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1.53 लाख जीएसटी, विभाग ने राज्य का हिस्सा केंद्र में जमा किया, अब रोज 50 रु. जुर्माना

सतनाम छाबड़ा, श्रीविजयनगर। पेशे से आढ़त कारोबारी छाबड़ा ने 14 नवंबर 2017 को ओबीसी में 1.53 लाख का जीएसटी ऑनलाइन जमा करवा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jan 25, 2018, 07:55 AM IST

सतनाम छाबड़ा, श्रीविजयनगर। पेशे से आढ़त कारोबारी छाबड़ा ने 14 नवंबर 2017 को ओबीसी में 1.53 लाख का जीएसटी ऑनलाइन जमा करवा दिया। सरकार ने इसकी अंतिम तारीख 20 नवंबर तय की थी। सोच थी कि समय से पहले जीएसटी देकर देश के विकास में हाथ बढ़ाएंगे। लेकिन यही सोच अब उनके लिए आफत बन गई है। इस जीएसटी में 76436 रुपए सीजीएसटी केंद्र सरकार और 76436 रुपए एसजीएसटी में राज्य सरकार के खाते में जमा करवाए गए। इसमें नई परेशानी तब पैदा हुई, जब व्यापारी छाबड़ा अपने वकील के पास रिटर्न भरवाने गए। वकील ने जैसे ही अक्टूबर की जीएसटीआर-3 बी सबमिट करने के बाद टैक्स का एडजेस्टमेंट किया तो पता चला कि जीएसटी विभाग ने राज्य सरकार के खाते में जमा करवाई राशि 74 हजार 436 रुपए का हिस्सा ही गायब कर दिया गया। विभाग ने पूरी की पूरी राशि ही आईजीएसटी में ट्रांसफर कर दी। तब से व्यापारी 21 नवंबर से आज तक रोजाना प्रतिदिन 50 रुपए जुर्माना भुगत रहा है। व्यापारी का तर्क है कि वह तो जीएसटी 6 दिन पहले ही जमा करवा चुका, जबकि विभाग का कहना है कि उन्हें राशि नहीं आई।

गफलत

व्यापारी ने 14 नवंबर को 6 दिन पूर्व ही जमा करवा दिया था जीएसटी, विभाग 21 नवंबर से वसूल रहा है रोजाना जुर्माना

3 बड़े सवाल, जो व्यापारियों को कर रहे परेशान

1. यह कैसे संभव है कि रुपए राज्य सरकार के खाते में जमा करवाए और जमा केंद्र के खाते में कर दिए गए ?

2. विभाग की वेब साइट और हैल्पलाइन ही जब व्यापारियों को गुमराह करेगी तो विभाग की योजना पर कौन भरोसा करेगा ?

3. व्यापारी पर बीते दो माह से हर दिन लग रही है 50 रुपए पैनल्टी और ब्याज। सवाल ये कि इसे कौन भुगतेगा ?

व्यापारी: जीएसटी की वेबसाइट से लेकर उच्चाधिकारियों तक गुहार, न्याय आज तक नहीं मिला: सतनाम छाबड़ा का कहना है कि इस संबंध में उन्होंने व वकील ओमप्रकाश कालड़ा ने अनेक बार विभाग की वेबसाइट और हेल्प डेस्क पर शिकायत दर्ज कराई। यहां तक कि उच्चाधिकारियों तक भी मामला पहुंचाया। शिकायत डालने के एक मिनट बाद ही दर्ज होने व जल्द निराकरण का आश्वासन मिलता। कस्टमर केयर पर फोन करने पर नई शिकायत डालने की बात कही जाती। अब तक करीब 15 बार रजिस्टर्ड शिकायत की जा चुकी है। लेकिन निराकरण नहीं हुआ।

वकील: विभाग ने ई-मेल कर समस्या के समाधान की बात कही, साइट पर समस्या जस की तस: वकील ओमप्रकाश कालड़ा का कहना है कि 7 जनवरी 2018 को जीएसटी विभाग द्वारा एक ई-मेल भेजी गई। जिसमें समस्या के समाधान की बात कही गई। इसके बाद विभाग की वेब साइट पर लॉगिन कर देखा गया तो व्यापारी का जमा करवाया रुपया अभी भी केंद्र सरकार के खाते में जमा बता रहा है। विभाग के फोन नंबर 0120-4888999 पर संपर्क किया तो जवाब मिला कि इस टैक्स को दुबारा जमा करवा दें और पिछले जमा करवाए गए टैक्स का रिफंड मांग लें।

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