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काम छोड़ा, REET की तैयारी में जुटे:कोरोना काल में केवल सरकारी कर्मचारी ही आर्थिक संकट से उबर पाए, भविष्य के बारे में सोच कर रहे तैयारी

जोधपुर3 महीने पहलेलेखक: पूर्णिमा बोहरा

जोधपुर में REET की तैयारी करने वाले अधिकांश स्टूडेंट्स की धारणा यह है कि सरकारी नौकरी जरूरी है। स्टूडेंट्स ने कहा कि कोविड पीरियड से यह सबक लिया कि सरकारी नौकरी वाले अपना घर चला पाए और प्राइवेट वालों की आर्थिक स्थिति खराब रही। यही कारण है कि अधिकांश युवाओं का रुझान भी सरकारी नौकरी की तरफ बढ़ा है। ऐसे में कोई अपना धंधा छोड़ तैयारी में जुटा है तो किसी का अपना स्कूल बंद हो गया। किसी को रोजगार ठप हो गया तो उसने सरकारी नौकरी करने का लक्ष्य बनाया।

धंधा छोड़ तैयारी में जुटा
मुरलीधर माली फलौदी में सब्जी की दुकान चलाते थे, लेकिन कोविड समय में दुकान बंद हो गई। पिता बीमार है और उनका इलाज मुरलीधर ने करवाया। उन्होंने बताया कि जब यह देखा कि कोविड में सिर्फ नौकरी वाले ही आर्थिक परेशानी का सामना कर पाए हैं। उन्होंने भी ठान लिया कि वे अब तैयारी में जुटेंगे। जैसे ही भर्तियां निकली तो आवेदन किया और तैयारी शुरू कर दी। हालांकि कोविड की दूसरी लहर ने हौसला तोड़ा था, लेकिन हिम्मत नहीं हारी और आगे बढ़ते गए। उन्होंने बताया कि वह घर वालों को बोलकर आए हैं कि नौकरी हासिल करके ही लौटेंगे।

कर्मकांड छोड़ REET की तैयारी
बीकानेर के सोमदत्त आचार्य कर्मकांड (पंडित) का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि वह अपना परिवार छोड़कर जोधपुर आकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। आचार्य का कहना है कि कोविड समय में कर्मकांड का काम नहीं चला और परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हो गई। यही बड़ा कारण रहा कि प्रतियोगिता परीक्षा देने की ओर झुकाव हुआ और ठान लिया कि परीक्षा देकर नौकरी हासिल करनी है। सोमदत्त बताते हैं कि हमेशा से शादियों और अन्य मौकों पर कर्मकांड किया, लेकिन कभी नहीं लगा कि ये भी बंद हो सकता है। हालांकि पढ़ाई जारी रखी।

कोरोना में स्कूल बंद हुआ तो सरकारी नौकरी का सोचा
रविन्द्र व्यास फलोदी से हैं। उन्होंने 2018 में फलौदी में अपना एक स्कूल शुरू किया था। स्कूल अच्छा चल रहा था इसलिए कभी सरकारी नौकरी का नहीं सोचा। नौकरी करना चाह भी नहीं रहे थे, लेकिन कोविड समय में उनका स्कूल बंद हुआ। इस दौरान करीब 10 लाख का नुकसान हुआ और स्कूल बंद हो गया। रविन्द्र ने बताया मम्मी-पापा लेक्चरर है तो आर्थिक स्थिति संभली रही। यह देख रविन्द्र ने सरकारी कर्मचारी बनने की सोची और तैयारी में जुट गए। रविन्द्र ने कहा कि फिर कभी ऐसी आपदा आने पर मेरा परिवार आर्थिक परेशानियों का सामना न करें, इसलिए मैं सरकारी नौकरी पाना चाह रहा हूं।

काम धंधा बंद तो तैयारी में जुटे
जितेन्द्र सुथार का फलोदी के पास लोरडिया में खुद का एक स्कूल है। कोरोना महामारी के कारण दो वर्षों से स्कूल नहीं चल रही। कोविड काल में लंबे समय से स्कूल बंद होने से रोजगार नहीं। इसलिए सरकारी नौकरी की ओर रुझान हुआ और रीट की तैयारी कर सरकारी स्कूल में शिक्षक बनना चाहते हैं।

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