एमटी-3 बाघ के 90 मिनट चले ऑपरेशन में मुंह के पास मिले घाव, कीड़े निकले, रेडियो कॉलर बदला
मुकंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व में मंगलवार सुबह एमटी-3 बाघ के मुंह के पास मिले घाव में 12 से ज्यादा बड़े अाकार के कीड़े निकले हैं। 90 मिनट तक दरा फाॅरेस्ट एरिया में रणथंभौर टाइगर रिजर्व के सीनियर वैटरनरी डाॅ. राजीव गर्ग के सानिध्य में आई मेडिकल टीम ने ऑपरेशन कर दाे वैटरनरी डाॅक्टर के सानिध्य में ट्रीटमेंट किया गया।
करीब एक दर्जन कीड़े घाव में से निकले जाे छह से अाठ एमएम साइज के हैं। ऑपरेशन के बाद बाघ के हाेश में अाने के लिए इंजेक्शन लगाया। बाघ हाेश में अाते ही एक तरफ चला गया। डीसीएफ टी. माेहनराज ने बताया कि टीम ने निरीक्षण किया है। बाघ स्वस्थ है। अभी रिकवर हाेने में अभी एक सप्ताह से अधिक समय लगेगा। रेडियाे काॅलर भी ऑपरेशन टीम ने बदल दिया है। डाॅ. तेजेंद्रसिंह रियाड़ ने बताया कि बाघ के ब्लड अाैर सीरम सैंपल लिए हैं। सैंपल की जांच काेटा अाैर वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून में होगी।
लाइव: यूं चला अाॅपरेशन
एमटी-3 बाघ के मुंह के पास नाक के पास घाव में से खून की जानकारी 6 मार्च काे मिली थी। मामले की गंभीरता काे देखते हुए डीसीएफ डाॅ. टी माेहनराज ने रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अानंद माेहन के निर्देशानुसार सात मार्च काे वैटरनरी टीम काे माैके पर भिजवाया। यहां माॅनिटिरिंग टीम ने बाघ के पगमार्क के अाधार पर ट्रेकिंग करते हुए ट्रेक पर खून के धब्जे नजर अाए। इस दाैरान डाॅ. तेजेंद्रिसंह ने बल्ड का अब्जर्वेशन किया। इसमें कीड़े की पुष्टि हुई। मामले की गंभीरता काे लेते हुए डीसीएफ डाॅ. टी माेहनराज ने रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर अानंद माेहन अाैर चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन काे सूचित कर अावश्यक कार्रवाई के लिए मार्गदर्शन मांगा। माैखिक निर्देश के बाद 9 मार्च काे टाइगर सर्चिंग ऑपरेशन किया। लेकिन, इस दिन ट्रेंक्युलाइज नहीं हुअा। अगले दिन 10 मार्च सुबह 5 बजे ट्रेंक्युलाइज की प्राेसेस शुरू हुअा। फाॅरेस्ट गार्ड विनाेद मीणा की सूचना पर सूचना के बाद सुबह 5 बजकर 40 मिनट पर टाइगर की साइटिंग हुई। 6 बजकर 15 मिनट पर डाॅ. गर्ग के सानिध्य में ट्रेंक्युलाइज के लिए रणथंभौर से अाए टीम मैंबर राजवीर अर्लट रहा। सुबह 6 बजकर 36 मिनट पर करीब 20 मीटर की दूरी से एक डाॅर्ट से गन शाॅट मारा। इसके बाद डाॅर्ट लगते ही बाघ उछलकर दाैड़ा अाैर बेहाेश हाे गया। इसके बाद सुबह 6 बजकर 36 मिनट से सुबह 8 बजकर 6 मिनट तक यानी कुल 90 मिनट तक ऑपरेशन पूरा हुअा। साथ ही हैल्थ चेक-अप भी किया गया। हाेश में लाने के लिए इसके इंजेक्शन लगाया। सुबह साढ़े अाठ बजकर छह मिनट पर हाेश अाया। सुबह 8 बजकर 13 मिनट पर बजे हाेश अाने के बाद बाघ दाैड़कर एक तरफ चला गया। एहतियात के ताैर पर डिहाइड्रेशन की अाशंका काे देखते हुए बर्फ की सिल्ली भी मंगवाई थी। टीम में डाॅ. तेजेंद्रसिंह रियाड़ के अलावा डाॅ. अखिलेश पांडे, मशालपुरा रेंजर नवनीत शर्मा माैजूद रहे। बाघ की माॅनिटिरिंग के लिए डाॅ. रियाड़ काे पाबंद किया गया है।
फाॅरेस्टर माेरपाल की सूझबूझ आई काम
दरा रेंज में एमटी-3 की ट्रेकिंग के दाैरान फाॅरेस्टर माेरपाल काे मुंह के बाहर खून नजर अाया। इसकी सूचना तत्काल उच्चाधिकारियाें काे दी। इसके बाद तत्काल अधिकारियाें काे अलर्ट किया। कैमरा ट्रेप में पुष्टि हाेने के बाद अागे की प्राेसेस हुई। यदि इस मामले में ढिलाई हाेती ताे इसमें कीड़े की संख्या में बढ़ाेतरी के साथ बाघ काे सेप्टीसीमिया के साथ गंभीर की संभावना हाे सकती थी।
शिकारियाें की अाशंका से किया इनकार
रिजर्व के डीसीएफ डाॅ. टी माेहनराज ने बताया कि एमटी-3 बाघ वाले मामले में शिकारियाें की अाशंका नहीं है। उन्हाेंने इस संंबंध में इनकार किया है। वहीं, दूसरी अाेर एमटी-3 बाघ अाैर एमटी-4 बाघ के बीच संघर्ष या अन्य काेई वन्यजीव के संघर्ष से चाेट की अाशंका है। उन्हाेंने शिकार के मामले में पूरी तरह से छानबीन करवा दी है। किसी भी तरह के सबूत नहीं मिले हैं।
एमटी-3 बाघ का ऑपरेशन करती चिकित्सा टीम। ऑपरेशन के दौरान 12 से ज्यादा बड़े घाव डॉक्टरों को मिले हैं।
रणथंभाैर से मंगवाए रेडियाे काॅलर लगाया
एमटी-3 बाघ के खराब हुए रेडियाे काॅलर काे भी ऑपरेशन के दाैरान बदला गया। इसके रेडियाे काॅलर लगाने के लिए रणथंभौर से मंगवाया गया। जांच के बाद नया रेडियाे काॅलर की जांच की। वहीं, पुराने रेडियाे काॅलर गारंटी का हाेने से इसे भिजवाया जाएगा।
मोरपाल
9 मार्च को प्रकाशित
बाघ के सिर में इस जगह से निकले बड़े आकार के कीड़े।