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बीडीएम अस्पताल में अवधि पार उपकरणों व रिजेंट से हो रही जांच, रिपोर्ट शक के घेरे में

एक वर्ष पहले
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सरकार निशुल्क जांच योजना पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है लेकिन यहां के राजकीय जिला स्तरीय बीडीएम अस्पताल मंे जांच अवधिपार ब्लड सैंपल टयूब (पीटीआईएनआर जांच की वाॅयल) व रिजेंट से की जा रही है। जैसे मे जांच रिपोर्ट की सत्यता पर भी सवाल उठने लगे हंै। ऐसा नहीं है कि बीडीएम अस्पताल प्रशासन को इसकी जानकारी नही हो। लैब टैक्निशयन ने अवधिपार ब्लड सैंपल टयूब (पीटीआईएनआर जांच की वाॅयल) व रिजेंट दिखने पर इसकी शिकायत प्रबंधन को की लेकिन कोई कार्रवाई नही हुई। ज्ञात हो कि दो दिन पहले बीडीएम अस्पताल मे आए जयपुर कलक्टर डा जोगाराम ने अस्पताल मे पसरी गंदगी व अव्यवस्थाओं को लेकर अस्पताल प्रशासन की मॉनीटरिंग पर नाराजगी जताई थी। लेकिन तीन दिन बाद भी हालात जस के तस है। गंदगी के बीच शुक्रवार को भी मरी जो का लाज बदस्तूर जारी रहा। जानकारी के अनुसार बीडीएम अस्पताल की लैब मे कहने को तो 17 लैब टैक्निशयन है लेकिन अवधिपार उप करणो व रिजेंट से मरी जो के खून की सैपलिंग लेना उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करना है। लेकिन अस्पताल प्रशासन इस और कोई ध्यान नही दे रहा है जानकारी के अनुसार 4 मार्च को आए तीन मरीज पूजा, सुमन व मुरारीलाल के खून के सैपलिंग पीटी आईएनआर जांच की वायल में लिए गए लेकिन जिस वायल मे सैपलिंग ली जा रही थी वे तीनों ही सैपलिंग के उप करणो की एक्सपायर अवधि नवंबर 2019 थी। यह जांच हॉर्ट डिजीज के लिए की जाती है। ऐसे में हॉर्ट मरी जो की जांच अवधिपार उप करणो में किया जाना हॉर्ट जैसी बीमारी के मरी जो के जीवन से खिलवाड़ करने जैसा है। इसी प्रकार बीडीएम अस्पताल में प्रतिदिन 20-24 व मरी जो की पीलिया रोग की जांच होती है। इस रोग में मरीज के ब्लड का सैंपल लेकर रिजेंट के माध्यम से जांच करनी होती है। लेकिन ये रिजेंट (ब्लूरिबन) भी अवधिपार ही है। इस जांच किट में 3 अलग अलग रिजेंट होती है। इन तीनों ही रिजेंट की एक्सपायरी दिनांक जनवरी 2020 लिखी है। इससे पहले भी अस्पताल की लैंब मे चिकनगुनिया किट के बिना ही जांच कर मरीज को रिपोर्ट दिए जाने पर अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालियां निशान लगे थे ।

लाखों की मशीनें डिब्बों मंे बंद, मरीज जा रहे निजी केंद्रों पर


लैब में लाखों की मशीन मिनरल्स जांच के लिए गैस एनलाइजर डिब्बे में बंद है जिसके चलते मरीजों की मिनरल जांच नही हो पा रही है। मरीज निजी केन्द्रों व जयपुर जाने को मजबूर है। इसी प्रकार जून 2018 मे यहां के बीडीएम अस्पताल की मोर्चरी के लिए लाखों की लागत से अज्ञात शवों के सुरक्षित रखने के लिए डी फ्रिजर आया था लेकिन वह भी बीडीएम अस्पताल के स्टोर मे बंद है। पुलिस को अज्ञात शवों को सुरक्षित रखने के लिए चंदवाजी निम्स अस्पताल की डिप फ्रीज मोर्चरी मे रखवाना पड़ता है । एसएचओ नरेन्द्र कुमार का कहना है कि अज्ञात शवों की शिनाख्त के लिए शवों को दो तीन दिन तक सुरक्षित रखना पड़ता है। यहां के अस्पताल मे डिप फ्रिज नहीं होने के कारण उन्हें चंदवाजी निम्स मंे जाना पड़ता है। जहां पुलिस का समय व धन का बेवजह अपव्यय होता है।


ये हंै जिम्मेदार: बीडीएम अस्पताल के लैब इंचार्ज रामोतार चौधरी है। लैब की मॉनिटरिंग का जिम्मा डॉ सुमन शर्मा के पास है। जबकि जिला स्तरीय बीडीएम अस्पताल के पीएमओ डॉ केएल मीणा पर पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी है। इस सबंध मे बीडीएम अस्पताल के उप नियंत्रक डॉ प्रमोद भादोरिया का कहना है कि डी फ्रीजर रखने के लिए जो मोर्चरी अस्पताल के पास उपलब्ध थी उसमें नही रखा जा सकता था अब नई मोर्चरी बनवाई जा रही है जिसके तैयार होते ही डी फ्रिजर को उसमे लगवा दिया जाएगा। वही अवधिपार ब्लड सैंपल टयूब मे मरी जो के सैंपल लेने के बारे मे पूछा तो उन्होंने बताया कि ऐसा उनकी जानकारी मे नही है यदि ऐसा है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

रहा। जानकारी के अनुसार बीडीएम अस्पताल की लैब मे कहने को तो 17 लैब टैक्निशयन है लेकिन अवधिपार उप करणो व रिजेंट से मरी जो के खून की सैपलिंग लेना उनकी जिंदगी से खिलवाड़ करना है। लेकिन अस्पताल प्रशासन इस और कोई ध्यान नही दे रहा है जानकारी के अनुसार 4 मार्च को आए तीन मरीज पूजा, सुमन व मुरारीलाल के खून के सैपलिंग पीटी आईएनआर जांच की वायल में लिए गए लेकिन जिस वायल मे सैपलिंग ली जा रही थी वे तीनों ही सैपलिंग के उप करणो की एक्सपायर अवधि नवंबर 2019 थी। यह जांच हॉर्ट डिजीज के लिए की जाती है। ऐसे में हॉर्ट मरी जो की जांच अवधिपार उप करणो में किया जाना हॉर्ट जैसी बीमारी के मरी जो के जीवन से खिलवाड़ करने जैसा है। इसी प्रकार बीडीएम अस्पताल में प्रतिदिन 20-24 व मरी जो की पीलिया रोग की जांच होती है। इस रोग में मरीज के ब्लड का सैंपल लेकर रिजेंट के माध्यम से जांच करनी होती है। लेकिन ये रिजेंट (ब्लूरिबन) भी अवधिपार ही है। इस जांच किट में 3 अलग अलग रिजेंट होती है। इन तीनों ही रिजेंट की एक्सपायरी दिनांक जनवरी 2020 लिखी है। इससे पहले भी अस्पताल की लैंब मे चिकनगुनिया किट के बिना ही जांच कर मरीज को रिपोर्ट दिए जाने पर अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालियां निशान लगे थे ।


काेटपूतली| बीडीएम अस्पताल की लेबोरेट्री में अस्त व्यस्त सामान व मशीनें।

काेटपूतली|जनवरी 2020 लिखी है। एक्सपायरी डेट लाल गाेले में।

काेटपूतली|एक्सपायरी डेट लाल गाेले में।
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