अनंत चतुर्दशी / श्रीकृष्ण ने पांडवों को दी थी इस व्रत को करने की सलाह



Anant Chaturdashi 2019: Sri Krishna Advised Pandavas to Observe This Fast
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Anant Chaturdashi 2019: Sri Krishna Advised Pandavas to Observe This Fast

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2019, 04:11 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क. भाद्रपद के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी मनाई जाती है जो इस बार 12 सितंबर को है। इस दिन भगवान हरि की पूजा की जाती है और पूजा के बाद अनंत धागा धारण किया जाता है। यह व्यक्तिगत पूजा है, इसका कोई सामाजिक या धार्मिक उत्सव नहीं होता। अग्नि पुराण में इसका विवरण है। चतुर्दशी तिथि का आरंभ 12 सितंबर को सुबह 5 बजकर 6 मिनट से शुरू हो जाएगा। इस दिन पार्थिव गणेश के विसर्जन के साथ दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन होता है।

 

  • महाभारत काल में इसकी शुरुआत

मान्यता है कि महाभारत काल में इस व्रत की शुरुआत हुई थी। जब पांडव जुए में अपना राज्य गंवाकर वन-वन भटक रहे थे, तो भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी व्रत करने को कहा था। श्रीकृष्ण ने कहा- "हे युधिष्ठिर! तुम विधिपूर्वक अनन्त भगवान का व्रत करो, इससे तुम्हारा सारा संकट दूर हो जाएगा और तुम्हारा खोया राज्य पुन: प्राप्त हो जाएगा। श्रीकृष्ण की आज्ञा से युधिष्ठिर ने भी अनन्त भगवान का व्रत किया, जिसके प्रभाव से पाण्डव महाभारत के युद्ध में विजयी हुए तथा चिरकाल तक राज्य करते रहे।

 

  • 14 गांठें भगवान श्री हरि के 14 लोकों की प्रतीक

इस व्रत में सूत या रेशम के धागे को कुमकुम से रंगकर उसमें चौदह गांठे लगाई जाती हैं। इसके बाद उसे विधि-विधान से पूजा के बाद कलाई पर बांधा जाता है। कलाई पर बांधे गए इस धागे को ही अनंत कहा जाता है। भगवान विष्णु का रूप माने जाने वाले इस धागे को रक्षासूत्र भी कहा जाता है। ये 14 गांठे भगवान श्री हरि के 14 लोकों की प्रतीक मानी गई हैं। इस अनंत रूपी धागे को पूजा में भगवान विष्णु पर अर्पित कर व्रती अपनी भुजा में बांधते हैं। 

 

  • धन और संतान की कामना से किया जाता है

धन और संतान की कामना से यह व्रत किया जाता है। मान्यता है कि यह अनंत हम पर आने वाले सब संकटों से रक्षा करता है। यह अनंत धागा भगवान विष्णु को प्रसन्न करने वाला तथा अनंत फल देता है। इस व्रत के बारे में शास्त्रों का कथन है कि यह समस्त प्रकार के कष्टों से मुक्ति दिलाता है, विपत्तियों से उबारता है। महाभारत के अनुसार माना जाता है कि इस व्रत को करने से दरिद्रता का नाश होता है और ग्रहों की बाधाएं भी दूर होती हैं।

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