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क्या आंगनबाड़ी के मासूम बच्चों को कोरोना का खतरा नहीं?
मध्यप्रदेश की तर्ज पर हो सकती हैं छुट्टियां: इधर जानकारों का कहना है कि दिल्ली एवं यूपी में सहित अन्य प्रदेशों में वहा कि सरकारों ने आंगनबाड़ी के द्रों की छुट्टियां घोषित कर रखी है । जबकि मध्यप्रदेश सरकार ने शनिवार को 30 मार्च तक छुटटी का आदेश निकाला है उसमें लिखा है कि एक सप्ताह के पोषाहार बच्चें के माता - पिता को दे देवे जिससे बच्चों को आहार घर पर मिलता रहे ओर संक्रमण से बचाव हो सके । ऐसा ही आदेश यदि राजस्थान सरकार भी निकालकर छुट्टियां घोषित कर देवे तो करोना महामारी के संक्रमण से भी बचाव हो सके ओर बच्चों को घर पर पोष्टिक पोषाहार भी मिल जा वे ।
शाहपुरा|काेराेना माहामारी घोषित होने के बाद भी अांगनबाड़ी केद्राें पर पढ़ाई करते मासूम बच्चे।
कोरोना वायरस की महामारी को लेकर संभवतया आज रविवार तक आंगनबाड़ी के मासूम बच्चों की की छुटटी के मामले में निर्णय ले लिया जावेंगा ।
– के के पाठक, शासन सचिव महिला एवं बाल विकास विभाग राजस्थान
इस मामले को लेकर मैं सरकार से बात करता हूं बताऊंगा आपको
- जोगाराम जिला कलेक्टर जयपुर
जब स्कूलों की कॉलेजों की सब की छुट्टियां 30 तक सरकार ने घोषित कर दी तो आंगनबाड़ी केंद्रों की भी छुट्टी घोषित होनी चाहिए इसको लेकर मैं महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री से इस बारे में बात करूंगा
- आलोक बेनीवाल, विधायक शाहपुरा
शाहपुरा|विश्व स्वास्थ्य संगठन तथा संयुक्त राष्ट्र द्वारा कोरोना संक्रमण को महामारी घोषित करने के बाद मुख्यमंत्री द्वारा कोरोना संक्रमण की स्थिति को देखते हुए राज्य के सभी सरकारी,गैर सरकारी, निजी विद्यालयों ,कोचिंग संस्थान, मदरसे सहित सभी प्रकार के शिक्षण संस्थानों में 30 मार्च तक अवकाश घोषित किया है। लेकिन क्या कोरोना वायरस की महामारी के संक्रमण खतरा प्रारंभिक शिक्षा की धूरी आंगनवाड़ी केंद्र मे पढ़ने वाले मासूम बच्चों को नही है ? शायद सरकार के दिए गए आदेश को देखते हुए तो ऐसा ही लग रहा।
जिसके कारण सरकार ने कालेज , स्कूल कोचिंग में 30 तक अवकाश दिया है जबकि आंगनबाड़ी केंद्रों नौनिहाल कोई अवकाश नहीं दिया है । इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार को इन नौनिहालों के स्वास्थ्य की कोई परवाह नहीं है। जबकि विश्व के 250 दे शो में अब करीब 5000 लोगों की मौत हो गई एवं 1लाख 50 हजार से ज्यादा लोग अस बिमारी से संक्रमण की चपेट में है एवं भारत में भी 2 लोगों की मौत हो चुकी एवं 90 मामले आ चुके है । इसके बावजूद अवकाश को लेकर सरकार के सोते लेपन से आंगनबाड़ी के नौनिहाल के परिजन मायूस है। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को पोषण आहार मिल सके इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा हर बार इन केंद्रों पर अवकाश की मार पड़ती है। पोषण आहार को माध्यम बनाकर कोरे ना संक्रमण की महामारी घोषित होने के बाद भी इसके मंडराते संक्रमण के खतरे बावजूद भी सरकार को इन मासूमों की जान की कितनी चिंता है इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिल्ली ,उत्तरप्रदेश एवं मध्यप्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों की 30 मार्च तक छुटटी घोषित कर दी जबकि राज्य सरकार की ओर से अभी तक छुटटी घोषित नही कि। जानकारी के अनुसार आंगनबाड़ी केंद्रों पर 0 से 6 वर्ष तक के बच्चे स्कूल की तर्ज पर प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण कर मजबूत शिक्षा की नींव तैयार करते हैं। बिजली पानी भवन की कमी आदि सुविधाओं से महरूम होने के बावजूद इन केंद्रों पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से बच्चों को स्वास्थ्य व स्वच्छता संबंधित ज्ञान पढ़ने लिखने आदि की तालीम दी जाती है। सरकार द्वारा इन केंद्रों में ज्यादा से ज्यादा दिन बच्चों को पोषण और मिल सके इसको लेकर इन्हें शिक्षण संस्थाओं के मुकाबले काफी कम अवकाश दिए जाते हैं।
इसको लेकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा समय-समय पर सरकार के समक्ष विरोध भी जताया जाता रहा है। काफी विरोध के बावजूद सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को तो 10 -10 दिन का अवकाश सर्दी एवं गर्मी में दिया गया लेकिन उसमें भी यह शर्त रख दी कि आंगनवाड़ी केंद्र हर बच्चों को नियमित पोषण मिलता रहे।