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Swami Vivekananda Jayanti 2019: Motivational Story एक विदेशी महिला स्वामीजी की वेशभूषा देखकर मजाक उड़ा रही थी, जब स्वामीजी ने समझाया कैसे होती है सज्जनता की परख तो महिला ने शर्म से झुका लिया अपना सिर

किसी व्यक्ति को परखते समय ध्यान रखें विवेकानंद की बातें, बच सकते हैं परेशानियों से

Dainik Bhaskar

Jan 11, 2019, 06:47 PM IST
Swami vivekananda Jayanti Jan 12 2019: Motivational Story motivational story of swami vivekanand

रिलिजन डेस्क। स्वामी विवेकानन्द(Swami Vivekananda) का जन्म 12 जनवरी सन् 1863 को कोलकाता (कलकत्ता) के एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम नरेन्द्रनाथ दत्त था। उनके पिता विश्वनाथ दत्त उस समय कलकत्ता हाईकोर्ट के एक वकील थे। उनकी माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक विचारों की महिला थीं। स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) ने परिवार को 25 की उम्र में छोड़ दिया था, संन्यास धारण कर लिया था। स्वामीजी (Swami Vivekananda) की मृत्यु 4 जुलाई, 1902 को हुई थी। स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) के जीवन के कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनसे सुखी और सफल जीवन की प्रेरणा मिलती है।

यहां जानिए एक ऐसा प्रसंग, जिसमें उन्होंने एक विदेशी महिला को बताया था किसी व्यक्ति की सज्जनता कैसे परख सकते हैं...

> स्वामी विवेकानंद (Swami Vivekananda) शिकागो की विश्व धर्म संसद के लिए अमेरिका पहुंच गए थे। अभी धर्मसंसद में कुछ दिन शेष थे। उस समय धर्मसंसद में न उनका ऐतिहासिक उद्बोधन हुआ था और न उन्हें ख्याति मिली थी।

> अमेरिका में पहुंचने के बाद भी वे संन्यासियों की वेशभूषा में रहते थे। कषाय वस्त्र, सिर पर पगड़ी, हाथों में डंडा और कंधों पर चादर डली हुई। इसी वेशभूषा में वे एक दिन शिकागो की सड़कों पर भ्रमण कर रहे थे।

> अमेरिका के वासियों के लिए यह वेशभूषा न सिर्फ अचरज की वजह थी, बल्कि काफी हद तक उनके लिए यह उपहास का विषय थी।

> स्वामीजी के पीछे-पीछे चल रही एक अमेरिकी महिला ने अपने साथ के पुरुष से कहा, जरा इन महाशय को तो देखो, कैसी विचित्र पोशाक पहन रखी है!’ स्वामी विवेकानंद ने सुन लिया और समझ भी लिया कि ये अमेरिकी उनकी इस भारतीय वेशभूषा को हेय नजरों से देख रहे हैं।

> वे रुक गए और उस महिला को संबोधित कर बोले, ‘बहन! मेरे इन वस्त्रों को देखकर आश्चर्य मत करो। तुम्हारे इस देश में कपड़े ही सज्जनता की कसौटी हैं, किंतु मैं जिस देश से आया हूं, वहां सज्जनता की पहचान मनुष्य के कपड़ों से नहीं, बल्कि उसके चरित्र से होती है। कपड़े तो ऊपरी दिखावा भर हैं। चरित्र व्यक्तित्व का आधारभूत तत्व है।’

> स्वामीजी के सटीक उत्तर को सुनकर उस महिला का सिर शर्म से झुक गया। इसके बाद जब विश्व धर्म संसद का आयोजन हुआ तो स्वामीजी का अद्भुत संबोधन सुनकर अमेरिकावासियों के मन में उनके प्रति गहरी श्रद्धा का भाव आ गया और भारत के विषय में उनकी सोच बदल गई।

> इस तरह स्वामीजी ने भारतीय संस्कृति को मान दिलाया। व्यक्ति के आचरण से उसकी सच्ची पहचान होती है। किसी व्यक्ति की संस्कारशीलता वस्त्र या आभूषण आदि से नहीं, बल्कि कर्म की श्रेष्ठता से मालूम होती है।

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Swami vivekananda Jayanti Jan 12 2019: Motivational Story motivational story of swami vivekanand
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