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कोटपूतली क्षेत्र के 92 गांवों में 550 जगह जलाई होली
कोटपूतली तहसील के 92 गांवों में होली एवं धुलंडी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। करीब 550 जगहों पर ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से होलिका दहन किया। सोमवार को कस्बे सहित ग्रामीण क्षेत्रों में होली का दहन किया गया। दोपहर में महिलाओं ने होलिका दहन स्थल पर जाकर भक्त प्रहलाद की पूजा अर्चना की। गोधुलि बेला में ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से पूजा अर्चना कर होलिका दहन किया गया। देर रात तक ग्रामीण क्षेत्र में ढप एवं नगाड़े की ताल पर धमाल गाते हुए खूब मस्ती की। मंगलवार प्रात: युवा टोलियों के रूप में बुजुर्गाे से चरण छूकर आशीर्वाद, हम उम्र के लाेग गुलाल व पक्के रंग लगाकर डीजे की धुन पर नाचने में मशगूल दिखाई दिए। महिलाओं ने भी अपनी उम्र की महिलाओं
के रंग लगाकर होली की मस्ती का लुत्फ उठाया।
ग्राम खेड़की वीरभान, चतुर्भुज, शुक्लाबास में फूलडोल का मेला भरा। इसमें ग्रामीणों ने विभिन्न तरह के लोकगीतों व स्वांग का ढप, मंजीरों की ध्वनि पर नृत्य, धमाल विशेष आकर्षण का केन्द्र रहे। सबजेल में भी होली व धुलंडी का त्यौहार धूमधाम से मनाया गया। समाजसेवी रतनलाल शर्मा ने कैदियों को गुलाल लगाया। जेलर सुरेश चंद, महेश चंद तंवर, सत्येंद्र चौधरी, राजेंद्र चौधरी, संजय, राहुल आदि उपस्थित था। इसी प्रकार नारेहड़ा, खड़ब, सरुंड सहित अनेक गांवो में भक्त प्रहलाद की विधिवत पूजा अर्चना करने के बाद होलिका दहन किया गया। इस मौके पर नए धान की सिकाई करके सुख समृद्धि की कामनाएं की।
कंडों की होली में जलाया कपूर ताकि पर्यावरण शुद्ध हो : ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक जगह कंडों की होली का दहन किया। पंडित अनुज शास्त्री ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और पेडों की सुरक्षा के लिए गोबर के कंडों से होली जलाई गई। इसमें कपूर भी डाला गया। कपूर जलाने से पर्यावरण शुद्ध होता है और हवा में मौजूदा स्वाइन फ्लू और अन्य तरह के खतरनाक बैक्टीरिया नष्ट हो जाते है।