नीति / चाणक्य नीति, इन हालातों में इंसान खुद को गलत नहीं मानता, लेकिन बाद में वो पछताता है



Chanakya Niti: Chanakya neeti says person should not give up in these situations else he regret
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Chanakya Niti: Chanakya neeti says person should not give up in these situations else he regret

Dainik Bhaskar

Jan 08, 2019, 07:43 AM IST

चाणक्य नीति में छठे अध्याय के आठवें श्लोक में चाणक्य ने इंसान की उन स्थितियों के बारे में बताया है जब इंसान अंधा हो जाता है यानी उसे खुद की गलती नहीं दिखाई देती। ऐसे हालातों के खत्म होने के बाद इंसान को अपनी गलतियों पर पछतावा होता है, लेकिन तब तक समय निकल चुका होता है। चाणक्य नीति में ऐसी ही कई बातें बताई गई हैं जिन्हे समझना और अपनाना बहुत जरुरी है। चाणक्य नीति में मानविय ज्ञान आध्यात्म और नीति-नियमों के बारे में बताया गया है। इन बातों को 17 अध्यायों में बांटकर नीति ग्रंथ बनाया गया है।

 

  • चाणक्य नीति श्लोक - 

पश्यति च जन्मान्धः कामान्धो नैव पश्यति ।
मदोन्मत्ता न पश्यन्ति अर्थी दोषं न पश्यति ॥

 

  • चाणक्य नीति में इसका अर्थ है कि 4 तरह से लोग अंधे हो जाते हैं। पहले वो जो जन्म से ही नहीं देख पाते हैं।
     
  • दूसरे वाले लोग जिन पर काम वासना हावी हाे जाती है। ऐसे लोगों को धर्म ग्रंथों में कामान्ध भी कहा जाता है। जिन लोगों पर कामवासना हावी हो जाती है फिर वो लोग सही-गलत का फैसला नहीं कर पाते और गलत काम कर बैठते हैं।
     
  • इनके अलावा ऐसे लोग जो किसी तरह का नशा करते हैं और जो अहंकारी होते हैं। ऐसे लोगों को भी अपनी गलती नहीं दिखती। चाणक्य नीति में ऐसे लोगों को भी अंधा कहा गया है।
     
  • चाणक्य ने ऐसे लोगों को भी अंधा कहा है जो सिर्फ पैसा पाने के लिए कोशिश करते रहते हैं। इस तरह के लोगों को पैसों के कारण कुछ भी गलत नहीं लगता।
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