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चाणक्य नीति : बुढ़ापे में जीवन साथी की मृत्यु हो जाए या दुश्मन के हाथों में अपना धन चले जाए तो जीवन में बढ़ जाती हैं परेशानियां

जब जीवन में हो जाए 3 बातें तो समझ लें बुरा समय हो सकता है शुरू

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2018, 05:02 PM IST
chanakya niti, life management tips for happiness in hindi, how to get success

रिलिजन डेस्क। किसी व्यक्ति को भाग्य का साथ मिल रहा है या नहीं, ये वर्तमान परिस्थितियों को देखकर समझा जा सकता है। आचार्य चाणक्य ने एक नीति में बताया है कि जब जीवन में 3 बातें हो जाए तो समझ लेना चाहिए कि व्यक्ति को भाग्य का साथ नहीं मिल रहा है और उसका बुरा समय शुरू हो सकता है। ऐसी स्थितियों में धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए। शांति काम करेंगे तो बुरा समय दूर हो सकता है। यहां जानिए ये तीन परिस्थितियां कौन-कौन सी हैं...

ये है चाणक्य नीति के आठवें अध्याय का नवां श्लोक :

वृद्धकाले मृता भार्या बन्धुहस्ते गतं धनम्।

भोजनं च पराधीनं त्रय: पुंसां विडम्बना:।।

पहली बात

चाणक्य कहते हैं अगर किसी वृद्ध स्त्री या पुरुष का जीवन साथी मर जाए तो ये उसके लिए दुर्भाग्य की बात है। जवानी में जीवन साथी का साथ छुट जाता है तो व्यक्ति दूसरा विवाह भी कर सकता है, लेकिन बुढ़ापे में ये संभव नहीं हो पाता है। बुढ़ापे में जीवन साथी का साथ होना बहुत जरूरी है, इस समय में अकेलेपन से निराशा और मानसिक तनाव बढ़ाता है।

दूसरी बात

अगर हमारा पैसा किसी शत्रु के हाथों में चले जाए तो ये हमारे लिए दुर्भाग्य की बात है। व्यक्ति का खुद का कमाया हुआ धन शत्रु के हाथ में चले गया तो दोहरी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। एक तो धन हानि होती है और दूसरी तरफ शत्रु हमारे धन का उपयोग हमारे विरुद्ध ही करेगा, हमारे धन से हमें ही नुकसान पहुंचाएगा।

तीसरी बात

किसी व्यक्ति का पराए घर में या गुलाम बनकर रहना भी दुर्भाग्य की बात है। पराए घर में रहते हुए व्यक्ति को खुद की इच्छा से कोई भी काम करने के लिए दूसरों की अनुमति लेना पड़ती है। पराए घर में रहने वाले पुरुष की आजादी पूरी तरह छीन जाती है।

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