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फोरलेन का काम फिर हो सकता है बंदमुआवजे को लेकर एसडीएम को चेतावनी
चार लेन निर्माण कार्य के दौरान मिलने वाले मुआवजे के मामले में अब किसानों ने आरपार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। दो वर्षों से बंद पड़े चार लेन का कार्य दो माह पूर्व शुरू हुआ था। लेकिन फिर से इस पर बंद होने के बादल मंडराने लगे हैं। किसानों की मांग है कि उनको उनकी जमीन पर लगे फलदार पेड़ों और अन्य वृक्षों का मुआवजा नहीं दिया गया और सड़क का निर्माण शुरू कर दिया गया है। ऐसे में भारी नाराजगी है, अब लोग इस काम को रोकने की चेतावनी दे रहे हैं।
बास्याखेड़ी और अरनिया गांव के किसानों और अधिकारियों और के बीच फिर से टकराव के हालात बन गए हैं। किसानों का कहना है कि हमारे साथ विश्वासघात हुआ है। मामले को लेकर गुरुवार को किसानों का प्रतिनिधिमंडल वीरेंद्र जैन के नेतृत्व में एसडीएम से मिला और उनको मुआवजा देने की बात कही। इसमें चेतावनी दी है कि अगर मुआवजा नहीं मिला तो कार्य को फिर से बंद कर दिया जाएगा।
मुआवजे को लेकर किसान क्यों नाराज हुए, यूं समझें पूरे मामले को
किसानों के अनुसार फोरलेन का काम बंद पड़ा हुआ था। जिसको चालू करवाने के लिए दीपावली के 2 दिन पूर्व उपखंड अधिकारी योजना के प्रोजेक्ट डायरेक्टर और किसानों के बीच आपसी बातचीत से सहमति बनी थी। इसमें तय हुआ कि उपखंड अधिकारी और प्रोजेक्ट डायरेक्टर द्वारा गठित पांच सदस्य दल सर्वे करेगा। जो किसानों को उनकी बाउंड्रीवाल, कुआं, फलदार वृक्ष, निर्माण सहित सभी मुआवजा दिया जाएगा। अपने वादे के अनुसार टीम अगले दिन किसानों के खेतों में पहुंची और किसानों के सामने किसानों के साथ ही पूरी टीम ने सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की और किसानों को आश्वस्त किया गया कि अब आपको उचित मुआवजा मिल जाएग। आप अब काम शुरू हो जाने दीजिए। इसके बाद हमने अफसरों से पर भरोसा किया और मुआवजे के आश्वासन पर काम शुरू हो जाने दिया। लंबा समय होने के बाद भी अब तक हमें मुआवजा नहीं मिल पाया है। अब तो प्रोजेक्ट डायरेक्टर मौके पर पेड़, कुएं होने से भी इनकार कर रहे हैं। जबकि, सर्वे में ये सारी चीजें लिखी गई थी। अब वे सर्वे को गलत बता रहे हैं। ऐसे में भारी आक्रोश है।
ग्रामीण बोले- सरकारी सर्वे को भी नहीं मान रहे अफसर
साब, काम नहीं रुका तो टकराव होगा
परेशान किसान गुरुवार को उपखंड अधिकारी के पास पहुंचे और उनसे चर्चा की। उनसे कहा कि कार्य को रुकवा कर पेड़ों की जड़ें दिखाई जाएं। उससे साबित होगा कि इस स्थान पर पेड़ थे। साथ ही किसानों ने चेतावनी भी दी कि आप के विश्वास पर यह काम शुरू हुआ था और अब हमारे साथ धोखा हो रहा है, वादाखिलाफी हो रही है, जिसे हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि आप इस काम को रोकें हम टकराव नहीं चाहते। जब तक हमारा मुआवजा नहीं आता वहां काम नहीं चलना चाहिए मिट्टी नहीं डालनी चाहिए।
हमने किसानों की बात को उच्चाधिकारियों तक भेज दिया है। वहा से निर्देश मिलने पर ही आगे की कार्रवाई होगी। मुआवजा बड़े अधिकारी तय करते हैं। पेड़ों के मुआवजे के लिए भी सर्वे टीम ही कार्य करती है। फिर भी जल्द समस्या का समाधान करवाने का प्रयास किया जाएगा।
-चिमनलाल मीणा, एसडीएम, रामगंजमंडी
रामगंजमंडी. खेतों को किया गया समतल।
रामगंजमंडी. किसानों का प्रतिनिधि मंडल एसडीएम से मिलने जाता हुआ।