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अश्विन माह में प्रदोष व्रत और शिव पूजा करने से पूरी होती हैं मनोकामनाएं

एक वर्ष पहले
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जीवन मंत्र डेस्क. हिंदू कैलेंडर के अनुसार दोनों पक्ष की त्रयोदशी तिथि काे प्रदोष व्रत किया जाता है। इस व्रत में भगवान शिवजी की पूजा की जाती है और हर तरह के कष्ट दूर करने की प्रार्थना की जाती है। इस बार अश्विन माह के शुक्लपक्ष को किया जाने वाला प्रदोष व्रत 11 अक्टूबर, शुक्रवार को पड़ रहा है। शिव पुराण के अनुसार शिवरात्रि के बाद भगवान शिव की पूजा के लिए किया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण व्रत प्रदोष ही है।
 

  • कैसे शुरू हुआ प्रदोष ्व्रत

प्रदोष को प्रदोष कहने के पीछे एक कथा जुड़ी हुई है। संक्षेप में यह कि चंद्र को क्षय रोग था, जिसके चलते उन्हें मृत्यु तुल्य कष्ट हो रहा था। भगवान शिव ने उस दोष का निवारण कर उन्हें त्रयोदशी के दिन पुन:जीवन प्रदान किया अत: इसीलिए इस दिन को प्रदोष कहा जाने लगा।   

  • कैसे करें व्रत और पूजा

अश्विन माह के शुक्लपक्ष को पड़ने वाले प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा की जाती है। यह व्रत निर्जल यानी बिना पानी के किया जाता है। प्रदोष व्रत की विशेष पूजा शाम को की जाती है। इसलिए शाम को सूर्य अस्त होने से पहले एक बार फिर स्नान करना चाहिए। इसके बाद साफ़ सफेद रंग के वस्त्र पहन कर पूर्व दिशा में मुंह कर भगवान की पूजा की जाती है।   

  1. मिट्टी से शिवलिंग बनाएं और विधिवत पूजा करने के बाद उनका विसर्जन करें।
  2. सबसे पहले दीपक जलाकर उसका पूजन करें।
  3. सर्वपूज्य भगवान गणेश का पूजन करे।
  4. तदुपरान्त शिव जी की प्रतिमा को जल, दूध, पंचामृत से स्नानादि कराएं। बिलपत्र, पुष्प , पूजा सामग्री से पूजन कर भोग लगाएं।
  5. कथा करें और फिर आरती करें।
  6. भगवान शिव की पूजा में बेल पत्र, धतुरा, फूल, मिठाई, फल आदि का उपयोग अवश्य करें। भगवान पर लाल रंग का फूल नहीं चढ़ाना चाहिए।

 

  • प्रदोष व्रत का महत्व

प्रत्येक माह में दो प्रदोष होते हैं। त्रयोदशी (तेरस) को प्रदोष कहते हैं। हर महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। अलग- अलग दिन पड़ने वाले प्रदोष की महिमा अलग-अलग होती है। सोमवार का प्रदोष, मंगलवार को आने वाला प्रदोष और अन्य वार को आने वाला प्रदोष सभी का महत्व और लाभ अलग अलग है। रवि प्रदोष, सोम प्रदोष व शनि प्रदोष के व्रत को पूर्ण करने से अति शीघ्र कार्यसिद्धि होकर अभिष्ट फल की प्राप ्ति होती है। यदि कोई भी 11 अथवा एक वर्ष के समस्त त्रयोदशी के व्रत करता है तो उसकी समस्त मनोकामनाएं अवश्य और शीघ्रता से पूर्ण होती हैं।

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