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REET अभ्यर्थी ऐसे दूर करें तनाव:तैयारी कर रहीं शादीशुदा महिलाओं में बढ़ रहा मानसिक तनाव, जो पढ़ा वो भी भूल रहे स्टूडेंट्स; एक्सपर्ट से जानें बचने के तरीके

जयपुर2 महीने पहले

राजस्थान में 26 सितंबर को रीट की परीक्षा होने जा रही है। इस परीक्षा में 16 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स बैठेंगे। परीक्षा की तारीख फाइनल है, लेकिन पहले कई बार आगे बढ़ चुकी है। कोरोना काल में लंबे समय से रीट की तैयारी करते-करते बहुत से स्टूडेंट्स मानसिक बीमारियों के शिकार भी होने लगे हैं। लक्षण नजर आने पर सतर्कता बरतते हुए स्टूडेंट को किसी भी अच्छे डॉक्टर से उपचार लेना चाहिए। लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। क्योंकि परीक्षा में अच्छे मार्क्स लाने के लिए जरूरी है मानसिक रूप से स्वस्थ रहना।

मनोचिकित्सकों के पास इलाज और काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं स्टूडेंट्स
जयपुर में मनोचिकित्सक डॉ. अनिता गौतम के पास रोजाना औसत तौर पर 2 से 3 रीट स्टूडेंट्स इलाज और काउंसलिंग के लिए पहुंच रहे हैं। वे बताती हैं ज्यादातर स्टूडेंट्स बार-बार परीक्षा आगे बढ़ने से स्टूडेंट्स के दिमाग पर बड़ा असर पड़ा है। रीट परीक्षा की तैयारी करने वाले औसत तौर पर दो से तीन स्टूडेंट्स रोज उनके पास इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। उनका कहना है कि स्टूडेंट्स पर काफी नेगेटिव असर पड़ा है।

स्ट्रेस, घबराहट, चिंता, अवसाद, नींद न आना, बेचैनी, शरीर में दर्द की शिकायतें
जो रीट स्टूडेंट्स मनोचिकित्सक के पास पहुंच रहे हैं, आम तौर पर उनमें स्ट्रेस का लेवल बढ़ा हुआ है। नींद नहीं आती, घबराहट (पल्पीटेशन) ज्यादा होती है और सुबह जल्दी आंखें खुल जाती हैं। कई बार शरीर में बहुत दर्द होना और पेट दर्द होने की शिकायतें भी आ रही हैं। रीट की तैयारी कर रही महिलाओं में भी अवसाद और चिंता की शिकायत आ रही है।

दिमाग ब्लैंक होने, पढ़ा हुआ भूलने, भूख कम लगने, नेगेटिव विचार की परेशानी
परीक्षा की तैयारी करने वाली महिलाओं और युवतियों में भी चिंता और तनाव के लक्षण दिखे हैं। नींद नहीं आना, घबराहट होना, जो पढ़ा है वह भूल जाना, दिमाग ब्लैंक हो जाना जैसे लक्षण देखने को मिल रहे हैं। कई पेशेंट्स में घबराहट के साथ अचानक उठ जाने, भूख खत्म हो जाने, बेचैनी, नेगेटिव विचार होने, एक्जाम क्रेक नहीं होगा तो क्या होगा, इस तरह के विचार मन में बार-बार आने की समस्या भी हो रही है। ऐसे मरीजों को उनका एनालिसिस करके डॉक्टर काउंसलिंग और उपचार दे रहे हैं। साथ ही उन्हें नियमित रूप से चेकअप करवाने की सलाह भी दे रहे हैं।

मानसिक रोगों से बचाव कैसे कर सकते हैं स्टूडेंट्स
1. अपनी पढ़ाई का टाइम टेबल सेट करें
2. टाइम मैनेजमेंट करके ही कोर्स कम्प्लीट करें
3. पढ़ने के बाद में उसका रिविजन करना जरूरी है
4. पूरे टाइम पढ़ते ही नहीं रहना है। हर 45 मिनट बाद 5 मिनट ब्रेक लें।
5. पढ़ने के लिए कुर्सी-टेबल का उपयोग करें। पोश्चर सही रखें। रीढ़ की हड्‌डी सीधी रहनी चाहिए।
6. आंखों और गर्दन पर ज्यादा जोर न आने दें।
7. पढ़ते-पढ़ते जब घबराहट या बेचैनी हो, तब डीप ब्रीदिंग यानी गहरी सांस लें ।
8. नोट्स बनाने या पढ़ने-लिखने के बाद अपने दोनों हाथों को आगे सामने की ओर खींचकर मसल स्ट्रैचिंग करें। इसी तरह हाथों को खींचकर सिर के ऊपर की ओर भी उठाएं।
9. अगर मूड खराब हो रहा है, तो खुली हवा में जाएं। रूम से बाहर निकल कर सन लाइट में जाकर कुछ देर बिताएं और रेस्ट लें।
10. जो स्टूडेंट्स मनपसंद लाइट म्युजिक सुनते-सुनते पढ़ाई कर सकते हैं, उन्हें म्युजिक थैरेपी से फायदा होता है।
11. बहुत ज्यादा घबराने वाले, नेगेटिव सोच रखने वाले साथी स्टूडेंट्स से बात कम करें और उनसे कम सम्पर्क रखें।
12. जो मित्र आपको मोटिवेट करते हों, जिनके साथ आप अच्छा फील करते हैं। आपको पॉजिटिव एनर्जी मिलती है। उनसे बातचीत ज्यादा करें।
13. लिख कर और बोल कर पढ़ाई करें।
14. रात को चाय, काफी या एनर्जी ड्रिंक न लें।
15. दिन में पढ़ाई करें। ज्यादा देर रात तक पढ़ाई न करें।
16. नींद लेना और बॉडी को रेस्ट देना जरूरी है।
17. नशे या किसी बुरी लत से दूर रहें।
18. अगर कोई परेशानी महसूस हो, इमोशन्स कंट्रोल नहीं हो रहे हों, तो मनोचिकित्सक से सलाह लें।
19. यदि मन में गलत विचार आ रहे हों, सुसाइड जैसे थॉट्स आ रहे हों, तो तुरंत मनोचिकित्सक के पास पहुंचे।
20. यदि खुद को या किसी और को नुकसान पहुंचाने या मारने के विचार आ रहे हों, तो तुरंत मनोचिकित्सक के पास पहुंचे।

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