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महर्षि कश्यप और देवमाता अदिति के पुत्र हैं सूर्यदेव, यजुर्वेद में इन्हें कहा गया है देवताओं की आंख, 12 महीनों में अलग-अलग नाम से की जाती है इनकी पूजा

यमराज और शनिदेव हैं सूर्य के पुत्र, और कौन-कौन से इनके परिवार में?

Dainik Bhaskar

Nov 10, 2018, 04:00 PM IST
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रिलिजन डेस्क। धर्म ग्रंथों में सूर्य को प्रत्यक्ष देवता माना गया है। सूर्य की रोशनी से ही जीवन संभव है इसलिए पंचदेवों में इनकी पूजा भी अनिवार्य रूप से की जाती है। प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य देना हिंदू धर्म की परंपरा में शामिल है। ग्रंथों में सूर्यदेव के परिवार व उनके बारे में बहुत सी रोचक बातें बताई गई हैं जो आम लोग नहीं जानते। छठ पर्व (13 नवंबर, मंगलवार) के अवसर पर हम आपको सूर्यदेव के परिवार व उनके बारे में रोचक बातें बता रहे हैं, जो इस प्रकार है-

1. धर्म ग्रंथों के अनुसार, सूर्यदेव की माता अदिति व पिता महर्षि कश्यप हैं। अदिति का पुत्र होने से इन्हें आदित्य भी कहते हैं।

2. सूर्यदेव का विवाह देवशिल्पी विश्वकर्मा की पुत्री संज्ञा से हुआ है। यजुर्वेद ने सूर्य को भगवान का नेत्र कहा गया है।

3. धर्म ग्रंथों में सूर्यदेव व संज्ञा के दो पुत्र व एक पुत्री बताए गए हैं, ये हैं वैवस्वत मनु व यमराज तथा यमुना।

4. सूर्य का तेज सहन न कर पाने के कारण संज्ञा ने अपनी छाया उनके पास छोड़ दी और स्वयं तप करने लगीं।

5. सूर्यदेव व संज्ञा की छाया से शनिदेव, सावर्णि मनु और तपती नामक कन्या हुई। सूर्य व शनि शत्रु माने जाते हैं।

6. त्रेतायुग में कपिराज सुग्रीव और द्वापर युग में महारथी कर्ण भगवान सूर्य के अंश से ही उत्पन्न हुए थे।

7. पक्षीराज गरुड़ के भाई अरुण सूर्यदेव का रथ चलाते हैं। इस रथ में 7 घोड़े हैं जो 7 दिनों का प्रतीक हैं।

8. सूर्यदेव की पूजा 12 महीनों में अलग-अलग नामों से की जाती है। गायत्री मंत्र में भी सूर्य की उपासना ही की गई है।

9. सूर्यदेव को पता चला कि संज्ञा घोड़ी के रूप में तप कर रही है तो वे भी उसी रूप में उनके पास पहुंचे। इसी से अश्विनकुमारों का जन्म हुआ।

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