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धौला पीएचसी में 26 साल से महिला डॉक्टर की नियुक्ति नहीं, 11 साल में मात्र 77 डिलीवरी, 3207 प्रसूताएं दूसरी जगह पहुंची

एक वर्ष पहले
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राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के खुलने के 26 साल बाद भी आज तक महिला चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इससे आसपास के 10 ग्राम पंचायतों व गांव ढाणियों की आधी आबादी की महिलाओं को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है। यहां महज केवल 77 महिलाओं ने डिलीवरी करवाई है। महिला चिकित्सक के अभाव में क्षेत्र की 3207 महिलाओं ने अन्यत्र जाकर सरकारी व निजी अस्पतालों में डिलीवरी करवाई है।

महिलाओं ने बताया कि जहां पीएचसी स्तर पर आयुष व यूनानी चिकित्सा पद्धति के चिकित्सक नियुक्त कर रखे है वही महिलाओं की चिकित्सा के लिए सरकारी तंत्र व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते महिलाओं की चिकित्सा का कोई प्रबंध नहीं है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने बताया कि बरसों से धौला पीएचसी में महिलाओं की डिलीवरी के लिए प्रसव कक्ष है।

बावजूद इसके महिला चिकित्सक नहीं होने के चलते गर्भवती महिलाओं, गंभीर बीमारियों से ग्रसित महिलाओं व अकस्मात बीमारियों से जूझ रही महिलाओं को चिकित्सा के लिए अचरोल, जयपुर, मनोहरपुर, शाहपुरा या जमवारामगढ़ जाना पड़ता है।

महिलाओं को चिकित्सा लेने के लिए एक और काफी तकलीफों का सामना करना पड़ता है वहीं दूसरी ओर समय व धन की बर्बादी के साथ आवागमन मे परेशानी का भी सामना करना पड़ता है।

महिला कार्यकर्ताओं ने बताया कि क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों में तो कुछ गांव ऐसे है, जहां एडपोस्ट सेंटर पर एएनएम भी नियमित रूप से नहीं बैठ पा रही है। इससे गर्भवती महिलाओं का समय पर टीकाकरण भी नहीं हो पा रहा है।

महिला चिकित्सक के प्रबंध को लेकर महिलाओं ने कई बार जनप्रतिनिधियों एवं विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया है, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

महिला डाॅक्टर की नियुक्ति हो तो मिले सुविधाएं

ग्राम भारती समिति गांधी वन की सचिव कुसुम जैन का कहना है कि धौला सहित आसपास की कई ग्राम पंचायतों में सरकार ने पीएचसी तो शुरु कर दी, लेकिन इनमें महिलाओं के लिए एक पीएचसी में भी महिला चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की गई। पुरुष चिकित्सकों को अपनी परेशानी बताने में ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं संकोच करती है। ऐसे में 30 से 40 किलोमीटर के दायरे की महिलाओं को प्रसूति एवं अन्य बीमारियों के इलाज के लिए दूर जाना पड़ रहा है। महिला गंगा देवी बुनकर का कहना है कि महिलाओं को प्रसूति के लिए अन्यत्र लेकर जाना पड़ता है। यहां महिला चिकित्सक नियुक्त हो अाैर रात्रि में स्टाफ रुके तो ग्रामीण अंचल की महिलाओं व रोगियों को चिकित्सा का लाभ मिल सकता है।

जिम्मेदारों के तर्क

धौला पीएचसी में भवन व अन्य सुविधाएं रोगियों के लिए उपलब्ध है। यदि विभाग महिला आयुष चिकित्सक की नियुक्ति कर दे तो महिला रोगियों को लाभ मिल सकेगा।
-डॉ.राजपाल सिंह मीणा,
चिकित्सा प्रभारी, धाैला पीएचसी

धौला पीएचसी सहित आसपास की पीएचसी में महिला चिकित्सक नहीं है। उच्च अधिकारियों को अवगत करवा रखा है। सरकार की चिकित्सा नीति के तहत जल्द ऐसी व्यवस्था होने पर महिला चिकित्सक का प्रबंध किया जाएगा।
-डॉ.एन.के.कोठीवाल,
ब्लॉक सीएमएचओ जमवारामगढ़

ग्रामीण अंचल में महिलाओं की चिकित्सा को लेकर सीएचसी स्तर पर महिला चिकित्सक के लिए प्रस्ताव बनाकर भिजवा रखा है। जब भी पीएचसी स्तर पर महिला चिकित्सक की नीतिगत व्यवस्था होगी तो पीएचसी में महिला चिकित्सक नियुक्त करवाएंगे।
-डॉ.नरोत्तम शर्मा, सीएमएचओ जयपुर

धौला| कस्बे का राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र।
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