पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • National
  • Rawatbhata News Rajasthan News Found In The 10th Century Shiva Temple In Badowli The Bharule39s Natraj Swarup Darshan

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

10वीं सदी में बने बाड़ौली के शिव मंदिर में मिलते हैं भोले के नटराज स्वरूप के दर्शन

2 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
अनोखे शिल्पकला और बेजोड़ डिजाइन से अलंकृत बाडौली मंदिर की प्रतिमाएं पूरे विश्व में प्रसिद्ध हैं। पुरातत्व महत्व के इस विश्व प्रसिद्ध मंदिर पर महाशिवरात्रि पर मेले का आयोजन होता है। यहां श्रद्धालु उमड़ते हैं। बाडौली के मंदिरों का समूह कोटा से लगभग 50 किमी दूर दक्षिण में चित्तौड़गढ़ जिले में रावतभाटा से मात्र 2 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यह बाडौली प्राचीन स्थापत्य कला की दृष्टि से राजस्थान का एक प्रसिद्ध स्थल है।

यहां स्थित मंदिर समूह का काल 8वीं से 11वीं शताब्दी तक का है। नवीं तथा दसवीं शताब्दी में यह स्थल शैव पूजा का एक प्रमुख केंद्र था, जिनमें शिव तथा शैव परिवार के अन्य देवताओं के मंदिर थे। यहां स्थित मंदिर समूह में नौ मंदिर हैं, जिनमें शिव, विष्णु, त्रिमूर्ति, वामन, महिषासुर मर्दिनी एवं गणेश मन्दिर आदि प्रमुख हैं। बाडौली के 9 मंदिरों में से आठ दो समूहों में हैं। मंदिर संख्या 1-3 जलाशय के पास हैं एवं अन्य पांच मंदिर इनसे कुछ दूर एक दीवार से घिरे अहाते में स्थित हैं, जबकि एक अन्य मंदिर उत्तर-पूर्व में लगभग आधा किलोमीटर दूर स्थित हैं। यहां के इस मंदिर समूह में शिव मंदिर प्रमुख हैं, जो घटेश्वर शिवालय के नाम से जाना जाता है। इस‍‌ मंदिर में शिव के नटराज स्वरूप को उत्कृष्टता से दिखाया गया है। यह उड़ीसा शैली के मंदिरों से मिलता-जुलता है। अलंकृत मंडप, तोरण द्वार, मूर्तियों की भंगिमाएं, लोच व प्रवाह, शिव का बलिष्ठ स्वरूप आदि इसकी विशिष्टता हैं।

ऐसा कहा जाता है कि मुगल शासक औरंगजेब ने भारत पर आक्रमण के दौरान बाडौली मंदिर की प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया था, लेकिन मंदिर की बेजोड़ शिल्पकला लोगों को आज भी अभिभूत करती है। यहां पर कर्नल टॉड द्वारा खोजे गए दो अभिलेखों में से कार्तिक सुदी द्वादशी संवत् 989 के एक अभिलेख में व्याकुलज द्वारा सिद्धेश्वर मंदिर के जीर्णोद्धार का उल्लेख मिला है, जबकि संवत 963 चैत्र सुदी 5 के दूसरे अभिलेख में व्याकुलज द्वारा ही शिव मंदिर के निर्माण का जिक्र किया गया है। मंदिर स्थापत्य कला में मुख्यतः चार भाग में विभाजित हैं-गर्भगृह, अंतराल, मुखमंडप व शिखर।

प्राचीन बाड़ौली मंदिर
राेमांच, कौतूहल नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है गुफाओं के पाड़ाझर महादेव
सुनसान जंगल, नैसर्गिक प्राकृतिक सौंदर्य, पहाड़ से खाई में उतरती सीढ़ियां, गर्मी में राेमांच पैदा करता पानी का धीमा मौन और बारिश के मौसम में कलकल बहते झरने के साथ गुफाओं में महादेव का पवित्र स्थान है पाड़ाझर महादेव। यहां 150 फीट घुमावदार गुफा में स्थापित है प्राकृतिक रूप से महादेव। रावतभाटा से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित पाड़ाझर महादेव मंदिर एक दार्शनिक स्थल है। लुहारिया कालाखेत मार्ग से और दूसरा मार्ग चेनपुरा, मंडेसरा मार्ग से पाड़ाझर महादेव जाया जा सकता है। महाशिवरात्रि पर यहां मेले का आयोजन होता है। रात्रि में भजन-कीर्तन का आयोजन होता है। पाड़ाझर महादेव मंदिर पर तीन दिवसीय मेला 4 मार्च से प्रारंभ होगा।

मुक्तेश्वर महादेव मंदिर पर उमड़ते हैं श्रद्धालु मुक्तेश्वर महादेव मंदिर राजस्थान परमाणु बिजलीघर की आवासीय कॉलोनी के मध्य बना है। यहां पर प्रतिदिन श्रद्धालु, पूजा-अर्चना करने के लिए आते हैं। महाशिवरात्रि एवं अन्य उत्सवों पर मंदिर में कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु उमड़ते हैं। कार्यक्रमों का आयोजन श्री मुक्तेश्वर महादेवालय समिति अणुकिरण कॉलोनी की ओर से किया जाता है।

5 शिवालय... महाशिवरात्रि पर उमड़ेंगे श्रद्धालु
रामगंजमंडी (कोटा जिला). रामगंजमंडी उपखंड का गांव जुल्मी अपने में ऐतिहासिक विरासत को सहेजे हुए है। गांव में ऐतिहासिक शिवालय हैं। एक शिवालय पर कुरान शरीफ की आयतें कौमी एकता की मिसाल देती है तो दूसरा शिवालय चतुर्मुखी है।

तीसरा शिवालय एक कुंड के किनारे स्थित है, वहीं चौथे शिवालय से लगी हुई मस्जिद की दीवार है। पांचवां शिवालय नीलकंठ महादेव के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर में पशुपतिनाथ की विशाल प्रतिमा भी है जो एक ही पत्थर पर उकेरी हुई शिल्पकला का अद्वितीय नमूना है। पूर्व सरपंच राधेश्याम गुप्ता ने बताया कि रियासतकाल में यहां खींची राजवंश का राज था, तब एक कुंड का निर्माण किया गया था। इतिहास साक्षी है कि इस कुंड में आज तक कोई व्यक्ति नहीं मरा। यदि कोई तैरने से अनजान व्यक्ति धोखे से भी गिर गया तो स्वयं तैरकर बाहर आया। इसी प्रकार राजवंश के महल के खंडहर आज भी अपने इतिहास की गाथा कहते हैं। झालावाड़ दरबार द्वारा यहां एक बाग का निर्माण भी करवाया गया था जो आज भी राज बाग के नाम से जाना जाता है। वहीं एक मंदिर का निर्माण भी करवाया, जिसमें लक्ष्मीनाथ भगवान की प्रतिमा विराजित है। इस मंदिर को राजमंदिर के नाम से जाना जाता है।

यह है इतिहास...
गांव के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य पंडित चंद्रप्रकाश शर्मा का कहना है कि मुगलकाल में जब महमूद गजनबी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला किया था, तब रास्ते में आने वाले सारे मंदिरों को क्षति पहुंचाई थी, किंतु वह जब उक्त शिवालय को क्षति नहीं पहुंचा पाया तो कुरान शरीफ की आयतें अंकित करा दी। इसका जीर्णोद्धार 25 वर्ष पूर्व कंपाउंडर रमेशचंद सक्सेना द्वारा करवाया गया था।

खबरें और भी हैं...

    आज का राशिफल

    मेष
    Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
    मेष|Aries

    पॉजिटिव- किसी भी लक्ष्य को अपने परिश्रम द्वारा हासिल करने में सक्षम रहेंगे। तथा ऊर्जा और आत्मविश्वास से परिपूर्ण दिन व्यतीत होगा। किसी शुभचिंतक का आशीर्वाद तथा शुभकामनाएं आपके लिए वरदान साबित होंगी। ...

    और पढ़ें