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12 जुलाई से 8 नवंबर तक विष्णुजी करेंगे विश्राम, राजा बलि को दिया था वरदान

एक वर्ष पहले
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  • देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा में पीला वस्त्र चढ़ाएं

जीवन मंत्र डेस्क। शुक्रवार, 12 जुलाई को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी है। इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं। इस दिन से देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु चार महीने तक पाताल में शयन करते हैं। देवउठनी एकादशी (शुक्रवार, 8 नवंबर) कार्तिक मास में आती है। आषाढ़ मास से कार्तिक मास तक ये चार महीने चातुर्मास कहलाते हैं। इस दौरान कोई मांगलिक कार्य भी नहीं किए जाते है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार जानिए देवउठनी एकादशी से जुड़ी खास बातें...
> मान्यता है कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार में दैत्यराज बलि से तीन पग भूमि दान के रूप में मांगी थी। भगवान ने पहले पग में संपूर्ण पृथ्वी, आकाश और सभी दिशाओं को ढंक लिया। अगले पग में सम्पूर्ण स्वर्ग लोक ले लिया। तीसरे पग में बलि ने अपने आप को समर्पित करते हुए सिर पर पग रखने को कहा। इस प्रकार के दान से प्रसन्न होकर भगवान ने बलि को पाताल लोक का राजा बना दिया और कहा वर मांगो।
बलि ने वर मांगते हुए कहा कि भगवान आप मेरे महल में निवास करें। तब भगवान ने बलि की भक्ति को देखते हुए चार मास तक उसके महल में रहने का वरदान दिया। भगवान विष्णु देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधिनी एकादशी तक पाताल में बलि के महल में निवास करते हैं।

  • एकादशी पर क्या करना चाहिए

देवशयनी एकादशी की सुबह जल्दी उठें। स्नान के बाद घर के मंदिर में या किसी अन्य मंदिर में भगवान विष्णु की सोने, चांदी, तांबे या पीतल की मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद पूजा करें। विष्णुजी को पीतांबर (पीला कपड़ा) अर्पित करें। व्रत करने का संकल्प करें। आरती करें और अंत में अन्य भक्तों को प्रसाद वितरीत करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा दें। अंत में चादर, गद्दे, तकिए, पलंग पर श्रीविष्णु को शयन कराएं।

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