कौटिल्य की सीख / चाणक्य नीति में लिखा है, दूसरों की पीड़ा नहीं समझते हैं ये 6 लोग



Chanakya Niti: These 6 Types of People Do Not Understand the Pain of Others
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Chanakya Niti: These 6 Types of People Do Not Understand the Pain of Others

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2019, 07:07 AM IST

चाणक्य नीति के सत्रहवें अध्याय के 19वें श्लोक में उन 6 लोगों के बारे में बताया है जो दूसरों का दुख या पीड़ा नहीं समझते हैं। चाणक्य के अनुसार इनके अलावा अग्नि और कांटा भी किसी की पीड़ा नहीं समझ सकता। आचार्य चाणक्य बताते हैं कि बुद्धिमान लोगों को ये बात पता होनी चाहिए कि कौन उसका दुख समझ सकता है और कौन नहीं। ये बात जानकर उन लोगों से वैसा ही व्यवहार करें। चाणक्य के अनुसार बुद्धिमान लोगों को राजा, वैश्या और बालक सहित अन्य 5 लोगों या चीजों को लेकर भावुक नहीं होना चाहिए, क्योंकि जो दुख को न समझे उसके सामने अपना दुख रखने से क्या फायदा।

 

  • चाणक्य नीति के सत्रहवें अध्याय का उन्नीसवां श्लोक

राजा वेश्या यमश्चाग्निस्तस्करो बालयाचकौ ।

परदुःखं न जानन्ति अष्टमो ग्रामकण्टकः ॥ १७ -१९

 

चाणक्य कहते हैं कि राजा, वैश्या, यम, अग्नि, चोर, बालक, याचक और कांटा ये 8 किसी की भावनाओं काे नहीं समझते। इन्हे किसी के दुख और पीड़ा से कोई मतलब नहीं रहता है। इसलिए इनके साथ समझदारी से काम लें। इनके सामने अपनी पीड़ा और दुख बताने से कोई फायदा नहीं होता है। राजा हमेशा नियम और सत्य को देखकर ही न्याय करता है। वैश्या को पैसों से मतलब होता है। यम अगर पीड़ा को समझेंगे तो किसी की मृत्यु ही नहीं होगी। अग्नि की प्रकृति ही जलाना है। चाेर किसी की पीड़ा नहीं समझते। बालक की बुद्धि कम होती है इसलिए दूसरों की पीड़ा और भावनाओं से वह दूर होता है। चाणक्य मांगने वाले लोगों को भी दुख देने वाला ही बताते हैं यानी किसी से कोई भी चीज मांगने वाले लोग बस अपनी ही इच्छा पूरी करना जानते हैं। इनके अलावा कांटे की प्रकृति भी चुभना होती है। इसलिए राजा हो या बालक कांटा चुभन ही देता है।

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