बच्चे की प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा से हो: सारस्वत

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Bhaskar News Network

Mar 17, 2019, 05:45 AM IST
Rawatbhata News - rajasthan news child39s initial education should be from mother tongue saraswat
रावतभाटा| अादर्श विद्या मंदिर माध्यमिक स्कूल में शनिवार को पश्चिम संस्कृति के अनुसरण के दौर में शिशु वाटिका की महत्ता पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रद्धालय बीएड कॉलेज की व्याख्याता ज्योति सारस्वत ने कहा कि शिशु की प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में ही होनी चाहिए। मातृभाषा में शिक्षण होने से बालक के व्यक्तित्व विकास में सहायक होती है। शिशु के विकास एवं शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास के लिए प्राथमिक शिक्षा आधार शिला होती है। मुख्य वक्ता विद्या भारती शिक्षा संस्थान कोटा सचिव सतीश गौतम ने बताया कि विद्या भारती की शिशु वाटिका पद्धति में बालक को सबसे पहले वस्तुओं को दिखाना, पहचान करवाना, श्रवण करवाना, बुलाना, लिखना सिखाया जाता है। बालक खेल,खेल में ही बहुत कुछ सीख जाता है।

कार्यक्रम अध्यक्ष वैज्ञानिक अधिकारी डॉ.एमएल परिहार ने बच्चों को स्वस्थ एवं निरोगी किस प्रकार रह सकते है, इसके तरीके बताए। संचालन सरिता राठौर ने किया। पूनम चतुर्वेदी ने परिचय दिया। मातृ भारती संरक्षक मंजीत कौर ने आभार जताया।

कार्यक्रम में मातृ भारती अध्यक्ष निरंजना त्रिपाठी, सचिव लाडदेवी धाकड़, सह सचिव संगीता प्रजापत, कोषाध्यक्ष वंदना करण, लीला प्रजापत, रतन दशोरा, छाया धाकड़, अंतिमा नागर, ओमप्रकाश भांबी एवं शिक्षक, नवीन प्रवेश लेने वाले स्टूडेंट्स, अभिभावक मौजूद थे। बच्चों ने अंग्रेजी कविता, शहीदों को नमन करते हुए नाटक का मंचन किया। कार्यक्रम में प्रतिभाओं को पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

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