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तीर्थ दर्शन / प्रयागराज में है भीष्म पितामाह का मंदिर, तीरों की शैया पर लेटी है मूर्ति

Dainik Bhaskar

Feb 13, 2019, 06:29 PM IST


bhishma ashtami on 13th february
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रिलिजलन डेस्क. भीष्म पितामाह महाभारत के प्रमुख योद्धाओं में से थे। वे अपने बल और बुद्धि के लिए जाने जाते हैं। देवी गंगा और शांतनु के पुत्र ने अपनों के भले के लिए कभी विवाह न करने की प्रतिज्ञा ली थी। उनकी इस प्रतिज्ञा पर ही उन्हें अपने पिता द्वारा 'इच्छामृत्यु' का वरदान मिला था।  इस योद्धा का भारत में एक ही मंदिर है जो कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में स्थित है। प्रयागराज शहर ना सिर्फ तहजीब और सभ्यता के लिए जाना जाता है बल्कि यहां मौजूद बहुत सारे छोटे-बड़े मंदिरों के लिए भी जाना जाता है। इन्हीं मंदिरों में से एक है ये भीष्म पितामह का मंदिर। जो यहां के लोगों में काफी प्रसिद्ध है।

मंदिर से जुड़ी खास बातें

  1. 1961 में कराया था मंदिर का निर्माण

    इलाहाबाद के दारागंज इलाके में स्थित इस मंदिर का निर्माण हाई कोर्ट के वकील जेआर भट्ट ने 1961 में करवाया था। 

    • इस मंदिर में श्रद्धालु गंगा पुत्र की पूजा के साथ ही उनकी परिक्र परिक्रमा के लिए भी यहां घंटों लाइन में लगे रहते हैं। 
    • मंदिर के पुजारियों के अनुसार, बहुत साल पहले एक बूढ़ी औरत रोजाना गंगा में स्नान करने आती थी। 
    • डुबकी लगाने के बाद उसने एकदिन जे आर भट्ट से कहा की वह गंगा के पुत्र की भी पूजा करना चाहती है, बस इस बात को सुनकर भट्ट ने मंदिर का निर्माण प्रारंभ कर दिया।

  2. 12 फिट लम्बी है मूर्ति, तीरों की शय्या पर लेते हैं भीष्म पितामाह

    पौराणिक कथाओं से प्रभावित होकर बनाए गए इस मंदिर में भीष्म पितामाह की 12 फिट लम्बी और लेटी हुई मूर्ति स्थापित है। 

    • इस मूर्ति को तीरों की शय्या पर लेटा हुआ दर्शाया गया है। लोग भीष्म पितामह की मूर्ती पर पुष्प चढ़ते हैं और उन्हें नमन करते हैं। हांलाकि इस मूर्ति का पुजारियों द्वारा पूजन नहीं किया जाता है।

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