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राजस्थान अधिवक्ता कल्याण निधि अधिनियम- 2020 को पुन: संशोधित किए जाने की गुहार

एक वर्ष पहले
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भाजपा विधि प्रकोष्ठ के कार्यकर्ताओं ने जिला संयोजक सुरेन्द्र चौधरी के नेतृत्व में गुरुवार को एसडीएम नानूराम सैनी को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर राज्य सरकार के हाल ही पारित किए राजस्थान अधिवक्ता कल्याण निधि (संशोधन) अधिनियम 2020 को पुन: संशोधित किए जाने की मांग की। ज्ञापन में विधानसभा संयोजक उदयसिंह तंवर, राजेन्द्र रहीसा, नगर संयोजक अजय सोनी, देवेन्द्र कुमार आर्य, देवेन्द्र रावत, मधु वर्मा, राकेश शर्मा, दिनेश अग्रवाल, बद्री प्रसाद गुर्जर, वीरू कसाना, रामलाल कसाना, अरुण चौधरी, सूर्यकान्त अग्रवाल, विक्रान्त सैन, विकास जांगल, हीरालाल रावत, राजाराम रावत, सुनील प्रजापति, महेश कसाना, हरचन्द दहमीवाल, आजाद सोनी,ओमप्रकाश गुर्जर,

बाबूलाल आर्य, अशोक आर्य व शिवकुमार गुप्ता ने पांच सूत्रीय ज्ञापन साैंपा। बताया कि बार काउसिंल ऑफ राजस्थान ने 23 फरवरी 2019 को सामान्य बैठक में राजस्थान अधिवक्ता कल्याण निधि अधिनियम- 1987 में संशोधन के लिए प्रस्ताव पारित करते हुए इस क्रम में क्रमश: 18 अप्रैल 2019 व 8 मई 2019 को विधि सचिव से अधिनियम में संशोधन करने के लिए निवेदन किया था। जिस पर राज्य सरकार ने राजस्थान अधिवक्ता कल्याण निधि (संशोधन) अधिनियम 2020 को पारित किया गया।

इसमें अधिवक्ता कल्याण निधि सदस्य बनने के लिए आजीवन सदस्यता शुल्क को 17 हजार 500 से बढ़ाकर 1 लाख किया गया। इसमें केवल 30 हजार की वृद्धि का प्रस्ताव दिया गया था। ज्ञापन में उक्त राशि को पुन: कम करने, सामान्य बीमारी पर सहायता एक से बढ़ाकर तीन लाख किए जाने, गंभीर बीमारी पर सहायता राशि को तीन से बढ़ाकर आठ लाख किए जाने, वकालतनामा की राशि कम किए जाने, नए अधिवक्ताओं के लिए स्टायफंड बनाने, अधिवक्ता कल्याण निधि में राज्य सरकार का अंशदान बजट के माध्यम से करवाने, अधिवक्ताओं को प्लॉट व आवास देने के लिए राज्य सरकार की तय 5 प्रतिशत की आरक्षित दर का क्रियान्वयन करवाने की मांग की गई। इसी प्रकार लोकतांत्रिक जनता दल के प्रदेश प्रवक्ता विकास अग्रवाल, अधिवक्ता प्रेमवीर सिंह मीणा ने भी राज्यपाल के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर राजस्थान अधिवक्ता कल्याण निधि अधिनियम-2020 को पुन: संशोधित किए जाने की मांग की है।
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