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हाथ में बम लेकर पाक बॉर्डर में घुस गया था ये जवान, उड़ा दिए थे ३ बंकर

हाथ में बम लेकर पाक बॉर्डर में घुस गया था ये जवान, उड़ा दिए थे ३ बंकर

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2017, 12:14 PM IST
परमवीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक परमवीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक

गुमला (झारखंड)। परमवीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक्का की शहादत दिवस पर तीन दिसंबर को उनके गांव जारी ब्लॉक में मेले का आयोजन किया गया है। इस मौके पर dainikbhaskar.com बता रहा है अल्बर्ट एक्का के बारे में। एक्का भारत-पाक बॉर्डर पर 1971 की लड़ाई में गोलियां खाते हुए पाक बॉर्डर में घुस गए थे और ग्रेनेड फेंककर दुश्मन के तीन बंकर उड़ा दिए थे। इस लड़ाई में दुश्मनों के कैंप में घुसकर अपनी टीम को बचाने वाले एक्का की वीरता को याद करते हुए भारत सरकार ने मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया। गोलियों की बौछार के बावजूद आगे बढ़ते रहे...


-सन् 1971 में पाक के नापाक इरादों ने एकाएक जंग की शक्ल अख्तियार की। घमासान युद्ध छिड़ गया। मशीन गनों और तोपों की गड़गड़ाहट से धरती का हृदय कांप उठा।
-सेना के जवान शत्रुओं पर टूट पड़े। अल्बर्ट एक्का (नंबर 22397461/एन.के.) पूर्वी अग्रभाग में गंगा सागर के पास 14 गार्डस के बाईं ओर पूरे जोशो खरोश के साथ दुश्मनों को रौंदते हुए आगे बढ़ रहे थे।
-उधर, दुश्मन भी अपनी पूरी शक्ति लगा चुका था। शत्रुओं की गोलियों की निरंतर हो रही बारिश की परवाह न करते हुए अल्बर्ट अपने दल बल के साथ आगे बढ़ते चले गए।
-अंत में हाथापाई एवं राइफल के बायनेट का इस्तेमाल करने की नौबत आ गई। अचानक अल्बर्ट की निगाह दुश्मनों के एक लाइट मशीनगन की ओर गई।
-जो भारतीय सैन्य दल को काफी क्षति पहुंचा रहा था। साथ ही भारतीय सैन्य दल दुश्मन द्वारा बुरी तरह से घिरा हुआ था। अल्बर्ट एक्का ने दुश्मनों के बंकर पर एकाएक आक्रमण कर दिया।
-दो पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतारकर दुश्मनों के दो लाइट मशीनगनों का मुंह बराबर के लिए बंद कर दिया। इस दौरान अल्बर्ट भी गंभीर रूप से घायल हो चुके थे। फिर भी एक के बाद एक बंकरों को तबाह करते हुए वे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते गए।

दो मंजिला मकान से लगातार हो रही थी फायरिंग
-इनके लक्ष्य के उत्तरी छोर पर पाक शत्रु दल द्वारा एक दो मंजिला मकान से एक लाइट मशीनगन से लगातार धुंआधार गोलियों की बौछार हो रही थी।
-लेकिन वो धीरे-धीरे रेंगते हुए दुश्मन के उक्त दो मंजिले मकान तक पहुंचकर एका-एक उक्त बंकर के एक छेद से दुश्मनों पर एक हैंड ग्रेनेड फेंक दिया।
-हैंड ग्रेनेड फटते ही दुश्मनों के बंकर के अंदर खलबली मच गई। इसमें दुश्मन के कई सैनिक मारे गए। पर उक्त लाइट मशीनगन चलती ही रही।
-जिससे भारतीय सैन्य दल को खतरा बना रहा। अल्बर्ट उक्त बंकर में घुसकर दुश्मन के पास पहुंचे और अपने बंदूक के बायनेट से वार कर दुश्मन सैनिक को मौत के घाट उतार दिया।
-इससे दुश्मन एवं उसके लाइट मशीनगन की आवाज एक साथ बंद हो गई। मगर इस दौरान गंभीर रूप से घायल होने के कारण कुछ ही पलों में अल्बर्ट एक्का शहीद हो गए।

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