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फाल्गुन में प्रकृति भी खेलती है होली

एक वर्ष पहले
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शाहपुरा|होली का नाम आते ही मन मंे उमंगों के कई रंग हिलोरे मारने लग जाते हंै। इस समय खेतों में कही पर फसल पककर सोने जैसी चमक बिखेर रही है तो कही पर पकाई नही होने से फसल हरी नजर आ रही है। खेतों में ऐसी दो प्रकार की फसल नजर आने ऐसा लगता है मानो प्रकति भी धरती माता से होली खेल रही है।

-मुकेश प्रजापत
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