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न्हाण अखाड़ा चौबेपाड़ा की आज निकलेगी बारह भाले की सवारी
न्हाण अखाड़ा चौबे पाड़े की रंगत रविवार को मुख्य मार्गों से हाेकर निकलने वाली बारह भाले की सवारी के साथ फिर जमेगी। बारह भाले की सवारी के बाद खाड़ा स्थल पर रातभर सांस्कृतिक कार्यक्रम चलेंगे। वहीं सोमवार तड़के पांच बजे देवीय स्वरूप भवानी की सवारी निकलेगी। इसी दिन शाम को बादशाह की सवारी के साथ ऐतिहासिक न्हाण का समापन होगा।
न्हाण में रविवार को बारह भाले की सवारी यहां मुख्य परम्परागत मार्गों से होकर निकलेगी। इसमें उमराव, स्वांग व अन्य कई कलाकार शामिल होंगे। जो हास परिहास करते हुए निकलेंगे। इसी दिन रात्रि को खाड़ा स्थल पर रात्रिकालीन न्हाण का आयोजन हाेगा। इसके बाद साेमवार तड़के पांच बजे देवी देवताओं की भवानी की सवारी मुख्य मार्गो से होकर निकलेगी। इसके बाद शाम को यहां बादशाह की सवारी के साथ पांच दिवसीय न्हाण का समापन होगा।
शनिवार को पड़त के दिन सांगा पटेल की भव्य शोभा यात्रा निकली। सांगा पाड़ा स्थल सांगाजी के मंदिर से गाजे बाजे के साथ शोभायात्रा शुरू हुई। यहां सांगाजी की विधि विधान पूर्वक पूजा-अर्चना की गई। शोभायात्रा मैन बाजार, सब्जीमंडी रोड, कोटा मार्ग, कुम्हार पाड़ा से होते हुए वापस सांगा माेहल्ले में पहुंची। जहां प्रसाद वितरण के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ। सांगाजी की शोभायात्रा के दौरान उत्साही युवक नृत्य करते हुए चल रहे थे। डीजे की धुन पर किन्नरों ने भी पूरे मार्ग पर लोगों का उत्साह बढ़ाया।
बपावर में लाल्या तारा पूजन के साथ न्हाण का अागाज: बपावर. कस्बे में शुक्रवार रात परंपरागत तरीके से लाल्या तारा स्मारक की पूजा-अर्चना कर ढाेल नगाडाें की धुन के बीच न्हाण लाेकाेत्सव का अागाज किया गया है। जिसमें न्हाण खिलाडाें अाैर लोकोत्सव प्रेमियाें ने भाग लिया। न्हाण पटेल चंद्रप्रकाश पांचाल व मनीष गाैड ने बताया कि ग्रामीणों की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लेकर तीन दिवसीय न्हाण लाेकाेत्सव की रूपरेखा तैयार की गई। जिसके अनुसार शनिवार की रात काे बासन का जुलूस निकाला गया। रविवार रात के न्हाण के अायाेजन में कई कार्यक्रमाें के अलावा मां भवानी की सवारी का जुलूस निकलेगा। सोमवार काे दिन में बादशाह की सवारी के साथ कई उमराव का जुलूस निकलेगा। रात के न्हाण में चाचा बाेरा की बारात का जुलूस, लाेहाराें का माैसाला व अन्य मनाेरंजक कार्यक्रम होंगे। भाेर के समय मां दुर्गा की झांकियाें का जुलूस निकाला जाएगा।
न्हाण में अाज भी कायम है एक ही परिवार की बादशाहत
सांगोद| राजा-महाराजाओं का शासन भले ही खत्म हो चुका है, लेकिन कस्बे के पांच दिवसीय ऐतिहासिक लोकानुरंजन न्हाण में अभी तक बादशाहत पूरे रौब व शान शौकत के साथ कायम है। न्हाण अखाड़ा चौबे पाड़ा खाड़ा में तीसरी पीढ़ी के पांचवें सदस्य के तौर पर न्हाण की बादशाहत की रस्म मेडिकल कारोबारी अनिल चतुर्वेदी निभा रहे हैं। एक दिन की बादशाह के नाम पर यह परिवार पिछले कई वर्षों से 50 हजार से लेकर 80 हजार रुपए का खर्च बादशाहत की ड्रेस, हाथी व महफिल के नाम पर खुद वहन करता आ रहा है।
वहीं बादशाह की सवारी के दिन उन्हें नहलाने के लिए पानी भरने, नहलाने, बादशाह की ढ़ाडी, कटिंग व वर्जिश आदि करने के लिए कुम्हार, नाई व घर से हाथी पर सवार होने तक डोल बाजे आदि की रस्में यहां निभाई जाती है। बादशाह की सवारी में कितने भी स्वांग, उमराव व कलाकार हो, वो सब बादशाह को सलामी देते हैं। इसकी एवज में बादशाह उन्हें इनाम स्वरूप रुपए देते हैं। बादशाह की सवारी के बाद उनके आवास पर महफिल भी सजती है, जिसमें राजा रजवाड़े की तरह जश्न मनाया जाता है। ये शाही तस्वीर केवल आपको सांगोद के न्हाण की बादशाह की सवारी के दरम्यान दिखाई देगी।
कस्बे में मनाए जाने वाले न्हाण में बादशाह की हुकूमत आज भी कायम है। बादशाह पूरे शान व शौकत हाथी पर सवार हाेकर पूरे स्वर्णाभूषण जड़ित गहनों से लदे निकलते हैं। उनका पहनावा भी पूरी तरह से बादशाह की तरह होता है। चमकदार शेरवानी व पायजामा, कमर में दुपट्टा अाैर हाथ में सोने की मुठीबंद तलवार, हाथी पर बंधी पालकी के पीछे कुर्सी लगाएं बैठा एक व्यक्ति बादशाह के चंवर से हवा उड़ाता चलता है। न्हाण अखाड़ा चौबे पाड़ा के न्हाण में एक ही परिवार की बादशाहत कायम हैं। इस परिवार की तीसरी पीढ़ी के पांचवें सदस्य अनिल चतुर्वेदी पिछले वर्ष से ये रस्म निभा रहे हैं। इससे पहले उनके परदादा फून्दीलाल चतुर्वेदी, पुरूषोत्तम चतुर्वेदी, यादराम चतुर्वेदी, विक्रम चतुर्वेदी बादशाह बनते रहे हैं। अनिल मेडिकल कारोबारी हैं अाैर कोटा में रहते हैं, लेकिन न्हाण में उनकी बादशाहत सांगोद में चलती है। न्हाण के दिन उन्हें सभी काम छोडकर यहां आना होता है। भले ही वो एक दिन के लिए बादशाह बनते हैं, लेकिन उपखंड के गांवों में उन्हें लोग बादशाह के नाम से ही पहचानते हैं अाैर पुकारते हैं।
पहले एक बनता था बादशाह: खाड़े पक्ष के शिवकांत शर्मा, पटेल गिरिराज शर्मा, चतुर्भुज सेन, धनराज शर्मा, मनोज नाटाणी, मुकेश शुक्ला बताते हैं कि कस्बे का न्हाण राजा रजवाड़े से जुड़ा हुआ है। पहले सांगोद में एक ही न्हाण भरता था। इस कारण बादशाह भी एक ही बनता था। बाद में जगह को लेकर वाद विवाद हुआ तो ये मामला दिल्ली के दरबार तक जा पहुंचा। वहां से हुक्मराना आया तो एक को बाजार व दूसरे को खाड़े के रूप में न्हाण करने के लिए जगह दी गई। तभी से ये न्हाण दो धड़ों में बंटकर अलग-अलग भरने लगा। इस कारण अब बादशाह भी एक की जगह दो बनने लगे। बाजार पक्ष में पहले चाचा शकूर बादशाह बनते थे। उनके बाद रामबाबू सोनी बादशाह बनते आ रहे हैं। वहीं खाड़े पक्ष से तीसरी पीढ़ी के पांचवें सदस्य अनिल ये परम्परा निभा रहे हैं।
महफिल से लेकर बधाइयां गाने तक की परंपरा कायम: बादशाह की सवारी मुख्य मार्गों से होकर निकलती है। शाही ठाटबाट व बादशाह जैसे परिधानों से सजे धजे बादशाह हाथी पर निकलते हैं। इससे पहले बादशाह के घर महिलाएं होली खेलने जाती है। इसके बाद बादशाह को नहलाने के लिए पानी भरने व उनकी दाढ़ी से लेकर कटिंग तक करने के लिए नाई, कुम्हार जाति के लोग जाते हैं। वहीं घर से उन्हें डोल नगाडा़ें के बीच निकालकर हाथी पर बिठाया जाता है। इसकी एवज में बादशाह उन्हें इनाम देते हैं। न्हाण सवारी में बादशाह को स्वांग व उमराव सलामी देने का रिवाज आज भी यहां कायम है।
सांगोद. न्हाण अखाड़ा चौबेपाड़ा में बादशाह बने अनिल चतुर्वेदी।
सांगोद. अनिल चतुर्वेदी।