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125 सालों बाद हरियाली अमावस्या पर इस बार पंच महायोग का संयोग

Zila News News - इस बार सावन में नाग पंचमी 5 अगस्त (सोमवार) को है, जो विशेष योग है। यह योग 20 साल बाद बना है। इससे पहले सावन मास में सोमवार...

Jul 14, 2019, 10:30 AM IST
R.mandi News - rajasthan news 125 years later this time on the hariyali amavasya the combination of panch mahayog
इस बार सावन में नाग पंचमी 5 अगस्त (सोमवार) को है, जो विशेष योग है। यह योग 20 साल बाद बना है। इससे पहले सावन मास में सोमवार को नाग पंचमी का संयोग 16 अगस्त 1999में बना था और आगामी समय में 21 अगस्त 2023 को यह योग फिर बनेगा और सावन मास में अधिक मास होने से सावन मास दो माह का रहेगा तथा उसमें 8 सोमवार आएंगे।

ज्योतिषाचार्य अमित जैन शास्त्री ने बताया कि नागपंचमी पर सोमवार की युक्ति अनिष्ट ग्रहों की शांति हेतु सर्वोत्तम मानी है। साथ ही पितृ शांति कालसर्प योग शांति हेतु सर्वोत्तम सिद्ध योग है। इस योग में भगवान शिवजी का रुद्राभिषेक पूजन सर्व मनोकामना सिद्धि हेतु अचूक माना जाता है। सावन में इस बार कई संयोग बन रहे हैं। इस बार 125 सालों बाद हरियाली अमावस्या पर पंच महायोग का संयोग बन रहा है। भगवान शिव के खास दिन माने जाने वाले सोमवार को नागपंचमी आ रही है। इस बार नागपंचमी का विशेष महत्व है।

वज्र और विष कुंभ योग: सावन मास प्रारंभ होने के पूर्व ही खंडग्रास चंद्रग्रहण होगा। यह चंद्र ग्रहण पूरे भारत में दिखाई देगा। इस बार सावन का शुभारंभ 17 जुलाई से हो रहा है। इस दिन वज्र और विष कुंभ योग बन रहा है। 15 अगस्त को रात 9 बजे से पहले बंधवा लें राखी देश की आजादी का पर्व स्वतंत्रता दिवस यानि 15 अगस्त को चंद्र प्रधान श्रवण नक्षत्र में रक्षाबंधन का संयोग बन रहा है। 19 साल पहले 2000 में ऐसा योग बना था। रात 9 बजे बाद पंचक शुरू होगा। इसलिए इससे पूर्व रक्षाबंधन पर राखी बंधवाने का मुहूर्त श्रेष्ठ है।

खंडग्रास चंद्रग्रहण का भी संयाेग

ज्योतिषाचार्य शास्त्री ने बताया कि सावन मास प्रारंभ होने के पूर्व 16 व 17 जुलाई की रात मध्यरात्रि को खंडग्रास चंद्रग्रहण का योग है। यह चंद्रग्रहण समग्र भारत वर्ष में दिखाई देगा। ग्रहण का सूतक पूर्णिमा 16 जुलाई को दोपहर 4.32 बजे से शुरू हो जाएगा। ग्रहण का स्पर्श 17 जुलाई की मध्य रात्रि के बाद 1.32 बजे होगा। ग्रहण मध्यकाल 3.1 मिनट व ग्रहण का मोक्ष 4.30 मिनट पर होगा। सूतक अवस्था में भोजन करना, सोना आदि शास्त्रों के अनुसार नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाएं ग्रहण आरंभ होने के 5 घंटे के पूर्व यानी रात में 8.32 मिनट तक सात्विक भोजन पदार्थ आवश्यक मात्रा में पेय पदार्थ ग्रहण कर सकती है।

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