27 को लक्ष्मी पूजा / 1995 और 2007 में भी दीपावली पर चतुर्दशी और अमावस्या तिथि एक ही दिन थी



Diwali Deepavali Lakshmi Puja Muhurat 2019: Lakshmi Puja Muhurat - Laxmi Puja 2019 Date And Time
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Diwali Deepavali Lakshmi Puja Muhurat 2019: Lakshmi Puja Muhurat - Laxmi Puja 2019 Date And Time

  • शुक्रवार, 25 अक्टूबर की सुबह द्वादशी तिथि और शाम को धनतेरस रहेगी, 26 अक्टूबर को रूप चौदस रहेगी

Dainik Bhaskar

Oct 23, 2019, 06:08 PM IST

जीवन मंत्र डेस्क। इस साल दीपावली पर चतुर्दशी और अमावस्या तिथि रहेगी। रविवार, 27 अक्टूबर को सुबह चतुर्दशी और शाम को अमावस्या रहेगी। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार 27 की शाम को ही लक्ष्मी पूजा होगी। इस दिन गुरु वृश्चिक राशि में रहेगा। सूर्य और चंद्र तुला राशि रहेंगे। इस साल से पहले भी गुरु के वृश्चिक में रहते हुए चतुर्दशी और अमावस्या के योग में दीपावली मनाई गई थी। 12 वर्ष पहले 8 नवंबर 2007 को भी ऐसा ही योग आया था। उस समय भी शनि और केतु की युति थी, लेकिन ये ग्रह सिंह राशि में स्थित थे। 23 अक्टूबर 1995 को गुरु वृश्चिक राशि में था और तब भी चतुर्दशी युक्त अमावस्या तिथि पर दीपावली का पर्व मनाया गया था।
दीपावली से जुड़ी मान्यता
मान्यता है कि देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था। इस मंथन में ही कार्तिक मास की अमावस्या तिथि पर देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। इसके बाद भगवान विष्णु ने लक्ष्मी का वरण किया था। इसलिए हर साल कार्तिक अमावस्या पर लक्ष्मी पूजन किया जाता है। समुद्र मंथन से देवताओं के वैद्य भगवान धनवंतरि भी प्रकट हुए थे। इनकी पूजा धनतेरस पर की जाती है।
27 अक्टूबर की सुबह चतुर्दशी और शाम को रहेगी अमावस्या
रविवार, 27 अक्टूबर की सुबह चतुर्दशी तिथि रहेगी और शाम को अमावस्या रहेगी। इस वजह से रविवार को ही लक्ष्मी पूजन किया जाएगा। पं. शर्मा के अनुसार देवी लक्ष्मी की पूजा के लिए रात का समय ही श्रेष्ठ रहता है। इस वजह से अधिकतर लोग देर रात लक्ष्मी पूजन करते हैं। इस संबंध में मान्यता है कि जो लोग दीपावली की रात जागकर लक्ष्मी पूजा करते हैं, उनके घर में देवी लक्ष्मी का आगमन होता है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
शुक्रवार, 25 अक्टूबर की सुबह द्वादशी तिथि और शाम को धनतेरस रहेगी। पंचांग भेद से 26 अक्टूबर को रूप चौदस रहेगी। 27 अक्टूबर को भी सुबह रूप चौदस रहेगी और प्रदोष कालीन अमावस्या रात में होने से दीपावली 27 को ही मनाना श्रेष्ठ है। जो लोग अमावस्या तिथि पर पितरों के लिए श्राद्ध करना चाहते हैं, उन्हें सोमवार, 28 अक्टूबर की सुबह श्राद्ध कर्म करना चाहिए। श्राद्ध कर्म के लिए सुबह का समय श्रेष्ठ रहता है और 28 अक्टूबर की सुबह अमावस्या तिथि रहेगी। 

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