवीणसिंह का बड़ा भाई विक्रम ट्रक ड्राइवर है, जो घर खर्च चलाता है। प्रवीण ने इसी साल बारहवीं पास की थी। कॉलेज प्राइवेट पढऩा चाहता था। परिवार की स्थिति ठीक नहीं है। उसके दो बड़े भाई और हंै। प्रवीणसिंह सबसे छोटा है। बहनों की शादी हो चुकी है। शव सुबह तक गांव पहुंचेंगे। प्रवीणसिंह तथा कुलदीपसिंह के घर 200-250 मीटर दूर है।

 

पांता की आंती निवासी प्रवीण सिंह पुत्र नारायण सिंह के परिवार की स्थिति भी ठीक नहीं बताई जाती है। हादसे में बचने वाले 18 वर्षीय ओमप्रकाश ने इसी साल बारहवीं की ओपन से परीक्षा दी है। उसने सुबह परिवार वालों को हादसे के बारे में बताया। 

 

ऐसे हुआ हादसा 

अजमेर और राजसमंद जिला के कुल 6 दोस्त वलसाड़ जाने के लिए अजमेर से अजमेर -पूरी एक्सप्रेस में सवार हुए। शनिवार सुबह 7. 50 बजे यह ट्रेन सूरत पहुंची और यहाँ ये सभी लड़के उतर गए फिर सूरत से सूर्यनगरी एक्सप्रेस में सवार हुए और वलसाड जाने लगे लेकिन किसी ने इन्हे बताया कि ये ट्रेन वलसाड़ नहीं रुकेगी। बचे तीन दोस्तों का नाम पिंटू प्रकाश सिंह,मैक्स सिंह और ओमप्रकाश सिंह है। 

 

पिंटू ने बताया: हम बीच रास्ते में उतर गए थे क्योंकि हमे बताया गया कि यह वलसाड़ नहीं रुकेगी और हम पैदल चलकर आगे बढ़ने लगे। रास्ते में रेल ब्रिज आया मेरे तीन दोस्त ब्रिज पर जा चुके थे और हम तीन पीछे जा रहे थे उतने में ट्रेन की आवाज सुनाई दी और मैं कुलदीप का नाम लेकर चिल्लाया और वे तीनों ट्रेन देखकर आगे ब्रिज पार करने की कोशिश में दौड़ने लगे लेकिन रफ्तार ट्रेन की ज्यादा थी।

 

इसे देखकर तीनों ने यहां वहां देखा और कूदने का प्रयास किया, लेकिन तब तक ट्रेन ने तीनों को धक्का मार दिया इसमें मेरा दोस्त कुलदीप मौके पर ही मर गया। आगे जा कर ट्रेन रुकी उसके 10 मिनट बाद रेलवे के पुलिस वाले स्ट्रेचर लेकर आए और अस्पताल ले कर गए जहाँ दो और दोस्तों की मौत हुई। 


 

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