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११ माह बाद इस हत्याकांड में पुलिस ने उठाया इन्हें, थाने के सामने लग गई ऐसी भीड़

११ माह बाद इस हत्याकांड में पुलिस ने उठाया इन्हें, थाने के सामने लग गई ऐसी भीड़

Dainik Bhaskar

Dec 02, 2017, 01:07 PM IST
समर्थकों की थाने के बाहर जुटरी समर्थकों की थाने के बाहर जुटरी

धनबाद (झारखंड)। लगभग 11 महीने बाद रंजय सिंह मर्डर में पुलिस ने धनबाद के डिप्टी मेयर एकलव्य सिंह और उनके मौसेरे भाई हर्ष सिंह से लंबी पूछताछ की। हर्ष से 15 घंटे तक पूछताछ की गई। हर्ष को गुरुवार की रात हिरासत में लिया गया था। पुलिस के इस कार्रवाई से हर्ष सिंह चर्चा में आ गया है। रात में लगातार 9 घंटे तक सिटी एसपी पीयूष पांडेय ने भी पूछताछ की।शुक्रवार देर शाम उन्हें छोड़ दिया गया। विधायक का करीबी था रंजय...

- लंबे समय से बंद रंजय हत्याकांड की जांच के लिए पुलिस ने फिर से डायरी खोली। रंजय झरिया से भाजपा विधायक संजीव सिंह का करीबी था। वह विधायक के घर 'सिंह मेंशन' में ही रहता था।

- लेकिन एक बार फिर पुलिस की जांच विधायक के चचेरे भाई स्व. नीरज सिंह के घर 'रघुकुल' में रहने वाले मामा नामक व्यक्ति पर आकर थम गई। बिहार के आरा स्थित बेरथ निवासी बबलू सिंह उर्फ मामा पर पुलिस की जांच आकर टिकी थी, लेकिन घटना के बाद से ही वह फरार है।

-इस मामले में जब स्व. नीरज सिंह के मौसेर भाई हर्ष सिंह से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि मामा उसके गांव का रहने वाला है। इसलिए वह उसे जानता है। रंजय सिंह की हत्या में उसका क्या रोल है और अभी वह कहां है। इस बारे में उसे कुछ नहीं पता।

क्या है मामला ?

- दरअसल, भाजपा विधायक संजीव सिंह के करीबी रंजय सिंह की हत्या गोली मारकर 29 जनवरी 2016 को बीच सड़क कर दी गई थी।
- रंजय को उसके अपार्टमेंट से लौटने के क्रम में गोली मारी गई थी। मौके पर ही उसकी मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने दावा किया था कि हत्यारे को जल्द खोज निकाला जाएगा।

-पुलिस को मामा नामक व्यक्ति पर संदेह था क्योंकि मर्डर के समय रंजय के साथ रहे व्यक्ति ने शूटरों में से एक मामा को पहचान लिया था। मामा को जमीन निगल गई या आसमान खा गया, पता नहीं लेकिन पुलिस आज तक उसका पता नहीं लगा पाई।
-रंजय की पत्नी ने पुलिस के सीनियर पुलिस पदाधिकारियों को पत्र लिख कर उनके पति के हत्यारे को पकड़ने का अनुरोध किया था।

कैसे की गई थी हत्या?


-रंजय को गोली मारने के बाद बाइक सवार दो शूटर गोविंदपुर की तरफ भाग गए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रंजय अपनी स्कूटी से सिंह मेंशन के कर्मचारी राजा यादव के साथ चाणक्य नगर स्थित अपने फ्लैट से लौट रहा था।
-चाणक्य नगर गेट के समीप पहले से घात लगाकर बैठे अपराधियों ने घेर कर दोनों तरफ से फायरिंग की। अपराधियों ने रंजय को टारगेट कर लगभग एक दर्जन गोलियां चलाईं थी।
-काफी करीब से रंजय को गोली मारी गई थी। रंजय के सिर और हाथ में दो-दो, पीठ में एक और पेट में तीन गाोलियां लगीं। सभी गोलियां शरीर से आरपार हो गईं।
-गोली लगते ही रंजय स्कूटी के साथ मौके पर गिर गया। सूचना मिलने के बाद सिंह मेंशन के लोग मौके पर पहुंचे और रंजय को उठा कर सेंट्रल हॉस्पिटल ले गए थे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

- बताया जाता है कि रंजय की हत्या का बदला लेने के लिए ही धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत अन्य चार की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। नीरज को 60 से अधिक गोलियां मारी गई थीं, जिसमें से उन्हें 25 गोलियां लगी थीं।

सपोर्टर डटे रहे थाने के बाहर


-डिप्टी मेयर एकलव्य सिंह के मौसेरे भाई हर्ष सिंह को हिरासत में लिए जाने की खबर से रघुकुल (डिप्टी मेयर का आवास) में गतिविधियां काफी तेज हो गईं।

-डिप्टी मेयर एकलव्य सिंह और उनके भाई अभिषेक सिंह का सरायढेला थाना आना-जाना लगा रहा। शुक्रवार को दोपहर 1 बजे अभिषेक सिंह अकेले थाने पहुंचे।

-वे हर्ष से बातचीत कर आधे घंटे में घर लौट गए। फिर दोनों एक साथ शाम 4:45 बजे थाने पहुंचे। वे शाम 7 बजे तक वहां डटे रहे।
-पीआर बांड पर जब हर्ष को छोड़ा गया, तो वे उन्हें लेकर रघुकुल गए। रघुकुल समर्थकों की भीड़ गुरुवार रात से ही थाने के सामने लग गई थी।
-शुक्रवार को उनकी संख्या बढ़ गई। दोपहर में घर से लाया खाना हर्ष तक पहुंचाने के मुद्दे पर समर्थकों का पुलिस से विवाद भी हुआ, लेकिन जल्द ही मामला शांत हो गया। हर्ष के थाने से छूटने के बाद ही समर्थक वहां से हटे।
-हर्ष के पिता संजय सिंह की वर्ष 1996 में एसपी आवास के समीप गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी। हर्ष का बड़ा कारोबार है। पट्रोल पंप समेत कई व्यवसाय हैं।
-पिता संजय सिंह ने ही काफी संपत्ति अर्जित की थी। हर्ष पहले ही खुद पर खतरे की आशंका जता चुका है। हर्ष को एक सरकारी बॉडीगार्ड मिला हुआ है।

आगे की स्लाइड्स में देखिए फोटोज...

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