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विशेष योग संयोग में छठ पूजा आज से, नहाय खाय से शुरू होगा

चार दिन तक चलने वाले सूर्य उपासना का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ शुरू होगा। इसके बाद खरना होगा। जिसे पूजा का दूसरा व...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 08:52 AM IST
Rawatbhata - chhath pooja will start from the khasi
चार दिन तक चलने वाले सूर्य उपासना का महापर्व छठ नहाय खाय के साथ शुरू होगा। इसके बाद खरना होगा। जिसे पूजा का दूसरा व कठिन चरण माना जाता है। इस दिन व्रती निर्जला उपवास रखेंगे और शाम को पूजा के बाद खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करेंगे।

अथर्ववेद के अनुसार षष्ठी देवी भगवान भास्कर की मानस बहन हैं। प्रकृति के छठे अंश से षष्ठी माता उत्पन्न हुई हैं। उन्हें बच्चों की रक्षा करने वाले भगवान विष्णु द्वारा रची माया भी माना जाता है। इसीलिए बच्चे के जन्म के छठे दिन छठी पूजी जाती है, ताकि बच्चे के ग्रह-गोचर शांत हो जाएं। इस पर्व से कुछ मान्यताएं भी जुड़ी हुई हैं।

विशेष संयोग बन रहे हैं। जो विशेष शुभ फलदायी और समृद्धिकारक हैं। रविवार को सूर्य का दिन प्रारंभ हो रहा है। इस दिन छठ प्रारंभ हो रहा है। इसके अलावा सिद्धियोग का संयोग बन रहा है। 13 नवंबर को अमृत योग व सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। अंतिम दिन 14 नवंबर को छत्र योग बन रहा है, जो धन व समृद्धिकारक है। बिहार, उत्तरप्रदेश एवं झारखंड में मनाए जाने वाले डाला छठ पूजा महोत्सव इस बार रविवार से नहाय खाय से प्रारंभ होगा।

रावतभाटा में छठ महापर्व का शुभारंभ आज से, तैयारियां पूरी

रावतभाटा. समिति के पदाधिकारियों ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया।

समिति के यशीनाथ झा ने बताया कि चंबल नदी घाट पर मनाए जाने वाले महोत्सव के लिए चंबल छठघाट पर सभी व्यवस्थाएं की गई। इस अवसर पर घाट की साज सज्जा की गई है। पालिका की ओर से चंबल नदी छठ घाट की रंगाई-पुताई और सफाई भी कराई गई है। सोमवार को खरना, 13 को सायंकालीन अर्घ्य एवं 14 को प्रातःकालीन अर्घ्य के साथ होगा। परिवार के सदस्य एक ही स्थान पर एकत्रित होते है और पूजन में भाग लेते हैं।

पूजा की तिथि तथा मुहूर्त : 13 नवंबर 2018, मंगलवार के दिन षष्ठी तिथि का आरंभ 01:50 पर होगा जिसका समापन 14 नवंबर 2018, बुधवार के दिन 04:21 मिनट पर होगा।

ये हैं छठ पूजा के 4 दिन एवं पूजा विधि

पहला दिन नहाय खाय : कार्तिक शुक्ल चतुर्थी को यह व्रत आरंभ होता है। इसी दिन व्रती स्नान करके नए वस्त्र धारण करते हैं।

दूसरा दिन खरना : कार्तिक शुक्ल पंचमी को खरना बोलते हैं। पूरे दिन व्रत करने के बाद शाम को व्रती भोजन करते हैं।

षष्ठी इस दिन छठ पूजा का प्रसाद बनाते हैं। इस दिन टेकुआ या टिकरी बनाते हैं। प्रसाद तथा फल से बांस की टोकरी सजाई जाती है। टोकरी की पूजा कर व्रती सूर्य को अर्ध्य देने के लिए तालाब या घाट पर जाते हैं और स्नान कर डूबते सूर्य की पूजा करते हैं।

सप्तमी को प्रातः सूर्योदय के समय विधिवत पूजा कर प्रसाद वितरित करते हैं।

नहाय -खाए

रविवार 11 नवंबर

खरना (लोहंडा)

सोमवार 12 नवंबर

सायंकालीन अर्घ्य

मंगलवार 13नवंबर

प्रात:कालीन अर्घ्य

बुधवार 14 नवंबर

सूर्य योग में भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य 13 नवंबर को

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