जीवन में मित्रता कृष्ण-सुदामा जैसी सच्ची होनी चाहिए:राघवेंद्र

Zila News News - भास्कर न्यूज | इटावा नगर के गैंता रोड पर चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा की शनिवार को पूर्णाहुति हो गई। कथा...

Mar 22, 2020, 07:45 AM IST

भास्कर न्यूज | इटावा

नगर के गैंता रोड पर चल रही संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा की शनिवार को पूर्णाहुति हो गई।

कथा के अंतिम दिन आचार्य राघवेंद्र कौशिक ने कहा कि मित्रता तो जीवन में सुदामा जैसी होनी चाहिए। सुदामा-कृष्ण भगवान के बीच की मित्रता ही श्रेष्ठ है। ऐसी मित्रता को जीवन में हमेशा निभाते रहना चाहिए।

कौशिक ने कहा कि श्रीकृष्ण भगवान सुदामाजी की याद में ऐसे रोए कि उनकी आंखों से रोते-रोते आंसुओं की झड़ी लग गई। ऐसी स्थिति में भगवान ने सुदामा के प्रति करुणा प्रकट की व अपनी मित्रता का फर्ज निभाते हुए सुदामा का जीवन बदला। कथा के दौरान कृष्ण-सुदामा मिलन का मार्मिक वर्णन सुनकर लोगों की आंखें भर आई। सुदामा के आने की खबर मिलते ही भगवान श्रीकृष्ण नंगे पैर दौडे चले आते हैं। अपने मित्र सुदामा की दीन दशा देखकर भगवान की आंखें में आंसू आ जाते हैं। वे उन्हें ले जाकर अपने सिंहासन पर बिठाते हैं और सेवा करते हैं।

कौशिक ने कहा कि आजकल लोग मित्र बनाने से पहले अपना स्वार्थ देखते हैं। उन्होंने कहा कि मित्रता भगवान से करो। श्रीकृष्ण से की गई मित्रता जीवन में सुखदाई होती है। कथा के समापन पर कल्याणराय सेवा समिति बड़ा मंदिर की ओर से आचार्य कौशिक का स्वागत कर सम्मान किया गया।

इस अवसर पर चंद्रमोहन शर्मा, राहुल शर्मा, हरिश शर्मा, रोहित जोशी, अध्यक्ष मुकेश शर्मा, प्रमोद कोठारी, धर्मेंद्र तिवारी, सत्यनारायण त्रिपाठी, ओम अनंत, घनश्याम शर्मा, राजेश शर्मा, नितिन, मनीष कोठारी, सरिन कौशिक, महिन शर्मा ने भागवत का पूजन अर्चन किया।

इटावा. कस्बे में भागवत के समापन पर कथा वाचक कौशिक सम्मान करते सदस्य।

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