हर इंसान के 3 धर्म होते हैं, उसमें राष्ट्र धर्म सबसे ऊपर, हर इंसान को निभाने चाहिए ये धर्म

इस नवरात्र में अपनी साधना से करें भारत माता की सेवा

Dainikbhaskar.com

Apr 02, 2019, 12:09 PM IST
chaitra navratri 2019 Gayatri parivar haridwar dr. pranav pandya on  navratri 2019

डॉ. प्रणव पण्ड्या, शांतिकुंज, हरिद्वार

रिलिजन डेस्क. बचपन से ही हमें सिखाया गया है कि हमारी दो माँ है। एक वह है, जिसने हमें जन्म दिया व दूसरी माँ भारत माता है, जो हम सबका पालन-पोषण करती है। मातृभूमि को जननी के समतुल्य माना गया है। जिस देश के हम नागरिक है, जिस धरती ने हमें जन्म दिया, साधन-सुविधाएँ दीं और मनुष्य कहलाने योग्य बनाया, वह भूमि निश्चय ही माँ कहलाने योग्य है। इसीलिए हम अपने देश को भारत माता कहकर पुकारते हैं। हमारे देश की संस्कृति हमें सिखाती है कि राष्ट्र से बढ़कर कुछ भी नहीं है, और इसके जीवन्त उदाहरणों से हमारा गौरवमयी इतिहास भरा पड़ा है।

राष्ट्रधर्म को सबसे महत्त्वपूर्ण माना गया है। कर्त्तव्य धर्मों में तीन प्रमुख माने गए है-वैयक्तिक धर्म, समाज धर्म और राष्ट्र धर्म। वैयक्तिक धर्म व्यक्ति की सुख-सुविधा और विकास हेतु होता है। समाज धर्म में व्यक्ति और समाज की गति-प्रगति की बात सोची जाती है, जबकि राष्ट्र धर्म में व्यक्ति, समाज और राष्ट्र तीनों की उन्नति निहित होती है। अतः सिर्फ एक राष्ट्र धर्म के पालन से शेष दोनों धर्मों का निर्वाह स्वतः होता रहता है। इसीलिए तीनों धर्मों में राष्ट्र धर्म को सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण माना गया है। राष्ट्र की सेवा करना उसकी सुख-शांति, समृद्धि-प्रगति बढ़ाने का निष्ठापूर्वक प्रयास करना ही राष्ट्र धर्म है। मनुष्य जिस राष्ट्रभूमि की गोद में पलता, बढ़ता, विकास करता है, जिसकी संस्कृति से जीवन को सभ्य व सुसंस्कृत बनाता है, जन्म से लेकर मृत्यु पर्यंत जिसके अनेकानेक उपकारों, अनुदानों से अनुग्रहित होता व प्रगति करता है, उस राष्ट्र के प्रति हमारा भी कर्तव्य होता है कि हम उसके उन्नयन-विकास की बात सोचें, करें।

आज हमारे राष्ट्र पर नकारात्मकता, आसुरी प्रवृतियों का संकट छाया हुआ है। पिछले कुछ समय से दुष्प्रवृत्तियाँ देश की अखंडता व एकता को ठेस पहुँचाने में लगी है। इससे पहले भी आतातियों ने भारत की गरिमा पर प्रहार किया है। इन आसुरी प्रवृत्तियों के उन्मूलन के लिए शास्त्रों व पुराणों में शक्ति की उपासना का महत्त्व बताया गया है। हमारे देश में माँ दुर्गा को असुरों का संहारकर्ता माना गया है, इसीलिए भारत में नवरात्र साधना को बहुत श्रद्धा-भक्ति से मनाया जाता है। नवरात्रि माँ दुर्गा की पूजा का विशेष त्यौहार है, नौ दिनों तक माँ दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस वर्ष 6 अप्रैल से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रहा है, जिसमें हम सबको सामूहिक साधना, राष्ट्र हित के लिए करने की आवश्यकता है, जिससे तप की ऊर्जा उत्पन्न हो और वातावरण शुद्ध हो। चैत्र नवरात्र के इन पावन दिनों में हम भारत माता की अखंडता, शांति व सुरक्षा के लिए भी साधना करें, क्योंकि यदि हमारा राष्ट्र सुरक्षित है, तो हमारा अस्तित्व सुरक्षित है। इसलिए हम सब संकल्प करें-वयं राष्ट्र जाग्रयाम् पुरोहितः।

(लेखक - अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख व देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलाधिपति हैं।)

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