तीर्थ दर्शन / माता सती के शरीर के अंग जहां-जहां गिरे, वहां-वहां बने शक्तिपीठ



51 shaktipeeth of the world
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आदि शक्तिपीठों की संख्या 4 मानी जाती है। 
कालिकापुराण में शक्तिपीठों की संख्या 26 बताई गई है। 
शिव चरित्र के अनुसार शक्ति पीठों की संख्या 51 हैं। 
तंत्र चूड़ामणि, मार्कण्डेय पुराण के अनुसार शक्ति-पीठ 52 हैं। 
भागवत में शक्तिपीठों की संख्या 108 बताई गई है। 

Dainik Bhaskar

Oct 10, 2018, 12:15 PM IST

रिलिजन डेस्क. कहानी है कि आदि शक्ति के एक रूप सती ने शिवजी से विवाह किया, लेकिन इस विवाह से सती के पिता दक्ष खुश नहीं थे। बाद में दक्ष ने एक यज्ञ किया तो उसमें सती को छोड़कर सभी देवताओं को आमंत्रित किया। सती बिना बुलाए यज्ञ में चली गईं। दक्ष ने शिवजी के बारे में अपमानजनक बातें कहीं। सती इसे सह न सकीं और सशरीर यज्ञाग्नि में स्वयं को समर्पित कर दिया। दुख में डूबे शिव ने सती के शरीर को उठाकर विनाश नृत्य आरंभ किया। इसे रोकने के लिए विष्णु ने सुदर्शन चक्र का इस्तेमाल कर सती की देह के टुकड़े किए। जहां-जहां सती के शरीर के अंग गिरे, वो स्थान शक्तिपीठ बन गए। शक्तिपीठों के स्थानों और संख्या को लेकर ग्रंथों में अलग बातें कही गई हैं। यहां हम बता रहे हैं सबसे चर्चित 51 शक्तिपीठों के बारे में। 
 

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