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मुकंदरा टाइगर रिजर्व से एक किमी के दायरे की पाबंदी हटनी चाहिए, ग्रामीणों को परेशानी

एक वर्ष पहले
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मुकंदरा अभयारण्य के एक किमी दायरे को सेंसटिव जोन घोषित करने के बाद ग्रामीणों ने विरोध करना शुरू कर दिया है। मंडल अध्यक्ष देवीशंकर गुर्जर ने इस बारे में ग्रामीणों का पक्ष रखते हुए प्रधान मुख्य वन सरक्षक एवं मुख्य वन प्रतिपालक अरविन्द तोमर व दीपनारायण पाण्डेय से जयपुर में मुलाकात की। साथ ही एक ज्ञापन में भी दिया, इमसें बताया कि जोन घोषित करने के बाद कैसी समस्याएं पैदा हो गई हैं।

गुर्जर ने तोमर को बताया कि मोरुकला, कनवास तहसील के कई गांव, बास्याहेड़ी, धूलेट, दाता, जालिमपुरा समेत अन्य पंचायत के निवासियों को भारी परेशानी होने लगी है। सेंसटिव जोन होने के कारण अब लोग अभयारण्य से एक किमी की दूरी बनाकर चल रहे हैं। सेंसटिव जोन के चक्कर में अब किसान इस क्षेत्र में सही तरीके से काम भी नहीं कर पा रहे हैं। अगर किसी को निर्माण कार्य करना हो तो वन विभाग के कर्मचारी अड़ंगा लगा देते हैं। गुर्जर ने ग्रामीणों की परेशानी बताते हुए कहा कि एक किमी के दायरे में किसानों की कृषि भूमि भी आ रही है, ऐसे में यहां रोजाना काम करना पड़ता है। साथ ही मानव गतविधियां भी करनी पड़ेगी, लेकिन विभाग इस पर कार्रवाई करना शुरू कर देगा। ऐसे में ग्रामीणों के सामने समस्या पैदा हो गई है।

गुर्जर ने विभाग के बड़े अधिकारियों को बताया कि मुकंदरा में कई तरह की भर्तियां की गईं थी। इनमें स्थानीय युवाओं को रोजगार देना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बाहरी लोगों को संविदा की नौकरी पर रखा गया। जबकि, यहां के युवा क्षेत्र के बारे में जानकार और योग्यताधारी थे। ऐसे में ग्रामीणों में आक्रोश है। इस बारे में पहले भी अधिकारियों को अवगत करवा था कि हमारे बच्चों को रोजगार मिलना चाहिए। लेकिन अफसरों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। वन अधिकारियों ने इस पर कहा कि युवाओं को रोजगार देने के लिए हम स्थानीय अधिकारियों को निर्देशित करेंगे। साथ ही किसानों की समस्याओं पर विचार किया जाएगा।

दरा. वन विभाग अधिकारी को ज्ञापन देते हुए।
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