सूखनी नदी में उफान से कोटा-इटावा मार्ग अवरुद्ध

Zila News News - चम्बल नदी के बांधों से लगातार हो रही पानी की निकासी के चलते इटावा क्षेत्र में जनजीवन प्रभावित हो गया है। चम्बल,...

Sep 15, 2019, 08:32 AM IST
चम्बल नदी के बांधों से लगातार हो रही पानी की निकासी के चलते इटावा क्षेत्र में जनजीवन प्रभावित हो गया है। चम्बल, पार्वती अाैर कालीसिंध नदियां लगातार उफान पर हैं। कालीसिंध नदी उफान पर होने से इटावा की सूखनी नदी में भी पानी की भारी आवक हुई है। सूखनी नदी की पुलिया पर शाम तक करीब 6 फिट की चादर चल रही है।

तेजी से बढ़ते जलस्तर के कारण लोगों मंे बाढ़ का भय बना हुआ है। निचली बस्तियों के रहवासियों ने मकानों में रखे सामानों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना शुरू कर दिया है। वही कालीसिंध की ढिपरी पुलिया पर 22 ओर पार्वती नदी की खातोली पुलिया पर 20 फिट पानी की चादर चल रही है। जिसके चलते इटावा कोटा श्योपुर मार्ग छठे दिन भी बाधित रहा। वही क्षेत्र में तीनों नदियों में लगातार बढ़ रहे जलस्तर के कारण नदियों के किनारे के गावँ में प्रशासन ने सतर्क रहने की मुनादी करवाई है। क्षेत्र में नारायणपुरा , कीरपुरिया , राजपुरा सहित करीब आधा दर्जन गाँव टापू में तब्दील हो गए हैं।

डीएसपी सुरेंद्र शर्मा, तहसीलदार रामचरण मीणा सहित प्रशासनिक अधिकारियाें ने लगातार नदियों के किनारे के गांव का दौरा किया। बंबुलियाकला पंचायत पर राजपुरा रोड पर नदी के तेज बहाव में एक ट्रैक्टर फस गया और डूब गया। समय रहते चालक ने कूदकर जान बचाई।

ग्रामीण दीपक नायक व राकेश मीणा के अनुसार राजपुरा निवासी बबलू मीणा अपने ट्रैक्टर को नाले पर निकाल रहा था। अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया और पानी के तेज बहाव में चला गया। पानी की तेज आवक से राजपुरा, रघुनाथपुरा का रास्ता बंद है। जिससे लोगो को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बपावर. परवन नदी के उफान का जाेश पिछले 2 दिन से थमने का नाम नहीं ले रहा। अावागमन पूर्णतया अवरुद्ध हाेने से लाेगाें काे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पुलिया के दाेनाें तरफ वाहनाें की लंबी कतारें लगी हैं। इसमे हेवी लाेडिंग वाहन चालकाें की शामत अाई हुई है|उठने बैठने अाैर खाने पीने के लिए इधर उधर भटकना पड रहा है। बपावर खुर्द की स्वयंसेवी अापदा प्रबंधन रेस्क्यू टीम के राेहताश मीणा, सीताराम, शंभू सिंह, अाेम मीणा सहित कुछ अन्य समाज सेवकाें ने बताया कि ब्रहस्पतिवार काे रात 2 बजे जब पुलिया पर पानी फिरा ताे हमारी टीम के लाेग यहीं माैजूद थे|इस दाैरान हमने जबरदस्ती जान जाेखिम में डालने वाले वाहन चालकाें काे खदेडा। इसके बाद से वाहनाें की लंबी लाइनें लगी है। पुलिया का पानी शुक्रवार की रात 12 बजे थाेडी देर कम हाेने के बाद फिर 3 फुट के स्तर पर शनिवार देर शाम तक जारी है।

गणेशगंज . ढीपरी व बड़ोद काली सिंध नदी की बड़ी पुलिया पर शनिवार को 25 फिट पानी की चादर चली। जलेश्वर महादेव मंदिर में पानी भर गया। सूखनी नदी में भी पानी की भारी आवक होने से पुलिया पर 5 फिट पानी से अधिक की चादर चली। गणेशगंज - इटावा, खतौली, करवाड़, गैता, सहित अन्य कई गांवों का शुक्रवार को कई गांँवो का सम्पर्क कंट गया। खातौली पार्वती नदी के पुल पर भी पिछले 5 दिनों से पानी की आवक अधिक होने मध्यप्रदेश का भी राजस्थान से सम्पर्क कटा हुआ है। किसानों की फसलें भी बर्बाद हुई है। ढीपरी कालीसिंध से लेकर कोलाना, खेड़ली राजा, बिजावता, रनोदिया, गोणदी सहित अन्य कहीं गांव में हजारों बीघा उड़द, सोयाबीन, ज्वार, वह अन्य कहीं फसलें इस बरसात से प्रभावित हुई है। किसानों ने प्रशासनिक अधिकारियों से सर्वे करवाकर मुआवजे की मांग की। नदी में वाहनों को नदी में पार कराने वालों को कोई रोकने वाला तक नही था।

अरु नदी में उफान से मार्ग बंद

कनवास. लगातार बारिश के चलते अरु नदी में उफान से कनवास से सांगोद खानपुर इकलेरा मार्ग बंद रहा। शुक्रवार सुबह 7 बजे से ही वाहनों की कतारें लगी रही। वाहन चालकों ने खाना बनाने की सामग्री निकालकर ट्रक के नीचे बैठकर खाना बनाया। सावनभादों बांध फुल हो जाने से दरा मन्डाना तक का बरसात का पानी बांध में आ जाता है। मसानी पुलिया पर 2 फीट पानी होने के बावजूद एक वाहन चालक ने निकलने की कोशिश की तो ट्रोला पुलिया के बीच गड्ढे में फस गया। सीमेंट के भरे हुए ट्रक को चालक ने निकालने की कोशिश की, लेकिन ट्रक बीच पुलिया पर जाकर रुक गया।

किसानों की मुआवजे की मांग

सुल्तानपुर। पिछले तीन-चार दिन से लगातार रुक-रुक कर हो रही तेज बारिश ने हर तरफ कोहराम मचाया हुआ है। नदी नाले उफान पर है। बारिश का पानी खेतों में भर गया। जिससे सोयाबीन, उड़द की फसलें पूरी तरह नष्ट हो चुकी हैं। सुरेला के खुमान सिंह नरूका व श्याम मीणा ने बताया कि बारिश होने की वजह से खेतों में पानी भर गया है जिससे अब उनकी फसलें पूर्ण रूप से नष्ट होने लगी है। मंडावरा के कन्हैयालाल गुर्जर ने बताया कि इसी तरह अगर तेज बारिश होती रही तो फसलें पूर्ण रूप से नष्ट हो जाएंगी। जालिमपुरा पंचायत के रामकल्याण मीणा, रामस्वरूप बैरवा ने बताया कि पिछले 15 दिन पहले हुई बरसात से भी फसलों को नुकसान हुआ है और अब इन दिनों हुई तेज बारिश से फसलें पूर्णतया नष्ट हो गई है। उधर जगदीश गोड़ ने बताया कि तोरण के माल में बारिश से फसलें तो नष्ट हो ही रही है। कीड़े लगने से भी फसलें नष्ट होती जा रही है। किसानों ने मुआवजे की मांग की है।

गोदल्याहेडी. क्षेत्र में इस बार उड़द काे बारिश ने तबाह कर दिया। किसानों ने बताया कि इस समय खेतों में फसल कटने लगती है, लेकिन इस बार तो फसल कटाई के समय सावन महीने जैसी बारिश का दौर चल रहा है। सोयाबीन, उड़द की फलियों में बीज अंकुरित होने लगे हैं। गोदल्याहेडी गांव में 1 महीने बाद भी उड़द खराबे का सर्वे नही किया गया। किसानों ने फसलो का सर्वे की मांग की है।

सोयाबीन में फलियां वर्षा के चलते पौधों से टूटकर गिरने लगी

अयाना . कस्बे सहित क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। लगातार वर्षा होने से फसल नष्ट हो चुकी है। सोयाबीन में फलियां वर्षा के चलते पौधों से टूटकर गिरने लगी है। किसानों ने बताया कि पहले तो खेतों में सोयाबीन की बुवाई के बाद कई दिनों तक वर्षा नहीं होने से बीज खराब हो जाने से दोबारा किसानों ने बुवाई की थी, अब किसानों के अरमानों पर रोज आफत की बरसात हो रही है। इससे किसानों में मायूसी छाई हुई है किसानों ने सरकार से सर्वे करवाकर बीमा कंपनियों से किसानों को आर्थिक सहायता राशि देने की मांग की है। चाणदा गांव में आधे घंटे तक सुबह मूसलाधार वर्षा होने से खेतों में बरसाती पानी भर गया। लगातार हो रही वर्षा से राजस्थान राज्य व मध्य प्रदेश राज्य के बॉर्डर पर स्थित श्योपुर व बारां जिले को हाईवे राजमार्ग से जोड़ने वाली सूरथाक पुलिया दूसरे दिन भी शनिवार को करीब 15 फीट पानी रहने से आवागमन बंद रहा। इटावा सूखनी नदी में सुबह 6: 00 बजे से 9: 00 बजे तक पानी की आवक कम रहने से पैदल ही राहगीरों ने नदी पार की इस दौरान नदी पार करने पर इटावा की तरफ पहुंचने पर इटावा पुलिस थाने का जाब्ता तैनात रहने से उधर से लोगों को नदी पार नहीं करने दिया जा रहा था। गणेशगंज की तरफ से इटावा जाने के लिए कोई रोक-टोक नहीं थी पुलिस जाब्ता मौजूद नहीं होने से हर कोई व्यक्ति नदी पार कर रहा था।

जीएसएस परिसर में पानी भरा

मोईकलां. जीएसएस परिसर में 2 फीट से अधिक गहरे पानी से होकर कर्मचारी बिजली को बंद या चालू करने जाते हैं। कस्बे के मुक्तिधाम मार्ग पर स्थित 33 केवी जीएसएस परिसर में हल्की बारिश के साथ ही पानी भर जाता है। करीब एक माह से भरा पानी कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दिन हो या रात बिजली कर्मचारी करीब दो फीट से अधिक पानी से होकर बिजली चालू-बंद करने जाते हैं। ऐसा भी नही है कि कर्मचारियों की इस जानलेवा समस्या से उनको अवगत नही कराया गया हो। कई बार समस्या बताने के बाद भी अधिकारियों ने समस्या को गंभीरता से नहीं लिया। पवन कुमार मालव, कनिष्ठ अभियंता ने बताया कि यह बात बिल्कुल सही है कि मोईकलां जीएसएस परिसर में काफी पानी भरा रहता है। यह समस्या हम मुख्य अभियंता तक पहुंचा चुके हैं। जैसे ही बजट स्वीकृत हो जाएगा वहा पर कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।

दीगोद. बालाजी मदिर के पास नाले की सफाई नहीं होने से पानी का निकास नहीं हो रहा। कचरा भर गया।

सीमल्या क्षेत्र में सोयाबीन, उड़द की फसलों में नुकसान

सीमल्या . क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। बारिश से सोयाबीन की फसलें पकने के बाद दुबारा अंकुरित होने लगी हैं। भुवनेश नागर, बद्री, नागर, पोलाई के कमलेश मालव सहित अन्य किसानों ने बताया कि सोयाबीन, उड़द की फसल हाड़तोड़ मेहनत के बाद फसल तैयार होने से हमें कई उम्मीदें थी, लेकिन बारिश से सोयाबीन की फसल पकने के बाद खेतों में ही दुबारा उग जाने के चलते फसलों में नुकसान होने से फसल खराब होने के चलते आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है। सीमल्या कस्बे सहित कल्याणपूरा, गड़ेपान, भौरा, पोलाई, बम्बोरी, बल्लभपुरा डाबर, गुमानपुरा, कालारेवा आदि आसपास गांवों के किसानों ने बताया कि अनचाही बारिश से सोयाबीन की फसल पकने के बाद दुबारा फलियां अंकुरित होने लगी हैं। बम्बोरी गांव के विद्या सागर मीणा, लक्ष्मण सिंह, महिला किसान नटी बाई बम्बोरी, जगदीश नागर, युधिष्ठिर सुमन, रमेशचंद्र डाबर, महावीर मीणा, चेतन मीणा बल्लभपुरा सहित क्षेत्र के अन्य किसानों ने कृषि विभाग के अधिकारियों से खराब सोयाबीन उड़द की फसलों के खराबे का सर्वे करवाकर किसानों को फसल बीमा का लाभ दिलाने के साथही राज्य सरकार से भी खराब फसलों का मुआवजा दिलवाने की मांग की है।

बीमा कम्पनी पर नुकसान कम दिखाने का लगाया आरोप

सांगोद. क्षेत्र में पिछले कई दिनों जारी बारिश के कहर ने सोयाबीन की फसल को नष्ट कर दिया है। किसानों ने केन्द्रीय टीम पर नुकसान का आंकलन सही नहीं करने का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि सांगोद व कनवास क्षेत्र के खेतों में अब सोयाबीन में नुकसान 80 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, केन्द्रीय टीम ने केवल सोयाबीन में नुकसान 30 प्रतिशत होना बताया है। इससे किसानों को जो केन्द्र सरकार व बीमा कम्पनी से लाभ मिलता, वह नहीं मिल पाएगा। किसानों ने सर्वे नए सिरे से करवाकर किसानों को मुआवजा दिलवाएं जाने की मांग की है। लगातार हो रही बारिश के बीच पिछले दिनों फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के लिए केंद्रीय टीम ने क्षेत्र के दौरा किया किया था। लेकिन अब किसानों का कहना है कि जो सर्वे टीम द्वारा किया गया था वो ठीक नही है। टीम द्वारा उन खेतों में भी केवल 30 प्रतिशत नुकसान दिखाया गया है,जिन खेतों में 80 प्रतिशत से भी अधिक नुकसान हुआ है। सर्वे पूर्णतया सही नहीं हो सकता है। साथ ही किसान मांग कर रहे हैं कि फसलों को हुए नुकसान का दोबारा सही से सर्वे किया जाना चाहिए, जिससे नुकसान का उचित आंकलन किया जा सके।

इटावा। सूखनी नदी में पानी की भारी आवक हुई। कस्बे में नदी देखने उमड़ी भीड़।

इटावा. बम्बूलिया में पानी के बहाव में बहा ट्रैक्टर, जेसीबी से निकाला गया।

सीमल्या . सोयाबीन की फलियों के अंदर दानों में दुबारा हुए बीज अंकुरित।

गोदल्याहेडी. फसलों में भरा पानी। इसके कारण उड़द की फसल की फलियां काली पड़ी।

बपावर. परवन पुलिया पर 3 फुट पानी का नजारा देखतेे हुए। जाम में फसे वाहन।

मंडाना। क्षेत्र मंे हो रही बरसात से आलनिया एनिकट से निकलता पानी।

दीगोद. नाले की सफाई नहीं होने से पानी का निकास नहीं हो रहा। कचरा भर गया।

गणेशगंज . अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करते लोग।

सुल्तानपुर. कस्बे के एक खेत में खराब हुई उड़द की फसल को दिखाता किसान।

मोईकलां . कस्बे में बरसात से जीएसएस में भरा पानी व काम करता कर्मचारी।

कनवास . जर्जर मसानी पुलिया पर 2 फीट पानी होने पर फसा ट्रॉला।

सांगोद. बारिश के बाद खेत में गली पड़ी सोयाबीन, सिर्फ डंटल दिखाई देते हुए।

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