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7 साल से नियुक्ति का इंतजार, कम मेरिट वाले कर रहे नौकरी

2 वर्ष पहले
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वर्ष 2012 के तृतीय श्रेणी भर्ती परीक्षा के अभ्यर्थियाें काे 7 साल बाद भी नियुक्ति का इंतजार है। कम अंक वाले अभ्यर्थी सरकारी नाैकरी कर रहे हंै अाैर उससे अधिक अंक वाले अभ्यर्थी बेराेजगार बैठे हुए हैं।

रामगंजमंडी समेत जिलेभर से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी इस मामले को लेकर परेशान हैं। उनका कहना है कि समस्या का समाधान जल्द किया जाना चाहिए। अभ्यर्थी विनोद कुमार का कहना है कि कई बार परीक्षा परिणाम संशाेधित करने के बावजूद अाज भी प्रदेश के करीब 2 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी नियुक्ति की अास में राज्य की नई सरकार के निर्णय की प्रतिक्षा कर रहे हैं। जबकि इसका तीसरी बार रिवाइज परीक्षा परिणाम 2016 में निकाला गया था तब हजाराें की संख्या में अभ्यर्थियाें का परीक्षा परिणाम प्रभावित हुअा। उन्हाेंने बताया कि यह विभाग की उदासीनता का ही नतीजा है कि इतने साल निकल जाने के बाद भी हजाराें अभ्यर्थियाें काे अभी तक नियुक्तियां नहीं मिल पाई हैं। 2012 से कार्यरत बहुत से अभ्यर्थियाें के प्राप्तांक संशाेधित हुए परिणाम में कम हुए ताे राज्य सरकार ने उन्हें नाैकरी से न हटाकर खाली सीटाें पर व नए पद सृजित कर समायाेजित कर लिया।

उन्हाेंने बताया कि बहुत से अभ्यर्थियाें के प्राप्तांक संशाेधित परिणाम में 2012 से कार्यरत शिक्षकाें से अधिक हैं। जिला परिषद ने उन्हें यह कहकर नियुक्ति नहीं दी कि पद खाली नहीं है। जबकि सरकार की अाेर से खाली सीटें संशाेधित परिणाम में बाहर हाे रहे शिक्षकाें काे दे दी गई। जबकि पहला हक उन अभ्यर्थियाें का था, जिनके प्राप्तांक बाहर हाे रहे शिक्षकाें से अधिक हैं। जिन्हें कार्यरत शिक्षकाें से अधिक अंक हाेने के बाद भी सीट खाली नहीं है कहकर नियुक्त नहीं किया गया है।

इस संबंध में सैकड़ाें बार अभ्यर्थियाें द्वारा डायरेक्टर, मुख्यमंत्री, विधायक व मंत्रियों काे ज्ञापन साैंपे जा चुके है। लेकिन अाज भी मामला ज्यों का त्यों है।

अभ्यर्थियों का आरोप: निजी एजेंसी ने बरती अनियमितता, इससे अटकी नियुक्तियां

अभ्यर्थियों ने बताया कि अारपीएससी की बजाए पंचायती राज राज्य की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2012 में पंचायती राज विभाग के माध्यम से राज्य में करीब 40 हजार पदाें के लिए तृतीय श्रेणी शिक्षकाें की भर्ती परीक्षा अायाेजित करवाई गई थी। उन्हाेंने बताया कि पंचायती राज विभाग ने प्रश्न पत्र तैयार करने एवं परीक्षा परिणाम जारी करने का जिम्मा एक निजी एजेंसी काे दे दिया। कंपनी ने परिणाम में बहुत सारी अनियमितता बरती। इसके बाद असंतुष्ट अभ्यर्थी हाईकाेर्ट में चले गए। इस के बाद हाईकाेर्ट के दखल के बाद इसका तीन बार संशाेधित परिणाम निकाला गया।

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