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सरपंच के खिलाफ लंबित शिकायत में कार्रवाई के आदेश

3 वर्ष पहले
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कार्यालय संवाददाता | शाहपुरा

सरपंच पद का दुरुपयोग कर निर्माण कार्यों में अनियमितता बरतने के मामले में दोषी ठहराए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं करने पर उच्च न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई कर पंचायतीराज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त, जयपुर के संभागीय आयुक्त, जिला परिषद के सीईओ एवं शाहपुरा पंचायत समिति के विकास अधिकारी को प्रकरण की 90 दिन में जांच कार्रवाई कर उसका निस्तारण करने के आदेश दिए। अधिवक्ता संदीप कलवानिया ने बताया कि गौरीशंकर पलसानियां ने ग्राम पंचायत चिमनपुरा के सरपंच दीपेंद्र कुमार बुनकर, तत्कालीन पंचायत प्रसार अधिकारी भागीरथ प्रसाद सैनी एवं सचिव रामस्वरूप बंदरवाल के खिलाफ पद का दुरुपयोग कर विभिन्न निर्माण कार्यों में अनियमितता बरतने एवं नियम विरुद्ध पट्टे जारी करने की शिकायत लोकायुक्त सचिवालय में दर्ज करवाई थी। लोकायुक्त सचिवालय के संयुक्त सचिव ने जिला परिषद के सीईओ को शिकायत की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए। लोकायुक्त सचिवालय एवं जिला परिषद के सीईओ के निर्देश पर शाहपुरा बीडीअो ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई। इसने सरपंच एवं ग्राम सेवक पर निजी खातेदारी की भूमि में निर्माण कार्य कराने एवं अनियमितता बरती जाना पाया। सरपंच दीपेंद्र कुमार से 1 लाख 22 हजार 467 रुपए, सचिव रामस्वरूप बन्दरवाल से 1 लाख 22 हजार 467 एवं पंचायत प्रसार अधिकारी भागीरथ प्रसाद सैनी से 1 लाख 16 हजार 890 रुपए की राशि की वसूली निकाली है। ग्राम पंचायत की ओर से जारी किए गए 33 पट्टों को भी नियम विरुद्ध मानकर निरस्त योग्य माना है।

ग्राम पंचायत ने नियमों की अवहेलना कर चहेते लोगों को पट्टे जारी किए थे। जांच रिपोर्ट में आरोप साबित होने के बाद प्रार्थी ने पंचायतीराज विभाग के शासन सचिव को ज्ञापन देकर दीपेंद्र कुमार को सरपंच पद से हटाने की गुहार लगाई, लेकिन विभाग ने न तो सरपंच के खिलाफ कार्रवाई की और न ही राशि की वसूली की। जिम्मेदार अधिकारी पट्टे भी निरस्त नहीं कर रहे है और दोषियों को बचाने का प्रयास कर रहे है। अधिवक्ता संदीप कलवानिया ने बताया कि राजस्थान पंचायती राज अधिनियम की धारा 38 में पंचायती राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों के जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई करने का प्रावधान है। जांच में सरपंच को दोषी ठहराए जा चुके है और पद का दुरुपयोग करने के आरोप साबित हो चुके है। राज्य सरकार सरपंच पद से नहीं हटा रही है जबकि पंचायतीराज विभाग ने एक परिपत्र जारी कर रखा है। इसमें 90 दिन में जांच कर निस्तारण करने के निर्देश दे रखे है। प्रार्थी ने याचिका को स्वीकार कर दोषी सरपंच पर पंचायती राज अधिनियम एवं विभागीय परिपत्रों के निर्देशों की पालना में कार्रवाई की गुहार लगाई थी।

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