दीपावली पर संयोग / इस साल रूप चौदस की रात प्रदोष अमावस्या होने से महालक्ष्मी पूजा का मुहूर्त



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  • 27 अक्टूबर की दोपहर 12.23 बजे कार्तिक अमावस्या शुरू हो जाएगी, जो 28 अक्टूबर की सुबह 9.07 बजे तक ही रहेगी

Dainik Bhaskar

Sep 09, 2019, 12:26 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। इस बार दीपावली का लक्ष्मी पूजन 27 अक्टूबर को रूप चौदस की रात में होगा। ऐसा इसलिए हो रहा है कि चौदस दोपहर 12.23 बजे तक ही है। इसके बाद अमावस्या लगेगी, जो 28 को सुबह 9.07 बजे तक रहेगी। दीपावली का लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल युक्त अमावस्या में होता है। प्रदोष काल 27 को शाम 5.48 से रात 8.21 बजे तक रहेगा। इस समय अमावस्या और प्रदोष काल होने से 27 की रात ही लक्ष्मी पूजन किया जाएगा। 28 को उदयकाल में अमावस्या सुबह 9.07 बजे तक है तथा इस दिन सोमवार है, इसलिए सोमवती अमावस्या का स्नान सुबह ही समाप्त हो जाएगा। इसके बाद गोवर्धन पूजा और अन्नकूट उत्सव होंगे।
दीपावली का ऐसा संयोग तिथियों के क्रम के कारण हो रहा है। ज्योतिषियों का मानना है कि दीपावली पर लक्ष्मी पूजन प्रदोष काल में किया जाना सर्वश्रेष्ठ रहता है। यह मुहूर्त 27 की रात है। इसलिए उदयकाल की अमावस्या 28 को होने के बावजूद पूजन नहीं होगा। पं. आनंदशंकर व्यास के अनुसार दीपावली को लेकर कहीं कोई मतभेद नहीं है। सभी लोग 27 अक्टूबर की रात प्रदोष काल में लक्ष्मी का पूजन करें। पं. श्यामनारायण व्यास कहते हैं- 27 को चौदस उदयकाल में होने के बाद दोपहर से अमावस्या लग जाएगी जो 28 को सुबह तक रहेगी। उदियात तिथि के अनुसार अमावस्या 28 को रहेगी लेकिन लक्ष्मी पूजन के लिए मान्य प्रदोष काल 27 की रात होने से उस रात ही पूजन होगा। जबकि स्नान की अमावस्या 28 को मनाई जाएगी क्योंकि उदयकाल में अमावस्या है।

  • इस बार 15 दिन के श्राद्ध, 28 सितंबर को सर्व पितृ अमावस्या

ज्योतिषियों के अनुसार 12 सितंबर को अनंत चतुर्दशी पर सुकर्मा योग है। इसलिए चौदस पर अनंत भगवान अच्छे कर्म करने वालों को इच्छित फल देंगे। 13 सितंबर से श्राद्ध पक्ष शुरू होगा। इस बार श्राद्ध 15 दिन के हैं। त्रियोदशी (किन्हीं पंचांग में चौदस) तिथि क्षय होने से सर्व पितृ अमावस्या 28 सितंबर को रहेगी। इस दिन त्रिवेणी पर शनिश्चरी स्नान भी होगा। ज्योतिषविद् अर्चना सरमंडल के अनुसार श्राद्धपक्ष में सिद्धवट व रामघाट पर पितृ कर्म कराने की मान्यता है। देश के चार वटवृक्ष अनादि हैं जिनमें उज्जैन का सिद्धवट जहां पितृ कर्म कराते हैं।

  • 9 दिन की नवरात्रि, 7 अक्टूबर को महानवमी

पं. मनीष शर्मा के अनुसार नवरात्रि 29 सिंतबर से शुरू होगी तथा 7 अक्टूबर को महानवमी होगी। 9 दिन देवी आराधना की जाएगी। नवरात्रि के दौरान विभिन्न योगों मे देवी का पूजन होगा।

  • यह त्योहार विशेष योग में

8 अक्टूबर को दशहरा रवियोग में मनेगा। रात 8 बजे रवि योग लगेगा। इस दिन बुद्ध जंयती भी है। 13 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा, वाल्मीकि जयंती रहेगी। 8 नवंबर को देवप्रबोधनी एकादशी होगी।

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