चौमू पालिका अौर मंडी समिति के बीच अटकी गढ़ परिसर की सफाई व्यवस्था

Zila News News - शहर के हृदय स्थल बस स्टैंड के पास बने प्राचीन धरोहर गढ़ परिसर कई साल से कचरे के ढेरों से अटा पड़ा है, लेकिन इसमें डाले...

Feb 15, 2020, 08:05 AM IST
Chomu News - rajasthan news cleaning arrangement of the stalled citadel complex between chaumu palika and mandi samiti

शहर के हृदय स्थल बस स्टैंड के पास बने प्राचीन धरोहर गढ़ परिसर कई साल से कचरे के ढेरों से अटा पड़ा है, लेकिन इसमें डाले गए टनों कचरे को उठाने के लिए न तो नगरपालिका आगे आ रही है और न ही कृषि उपज मंडी समिति उठाने के लिए तैयार है। गढ़ परिसर के पैलेस को छोड़कर शेष हिस्सा 2.5 हेक्टेयर चौमू कृषि उपज मंडी समिति की संपति है।

गढ़ परिसर में डाले गए कचरे के मामले में जहां नगर पालिका के अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ते आ रहे है कि कचरा पालिका नहीं डाल रही। इसलिए मंडी समिति की संपत्ति होने के कारण उसे ही कचरे के निस्तारण करना होगा। वही कृषि उपज मंडी समिति कचरा डालने के लिए पालिका पर दोष मढ़ते हुए नोटिस देकर कचरा उठवाने के लिए कह रही है।

वास्तविकता यह है कि पालिका द्वारा वर्षों तक शहर से एकत्र किया गया कचरा इसी गढ़ परिसर में डाला जा रहा था। पहले तो पालिका ने गढ़ परिसर के चारों ओर बनी प्राचीन पक्की नहर को कचरे से भरकर पाट दिया। इसके बाद कचरे के ढेर परिसर में लगाना शुरू कर दिया था। अब हालत यह बने हुए है कि गढ़ परिसर में 3 से 8 फुट ऊंचे कचरे के ढेर लगे हुए है।

गढ़ परिसर मंडी समिति की संपत्ति, पालिका की नहीं

नगरपालिका ने गढ़ परिसर मेें कचरा नहीं डाला है। गढ़ परिसर कृषि उपज मंडी समिति की संपत्ति है। इसलिए इसमें डाला गया कचरा मंडी समिति ही उठाए। इससे स्थानीय पालिका प्रशासन का कोई लेना-देना नहीं है।
-शुभम गुप्ता, ईओ नगरपालिका

नगर पालिका ने डाल रखा है यहां पर शहर का कचरा

नगरपालिका ने गढ़ परिसर के मंडी यार्ड व नहर में कचरा डाल दिया। उन्हें कई बार कचरा उठाने के लिए नोटिस भेजा गया, लेकिन पालिका कचरा नहीं उठवा रही है। इसके लिए उच्चाधिकारियों को भी अवगत करा रखा है।
-रामहंस मीणा, सचिव, कृषि मंडी

चौमू | गढ़ परिसर में शेष बची नहर में अब भी डाला जा रहा है कचरा।

मंडी की निजी संपत्ति बनने के बाद बर्बाद हुई धरोहर

प्राचीन गढ़ ठिकाने ने उद्योगपति लकड़ा परिवार को बेचान करने के बाद लाेगों के विरोध के चलते लकडा परिवार ने पैलेस के हिस्से को छोड़कर शेष हिस्से को कृषि उपज मंडी समिति काे वर्ष 1976 में विक्रय कर दिया। यही से धरोहर की बर्बादी होना शुरू हो गया। पहले तो 1980-81 में 49 दुकानों का निर्माण करवा कर वर्ष 1982 में मुख्य मंडी यार्ड घोषित कर दिया। यहां पर वर्ष 1988 तक मंडी का व्यापार चला। इसके बाद उसे अघोषित कर नई मंडी का निर्माण करवा के उसमें व्यापार स्थानांतरित करवा दिया गया। इसके बाद मंडी अधिकारियों ने इस यार्ड काे अपने हाल पर छोड़ दिया। देखरेख का अभाव के चलते पहले आसपास के लोग तथा बाद में पालिका ने शहर का एकत्र किया कचरा पक्की नहर में डालना शुरू कर दिया। जैसे- जैसे नहर भरती गई, तो उसके बाद कचरा यार्ड के अन्य हिस्सों में डालना शुरू कर दिया जिसके आज भी ढेर लगे हुए है। इसके अलावा नहर भरने पर उसे पाट दिया।

दुर्गंध से आसपास के लोग परेशान

गढ़ परिसर के चारों ओर आबादी बसी हुई है। बरसात के दिनाें में यहां पर लगे कचरे के ढेर तथा आज भी यहां चोरी-छुपे डाले जाने वाले मृत मवेशियों के शवाेें से उठने वाली दुर्गंध से लोग वर्षों से परेशान है। गढ़ परिसर के पश्चिम में शहर की सीएचसी है। यहां पर रोजाना सैकड़ों मरीज और उनके साथ आने वाले परिजनों का जमावड़ा लगा रहता है। कचरे के कारण यहां संक्रमण फैलने का भी अंदेशा है। प्रसूति गृह में भी बच्चा जन्म लेने के बाद पहली श्वास ही दुर्गंध की ले रहा है।

बची 20 % नहर बचाने के लिए कोई प्रयास नहीं

वैसे तो 80 प्रतिशत नहर को कचरे से पाट दिया गया, लेकिन अब शेष बची 20 प्रतिशत नहर को बचाने के लिए मंडी समिति कोई
कोशिश नहीं कर रही है। नहर में आज भी लोग कचरा डाल रहे है। गंदे पानी के नाले खोल रखे हैं जिससे यहां का वातावरण दुर्गंधमय बना रहता है।

आमने

सामने

गढ़ परिसर में दिखाई देता महल और बाहरी हिस्से में कचरा।

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